नगला बीच विद्यालय में नौ बालिकाओं ने धारण किए दुर्गा के नौ रूप
नगला बीच विद्यालय में नौ कन्याओं ने देवी स्वरूप धारण कर जगाई नारी शक्ति की अलख मुकुट सजे, देवी रूप दमके और भक्ति के सुरों से विद्यालय परिसर गूंज उठा।
मुकुट सजे, देवी रूप दमके और भक्ति के सुरों से विद्यालय परिसर गूंज उठा। नवरात्रि के पावन अवसर पर प्राथमिक विद्यालय नगला बीच, विकास खंड नारखी में नौ कन्याओं ने मां दुर्गा के नौ स्वरूप धारण किए। बालिकाओं की आकर्षक वेशभूषा और देवी रूप की साज-सज्जा ने विद्यालय के माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस आयोजन में श्रद्धा, उल्लास और नारी शक्ति का संदेश एक साथ दिखाई दिया।
डिजिटल लाइव ब्यूरो के अनुसार, फिरोजाबाद के नगला बीच विद्यालय में हुए इस कार्यक्रम में बालिकाओं ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ बेटियों के सम्मान, शिक्षा और सशक्तीकरण का संदेश भी सामने आया। परंपरा, संस्कार और बच्चों की भागीदारी के इस संगम ने विद्यालय परिसर को भावनाओं और उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम में सोनम ने मां शैलपुत्री का स्वरूप धारण किया। फरहिन मां ब्रह्मचारिणी, परी मां चंद्रघंटा और सादिका मां कूष्मांडा के रूप में सजीं। रिया ने मां स्कंदमाता, कल्पना ने मां कात्यायनी और पायल ने मां कालरात्रि का स्वरूप धारण किया। छवि मां महागौरी और सिद्दीका मां सिद्धिदात्री के रूप में नजर आईं।
नौ देवियों के इन स्वरूपों के जरिए शक्ति, साहस, ज्ञान, करुणा और धैर्य की महत्ता को सामने रखा गया। मुकुट, परिधान और देवी रूप की साज-सज्जा में सजीं बालिकाओं ने विद्यालय परिसर में दिव्यता का माहौल बना दिया। उनकी प्रस्तुति केवल धार्मिक रूपों का प्रदर्शन नहीं रही, बल्कि इसमें बेटियों के आत्मविश्वास और सामर्थ्य का संदेश भी दिखाई दिया।
आयोजन के जरिए यह बात सामने रखी गई कि नारी केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं है। वह शक्ति, आत्मविश्वास और बदलाव की पहचान भी है। नौ कन्याओं के देवी स्वरूपों ने इसी विचार को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया। बालिकाओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बनाया और बेटियों के सम्मान से जुड़े संदेश को लोगों तक पहुंचाया।
नवरात्रि का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति की उपासना का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप जीवन में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने, अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। विद्यालय में आयोजित इस उत्सव में बच्चों को इसी संदेश से जोड़ा गया।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि कन्या पूजन की परंपरा का असली संदेश बेटियों के प्रति सम्मान, संवेदना और बराबरी का भाव पैदा करना है। केवल बेटियों की पूजा करना ही पर्याप्त नहीं है। उनकी शिक्षा, सुरक्षा और उनके सपनों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। बेटियों को समाज में समान अवसर मिलने पर ही नारी शक्ति का सम्मान सही मायने में सार्थक होगा।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रीमा सिंह यादव ने संस्कारों और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों से बच्चों को अपनी परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने का मौका मिलता है।
उन्होंने कहा, “मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस, धैर्य, आत्मबल और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। हमारी बेटियां भी शक्ति और सामर्थ्य की प्रतीक हैं। उनका सम्मान करना, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं तथा उन्हें अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।”
रीमा सिंह यादव ने बच्चों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा और संस्कार, दोनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। आयोजन में देवी स्वरूप धारण करने वाली बालिकाओं के माध्यम से बेटियों की क्षमता और सम्मान का संदेश दिया गया। बच्चों ने धार्मिक परंपरा को अपनी प्रस्तुति से समझा और उसे उत्सव के रूप में सामने रखा।
नवरात्रि उत्सव के दौरान डांडिया और गरबा की थाप पर बच्चों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। भक्ति और उमंग से भरे माहौल में विद्यालय परिसर उत्सव के रंग में रंग गया। बच्चों की भागीदारी से कार्यक्रम में उल्लास बढ़ा और धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों की भी झलक दिखाई दी।
डांडिया-गरबा के दौरान बच्चों ने मिलकर उत्सव का आनंद लिया। इस मौके पर आपसी सहयोग, मेल-मिलाप और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को समझने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम में बच्चों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को सामूहिक रूप दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संगीता, उजाला, किरन एवं सुमिता का विशेष सहयोग रहा। सभी के सामूहिक प्रयासों से आयोजन हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। बालिकाओं की प्रस्तुति, बच्चों का डांडिया-गरबा और विद्यालय परिवार की सहभागिता ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
नगला बीच विद्यालय का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा। नौ देवी स्वरूपों में सजीं कन्याओं ने बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण का संदेश भी दिया। उनकी प्रस्तुति ने यह प्रेरणा दी कि बेटियां परिवार की शान, समाज की शक्ति और देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। नारी शक्ति के प्रति सम्मान और बेटियों को आगे बढ़ाने का संकल्प ही इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नगला बीच विद्यालय में नौ बालिकाओं ने किस अवसर पर देवी रूप धारण किए?
नवरात्रि के अवसर पर नौ बालिकाओं ने मां दुर्गा के नौ स्वरूप धारण किए।
यह कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम फिरोजाबाद के प्राथमिक विद्यालय नगला बीच, विकास खंड नारखी में आयोजित किया गया।
नौ बालिकाओं ने किन देवी स्वरूपों को प्रस्तुत किया?
सोनम ने मां शैलपुत्री, फरहिन ने मां ब्रह्मचारिणी, परी ने मां चंद्रघंटा, सादिका ने मां कूष्मांडा, रिया ने मां स्कंदमाता, कल्पना ने मां कात्यायनी, पायल ने मां कालरात्रि, छवि ने मां महागौरी और सिद्दीका ने मां सिद्धिदात्री का रूप धारण किया।
कार्यक्रम के जरिए क्या संदेश दिया गया?
कार्यक्रम के जरिए बेटियों के सम्मान, शिक्षा, सुरक्षा, बराबरी और सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।
प्रधानाध्यापिका रीमा सिंह यादव ने आयोजन के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी शिक्षा का जरूरी हिस्सा है।
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप
- 2
शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान
- 3
शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप
- 4
गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग
- 5
हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।