ग्रीन फील्ड हाईवे के जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में आक्रोश
जनपद संभल में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड हाईवे (मुरादाबाद वाया अलीगढ़) के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है।
जनपद संभल में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड हाईवे (मुरादाबाद वाया अलीगढ़) के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है। इसी मुद्दे पर आज गांव खिरनी की मार्केट पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) राकेश टिकैत की आपातकालीन पंचायत आयोजित की गई।
पंचायत में संगठन की महिला जिला अध्यक्ष गायत्री यादव मुख्य रूप से मौजूद रहीं। उनके साथ संगठन के कई पदाधिकारी, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और किसान भी शामिल हुए। पंचायत में किसानों ने जमीन अधिग्रहण के तरीके पर सवाल उठाए और साफ कहा कि वे अपनी उपजाऊ जमीनों को ऐसे नहीं जाने देंगे।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा खिरनी से लेकर लखनपुर तक पुराने हाईवे की साइड की उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों ने कहा कि ये जमीनें उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र सहारा हैं। उनका कहना है कि बिना उचित मुआवजे और बिना सहमति के जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंचायत में किसानों ने यह भी कहा कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीन रही है। किसानों का दावा है कि ऐसा होने से सैकड़ों परिवार बेरोजगार हो जाएंगे। इसी को लेकर किसानों ने एकजुट होकर अधिग्रहण का विरोध करने का ऐलान किया।
इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि अगर किसानों की मांगों को नहीं सुना गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पंचायत में मौजूद लोगों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आगे भी साथ रहने की बात कही। पंचायत का समापन जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय संविधान के नारों के साथ हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किसान किस बात से नाराज हैं?
संभल में प्रस्तावित Green Field Highway के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान नाराज हैं। उनका कहना है कि उपजाऊ जमीन बिना सहमति और उचित मुआवजे के ली जा रही है।
किस गांव में किसानों की पंचायत हुई?
किसानों की आपातकालीन पंचायत गांव खिरनी की मार्केट में हुई। इसमें भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) राकेश टिकैत के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और किसान शामिल हुए।
किसानों का जमीन अधिग्रहण पर क्या आरोप है?
किसानों का आरोप है कि प्रशासन खिरनी से लखनपुर तक पुराने हाईवे की साइड की उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण कर रहा है, जो उनकी रोजी-रोटी का मुख्य सहारा है।
किसानों ने आगे क्या चेतावनी दी है?
किसानों और पदाधिकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं सुनी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और वे जमीन अधिग्रहण का विरोध जारी रखेंगे।
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