पंबन नहर की खुदाई तेज, जहाजों की फंसने की समस्या खत्म होगी
पंबन नहर की खुदाई जोरों पर, जहाजों के फंसने की समस्या खत्म करने और नेविगेशन सुधारने की तैयारी पंबन नहर की खुदाई का काम तेज़ी से चल रहा है।
पंबन नहर की खुदाई का काम तेज़ी से चल रहा है। 3,500 मीटर लंबे हिस्से में से अब तक 2,500 मीटर की खुदाई पूरी हो चुकी है। ₹9.5 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद नहर में जमा गाद को हटाकर इसे गहरा बनाना है। अधिकारियों का कहना है कि यह काम इसी महीने के अंत तक पूरा हो जाएगा।
इतिहास से जुड़ी पंबन नहर को नेविगेशन में मुश्किलें
पंबन नहर, जो मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ती है, ऐतिहासिक रूप से भारत के सबसे पुराने नेविगेशन रूट्स में से एक है। करीब 2 किलोमीटर लंबी यह नहर पंबन रोड और रेल ब्रिज के नीचे से गुजरती है। इसका इतिहास 1480 ईस्वी में आए एक बड़े तूफान से जुड़ा है, जब यह प्राकृतिक रूप से बनी थी।
लेकिन समय के साथ नहर की गहराई घटकर दो मीटर से भी कम हो गई है। गाद जमा होने की वजह से जहाज और मोटरबोट अक्सर रेत में फंस जाते हैं, जिससे देरी और हादसे होते हैं। तमिलनाडु मैरीटाइम बोर्ड ने लंबे समय से चली आ रही खुदाई की मांग को ध्यान में रखते हुए यह प्रोजेक्ट एक प्राइवेट कंपनी को सौंपा है।
गहराई बढ़ाने के लिए दिन-रात चल रहा काम
इस साल की शुरुआत में शुरू हुई खुदाई में कुंथुकल के पास मन्नार की खाड़ी में एक ड्रेजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहाज पर लगे पंप के जरिए पानी और गाद को हटाकर लोहे की पाइपलाइनों के जरिए किनारे पर भेजा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद नहर की गहराई को दो मीटर से ज्यादा करना है, ताकि जहाज और बोट्स आसानी से गुजर सकें।
यह पहली बार नहीं है जब पंबन नहर की खुदाई हो रही है। 1854 में ब्रिटिश सरकार ने पहली बार इसकी खुदाई करवाई थी। इसके बाद 1964 में आए विनाशकारी धनुषकोडी तूफान के बाद इसे फिर से गहरा किया गया था। लेकिन इस बार की खुदाई जहाजों के बार-बार फंसने की समस्या को खत्म करने के लिए बेहद जरूरी है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
खुदाई पूरी होने के बाद नहर में जहाज और मोटरबोट्स का आवागमन बिना किसी रुकावट के हो सकेगा। इससे नेविगेशन की क्षमता में सुधार होगा और क्षेत्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पंबन पोर्ट के ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व को देखते हुए यह प्रोजेक्ट भारत के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
स्रोत: The Hindu
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