दिल्ली-एनसीआर में 2 लाख पुराने ट्रक-बस को नए वाहन से बदलेगी सरकार
केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर में 2 लाख से ज़्यादा पुराने ट्रक और बस को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन से बदलने की योजना लागू कर रही है।
केंद्र सरकार अपनी परिवर्तन योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में 2 लाख से ज़्यादा पुराने ट्रक और बस को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन से बदलने की तैयारी कर रही है, योजना शुरू होने के पहले महीने में ही 1,300 से ज़्यादा वाहन मालिकों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है।
चार राज्यों के 37 ज़िलों में लागू होगी योजना
यह योजना नेशनल कैपिटल रीजन के 37 ज़िलों में लागू होगी: दिल्ली के 13, हरियाणा के 14, उत्तर प्रदेश के 8, और राजस्थान के 2 ज़िले। इसका मकसद इन इलाकों में रजिस्टर्ड बीएस-4 और उससे पुराने कमर्शियल वाहनों को हटाकर उनकी जगह बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन लाना है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इस योजना को लागू कर रहा है और एक साल में सभी लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन पूरा करने का टारगेट है। करीब 1.9 लाख ट्रक और 16,329 बसों को इससे फायदा मिलने की उम्मीद है।
कमर्शियल वाहनों पर क्यों फोकस
दिल्ली-एनसीआर में कुल वाहनों में ट्रक और बसों की हिस्सेदारी सिर्फ 3 फीसदी है, लेकिन इलाके के पीएम2.5 प्रदूषण में इनका योगदान करीब 36 फीसदी है। प्रदूषण में इस भारी हिस्सेदारी की वजह से ही पुराने और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को साफ-सुथरे विकल्पों से बदलने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
वाहन मालिकों को मिलेंगे पैसों के फायदे
पुराने वाहन स्क्रैप करके नए कम प्रदूषण वाले वाहन खरीदने वालों को कई तरह के आर्थिक लाभ मिलेंगे। बीएस-6 या उससे बेहतर वाहनों पर योजना 5 साल के लिए वाहन लोन पर 5 फीसदी ब्याज में छूट, 10 साल के लिए 100 फीसदी रोड टैक्स में छूट, निर्माताओं की तरफ से एक्स-शोरूम कीमत पर कम से कम 8 फीसदी की छूट, और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देती है।
बीएस-6 डीज़ल या सीएनजी वाहन खरीदने वालों को वाहन की कैटेगरी के हिसाब से 5 साल तक हर महीने ₹1,200 से ₹4,800 तक के फ्यूल वाउचर मिलेंगे। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को इसकी जगह ₹64,000 से ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त इंसेंटिव मिलेगा।
बजट और लागू करने का ढांचा
इस योजना के लिए कुल ₹9,585 करोड़ का खर्च आएगा, जिसमें से केंद्र सरकार ₹5,041 करोड़ का बजट सपोर्ट देगी। पैसा आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड के ज़रिए दिया जाएगा, जबकि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इसे लागू करेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून में परिवर्तन को मंज़ूरी दी थी, जिसका मकसद दिल्ली और एनसीआर के हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ज़िलों में रजिस्टर्ड 2 लाख से ज़्यादा बीएस-4 और पुराने ट्रक-बसों को तेज़ी से बदलना है।
स्रोत: Live Hindustan
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली-एनसीआर में परिवर्तन योजना क्या है?
यह सरकार की योजना है जिसमें 2 लाख से ज़्यादा पुराने ट्रक और बसों को बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन से बदला जाएगा। यह योजना दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 37 ज़िलों में लागू होगी।
पुराने वाहन स्क्रैप करके नए वाहन खरीदने पर क्या-क्या फायदे मिलेंगे?
वाहन मालिकों को 5 साल के लिए लोन पर 5 फीसदी ब्याज छूट, 10 साल के लिए 100 फीसदी रोड टैक्स छूट, निर्माता से कम से कम 8 फीसदी की कीमत में छूट, और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मिलेगी। डीज़ल या सीएनजी वाहन के लिए हर महीने ₹1,200 से ₹4,800 का फ्यूल वाउचर मिलेगा।
पुराने ट्रक और बसों को हटाने पर सरकार इतना ज़ोर क्यों दे रही है?
दिल्ली-एनसीआर में ट्रक और बसें कुल वाहनों का सिर्फ 3 फीसदी हैं, लेकिन पीएम2.5 प्रदूषण में इनका योगदान करीब 36 फीसदी है। इसलिए पुराने और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल वाहनों को साफ-सुथरे विकल्पों से बदलने की ज़रूरत है।
इस योजना के लिए कुल कितना खर्च आएगा?
योजना के लिए कुल ₹9,585 करोड़ का खर्च आएगा, जिसमें से केंद्र सरकार ₹5,041 करोड़ का बजट सपोर्ट देगी। बाकी राशि अन्य स्रोतों से आएगी।
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