सौ साल बाद कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी, आठ छोड़ी गईं
भोपाल/बालाघाट। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में करीब सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी हुई है। अब यहां फिर से जंगली भैंसों की धमक सुनाई देगी।
भोपाल/बालाघाट। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में करीब सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी हुई है। अब यहां फिर से जंगली भैंसों की धमक सुनाई देगी। इस दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ी पहल की है।
असम के काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूपखार में तैयार किए गए विशेष बाड़े में छोड़ा। यह बाड़ा 17 हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया गया है। जंगली भैंसों को इसी बाड़े में नए वातावरण के अनुसार ढलने का मौका दिया जाएगा।
जंगली भैंसों की वापसी को प्रदेश में इस प्रजाति की आबादी को फिर से स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब सौ साल बाद कान्हा के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों को दोबारा बसाने की शुरुआत हुई है।
इन जंगली भैंसों के लिए सूपखार क्षेत्र में खास व्यवस्था की गई है। कोशिश की गई है कि उन्हें ऐसा वातावरण मिले, जिसमें वे नए परिवेश में सहज रूप से रह सकें। उनके अनुकूलन, स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी रखी जाएगी।
तीन साल में 50 भैंसों को बसाने का लक्ष्य
इस योजना के तहत अगले तीन वर्षों में कान्हा के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों की संख्या बढ़ाकर 50 करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में आठ जंगली भैंसों को छोड़ा गया है। इनके नए वातावरण में रहने और ढलने की स्थिति को देखते हुए आगे की योजना को आकार दिया जाएगा।
जंगली भैंसों के अनुकूलन, स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी इस पूरी योजना का अहम हिस्सा होगी। शुरुआती चरण के अनुभवों के आधार पर आगे और जंगली भैंसों को बसाने की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
जंगली भैंसों की यह ऐतिहासिक वापसी कान्हा टाइगर रिजर्व की वन्यजीव विविधता को मजबूती देने वाली पहल है। इसका उद्देश्य सिर्फ एक वन्यजीव प्रजाति को दोबारा बसाना नहीं है। इसके साथ जंगली भैंसों के प्राकृतिक आवास और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को भी बढ़ावा देना है।
अगर सूपखार में जंगली भैंसों को फिर से बसाने की यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र उनके संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य इसी लंबी योजना का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी कब हुई?
कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में करीब सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी हुई है।
कान्हा में कितनी जंगली भैंसें छोड़ी गईं?
असम के काजीरंगा से लाई गईं आठ जंगली भैंसें सूपखार में छोड़ी गईं।
जंगली भैंसों को कहां रखा गया है?
जंगली भैंसों को सूपखार में 17 हेक्टेयर क्षेत्र में बने विशेष बाड़े में रखा गया है।
तीन साल में कितनी जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य है?
अगले तीन वर्षों में सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों की संख्या बढ़ाकर 50 करने का लक्ष्य है।
जंगली भैंसों की निगरानी में किन बातों पर ध्यान दिया जाएगा?
उनके नए वातावरण में अनुकूलन, स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी रखी जाएगी।
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