फिरोजाबाद में वेतन को लेकर महापौर खुद सफाई कर्मचारियों के धरने पर बैठीं
फिरोजाबाद नगर निगम में ठेका सफाई कर्मचारियों के वेतन और दूसरी मांगों को लेकर सोमवार को महापौर कामिनी राठौर खुद धरने पर बैठ गईं।
फिरोजाबाद नगर निगम में ठेका सफाई कर्मचारियों के वेतन और दूसरी मांगों को लेकर सोमवार को महापौर कामिनी राठौर खुद धरने पर बैठ गईं। भाजपा की महापौर ने नगर आयुक्त के खिलाफ चल रहे कर्मचारियों के धरने में शामिल होकर साफ कहा कि जब तक कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन नहीं पहुंचता, तब तक वह भी धरने से नहीं उठेंगी। महापौर के इस कदम से नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और ठेका व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले नगर निगम परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी धरने पर बैठे। इनमें सफाई कर्मचारी, सीवर हेल्पर, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कर्मचारी और अन्य ठेका कर्मी शामिल रहे। कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया। उन्होंने वेतन समेत अपनी अलग-अलग मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की।
धरने में महापौर के शामिल होने के बाद कर्मचारियों के प्रदर्शन को और मजबूती मिली। महापौर कामिनी राठौर ने कर्मचारियों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और नगर निगम के अधिकारियों से इस मामले पर बात की। उनका कहना था कि कर्मचारियों की मुख्य मांग वेतन को लेकर है और इस मामले को केवल आश्वासन देकर टाला नहीं जा सकता।
महापौर ने बताया कि एक सितंबर को भी सफाई कर्मचारियों ने वेतन और दूसरी मांगों को लेकर हड़ताल की थी। उस समय आगरा की तर्ज पर फिरोजाबाद में भी सफाई कर्मचारियों को करीब 15 हजार रुपये वेतन देने की मांग उठाई गई थी। विधायक और नगर आयुक्त की ओर से कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था।
महापौर के मुताबिक, उस आश्वासन के एक महीने बाद भी कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन नहीं पहुंचा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक महीने में वेतन नहीं मिल पाया तो कर्मचारी केवल आश्वासन पर कैसे भरोसा करें। इसी वजह से कर्मचारियों को फिर वेतन के लिए धरने पर बैठना पड़ा है।
धरने की जानकारी मिलने के बाद महापौर ने नगर आयुक्त और नगर निगम के अन्य अधिकारियों को मौके पर बुलाया। वहां कर्मचारियों की समस्या को लेकर बातचीत हुई। अधिकारियों ने बताया कि आवश्यक हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों के खातों में वेतन भेज दिया जाएगा।
इस पर महापौर ने फाइल मौके पर ही मंगाने को कहा। इसके बाद वह कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गईं। महापौर ने कहा, "जब तक इनके खाते में सैलरी नहीं आती है, तब तक मैं भी इनके साथ यहीं धरने पर बैठी रहूंगी।"
महापौर ने कर्मचारियों को नगर निगम परिवार का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी सर्दी, गर्मी, आंधी और तूफान में भी शहर की सफाई व्यवस्था संभालते हैं। उनके मुताबिक, जो कर्मचारी हर मौसम में शहर की सफाई का काम करते हैं, उनके वेतन और दूसरी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने वेतन की रकम को लेकर भी मांग रखी। उनका कहना है कि अकुशल ठेका कर्मियों को 15,007 रुपये और कुशल ठेका कर्मियों को 18 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। कर्मचारियों ने यह भी मांग की कि वेतन उनके बैंक खातों में सीधे पहुंचाया जाए।
कर्मचारियों की मांग है कि बैंक खातों में भेजे जाने वाले वेतन में किसी तरह की कटौती नहीं की जाए। उन्होंने वेतन भुगतान की प्रक्रिया को साफ रखने और पूरी रकम सीधे कर्मचारियों तक पहुंचाने की मांग उठाई।
उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ ने साईनाथ कंपनी को लेकर भी आरोप लगाए। संघ का आरोप है कि कंपनी ने अनुबंध के नाम पर ठेका कर्मियों से कथित रूप से अनुचित शर्तों वाला समझौता कराया है। संघ ने इस समझौते को निरस्त करने की मांग की।
कर्मचारियों ने काम के दौरान किसी ठेका कर्मी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को मृत कर्मचारी के स्थान पर नियुक्ति देने की मांग भी रखी गई।
कर्मचारियों ने प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए परिवार को 25 हजार रुपये की तत्काल सहायता देने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में परिवार को तुरंत मदद मिलनी चाहिए।
इसके अलावा कर्मचारियों ने स्थानांतरण या नियुक्ति से पहले कर्मचारी संघ की सहमति लेने की मांग की। संघ का कहना है कि किसी कर्मचारी के स्थानांतरण या नई नियुक्ति से पहले उसकी प्रक्रिया में कर्मचारी संघ की सहमति शामिल होनी चाहिए।
ठेका सफाई कर्मचारियों और अन्य ठेका कर्मियों से जुड़े ठेकों को लेकर भी जांच की मांग उठाई गई। कर्मचारी संघ ने कथित अनियमितताओं और दस्तावेजों में गड़बड़ी की एसआईटी से जांच कराने की मांग की है। संघ का आरोप है कि ठेका व्यवस्था से जुड़े मामलों में इन बिंदुओं की जांच जरूरी है।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संघ ने वेतन, अनुबंध, सहायता और जांच से जुड़ी अपनी सभी मांगों पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, भाजपा की महापौर का कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठना इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू रहा। महापौर ने नगर आयुक्त और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कर्मचारियों के बीच बैठकर यह स्पष्ट किया कि वह वेतन खातों में पहुंचने तक धरना जारी रखेंगी। इससे नगर निगम प्रशासन और ठेका व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर सवाल खड़े हो गए हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फिरोजाबाद में महापौर धरने पर क्यों बैठीं?
ठेका सफाई कर्मचारियों के वेतन और दूसरी मांगों को लेकर महापौर कामिनी राठौर धरने पर बैठीं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन आने तक वह धरने से नहीं उठेंगी।
ठेका सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें पूरा मासिक वेतन सीधे बैंक खातों में दिया जाए और उसमें किसी तरह की कटौती न हो।
कर्मचारी कितना वेतन मांग रहे हैं?
कर्मचारी अकुशल ठेका कर्मियों के लिए 15,007 रुपये और कुशल ठेका कर्मियों के लिए 18 हजार रुपये मासिक वेतन मांग रहे हैं।
अधिकारियों ने वेतन भुगतान को लेकर क्या कहा?
अधिकारियों ने कहा कि जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारियों के खातों में वेतन भेज दिया जाएगा।
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