महाराष्ट्र में वोटर वेरिफिकेशन की डेडलाइन बढ़कर 8 अगस्त हुई
महाराष्ट्र में SIR की डेडलाइन बढ़ी, वोटर वेरिफिकेशन अब 8 अगस्त तक भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की डेडलाइन बढ़ा दी है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की डेडलाइन बढ़ा दी है। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) अब घर-घर जाकर वोटर वेरिफिकेशन का काम 8 अगस्त तक करेंगे। पहले यह डेडलाइन 29 जुलाई थी। यह फैसला महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की अपील के बाद लिया गया है, जिन्होंने भारी बारिश के कारण पहले चरण में आई बाधाओं का हवाला दिया था।
मतदाता सूची अपडेट के लिए नया शेड्यूल
नए शेड्यूल के मुताबिक, नागरिक अब 17 अगस्त से 16 सितंबर तक अपने क्लेम और ऑब्जेक्शन फाइल कर सकते हैं। पहले इसकी आखिरी तारीख 4 सितंबर थी। इन क्लेम्स की सुनवाई और निपटारा 17 अगस्त से 15 सितंबर के बीच होगा। अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। जॉइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर मनोहर पारकर ने सभी योग्य मतदाताओं से इस प्रक्रिया को तय समय में पूरा करने की अपील की है ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो सके।
बारिश और लॉजिस्टिक चुनौतियां बनीं बाधा
यह विस्तार राज्य में लगातार हो रही बारिश की वजह से आया है, जिसने कई जगहों पर पानी भरने, ट्रांसपोर्ट ब्रेकडाउन और बिजली कटौती जैसी समस्याएं पैदा की हैं। खासकर मुंबई और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में इन समस्याओं ने 30 जून से शुरू हुए घर-घर वेरिफिकेशन अभियान को काफी प्रभावित किया है। विपक्षी पार्टियों और जनप्रतिनिधियों ने भी मौसम की वजह से प्रक्रिया पर पड़ रहे असर को लेकर विस्तार की मांग की थी।
इसके अलावा, कई BLOs जो सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक हैं, अपने पढ़ाने के काम के साथ-साथ वोटर वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस वजह से काम की गति धीमी रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई तक राज्य में सिर्फ 35.16% एनुमरेशन फॉर्म्स (EFs) को डिजिटलाइज किया गया है।
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में सबसे धीमी प्रगति
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम की गति सबसे धीमी रही है। मुंबई सबर्बन में सिर्फ 8.38% फॉर्म्स डिजिटलाइज हुए हैं, ठाणे में 8.41%, मुंबई सिटी में 15.36%, और पालघर में 14.2%। मुंबई के सिटी और सबर्बन जिलों में करीब 10,000 BLOs को 900 से 1,200 मतदाताओं का वेरिफिकेशन करना है। इसमें फॉर्म बांटना, जानकारी की जांच करना, साइन लेना और फॉर्म्स को डिजिटल अपलोड करना शामिल है।
अगर वेरिफिकेशन के दौरान मतदाता उपलब्ध नहीं होते हैं, तो BLOs को कम से कम तीन बार कोशिश करनी होती है। इसके बाद ही उन्हें ASDD (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) कैटेगरी में रखा जाता है।
क्यों है यह विस्तार जरूरी
यह विस्तार जरूरी है ताकि बारिश से प्रभावित इलाकों के योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो जाएं। 19 अक्टूबर को अंतिम सूची प्रकाशित करने का शेड्यूल तय है। ऐसे में ECI पर प्रक्रिया को समय पर पूरा करने और लॉजिस्टिक व मौसम से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने का दबाव है।
स्रोत: Indian Express
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