संभल में गंगा उफान पर, आधा दर्जन गांवों में घुसा पानी
संभल जिले में गंगा नदी का जलस्तर सितंबर माह में तीसरी बार बढ़ने से बाढ़ का संकट और गहरा गया है। बीते तीन दिनों में गंगा में करीब 60 हजार क्यूसेक पानी बढ़ा है।
संभल जिले में गंगा नदी का जलस्तर सितंबर माह में तीसरी बार बढ़ने से बाढ़ का संकट और गहरा गया है। बीते तीन दिनों में गंगा में करीब 60 हजार क्यूसेक पानी बढ़ा है। इस समय नरौरा बैराज से 1 लाख 63 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। इसी वजह से निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं और गांवों तक पानी पहुंच गया है। रजत मल्होत्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, संभल में गंगा का कहर अब कई गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।
बाढ़ का पानी जुनावई ब्लॉक के आधा दर्जन गांवों में घुस गया है। बझांगी, उदियानगला, तोतापुर और रघूपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। गांवों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जगह रास्तों पर पानी है और आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है।
बझांगी और उदियानगला गांव में मेन रोड पर ही घुटनों तक पानी भरा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि सभी लिंक रोड कट गए हैं। गांवों का संपर्क टूटने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। गांव में मछुआरे मछली पकड़ते भी दिखे।
सबसे बड़ी परेशानी बिजली को लेकर है। बझांगी और उदियानगला समेत इन इलाकों में पिछले एक महीने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। लोग अंधेरे में सोने को मजबूर हैं। बिजली न होने की वजह से मोबाइल और टॉर्च तक चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। मोबाइल टावर भी बंद पड़ा है, जिससे संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ऐसे में गांवों के लोग बाहर सूचना भेजने और मदद के लिए संपर्क करने में भी दिक्कत झेल रहे हैं।
बाढ़ ने किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। गांवों में बाजरा और धान की खड़ी फसल पानी में डूबकर सड़ रही है। निचले इलाकों में गन्ने की फसल भी खराब होने लगी है। सितंबर में तीसरी बार बाढ़ आने से किसानों की सारी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
जलभराव की वजह से गांवों में पेयजल और पशुओं के चारे की भारी किल्लत हो गई है। पशुओं के सामने चारे और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के लिए पीने के पानी की समस्या भी बड़ी परेशानी बन गई है। पानी भरे रहने से गांवों में भयंकर मच्छर पैदा हो गए हैं। मच्छरों की वजह से ग्रामीण रात में सो भी नहीं पा रहे हैं। संभल में बाढ़ से हाहाकार जैसे हालात हैं और आधा दर्जन गांव इस समय गंगा के बढ़े जलस्तर की मार झेल रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संभल में बाढ़ क्यों बढ़ी है?
गंगा का जलस्तर सितंबर में तीसरी बार बढ़ा है। पिछले तीन दिनों में करीब 60 हजार क्यूसेक पानी बढ़ा और नरौरा बैराज से 1 लाख 63 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे निचले इलाकों में पानी घुस गया है।
कौन-कौन से गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
जुनावई ब्लॉक के करीब आधा दर्जन गांवों में पानी घुसा है। बझांगी, उदियानगला, तोतापुर और रघूपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।
गांवों में लोगों को सबसे बड़ी दिक्कत क्या हो रही है?
कई रास्तों और लिंक रोड पर पानी भरने से संपर्क टूट गया है। बझांगी और उदियानगला में मेन रोड पर घुटनों तक पानी है। बिजली एक महीने से ठप है, मोबाइल और टॉर्च चार्ज नहीं हो पा रहे और मोबाइल टावर भी बंद है।
फसलों को कितना नुकसान हुआ है?
बाजरा और धान की खड़ी फसल पानी में डूबकर सड़ रही है। निचले इलाकों में गन्ने की फसल भी खराब होने लगी है। सितंबर में तीसरी बार बाढ़ आने से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
पानी भरने से और कौन सी समस्याएं बढ़ी हैं?
गांवों में पीने के पानी और पशुओं के चारे की कमी हो गई है। जलभराव से मच्छर बहुत बढ़ गए हैं, जिससे लोग रात में सो भी नहीं पा रहे हैं।
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