News Darpan भारत का डिजिटल दर्पण
ताज़ा
मुरैना में खेत की मेड़ विवाद के बाद युवक की मौत, चार घायलमधुबनी में गड्ढे में जाने के बाद बोलेरो पलटी, पुलिस चालक की मौतसीवान में चाय विवाद में 75 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या की खबरबच्चों के विवाद में युवक की हत्या, आरोपी गिरफ्तार; कुल्हाड़ी बरामदशामली में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो पलटी, चालक समेत दो युवकों की मौतशामली में विवाद सुलझाने पहुंची डायल 112 गाड़ी पर पथराव, चालक घायलग्वालियर GRMC में कथित मारपीट के विरोध में जूनियर डॉक्टरों की हड़तालबेटी के इलाज को तीन दिन भटके पिता, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
National General मुरैना

मुरैना के डोमपुरा में 10 साल बाद भी मुक्तिधाम नहीं, खुले में संस्कार

मुरैना के वार्ड क्रमांक 44 के डोमपुरा में नगर निगम में शामिल होने के करीब 10 साल बाद भी लोगों को अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित मुक्तिधाम नहीं मिल सका है।

मुरैना के डोमपुरा में 10 साल बाद भी मुक्तिधाम नहीं, खुले में संस्कार
Image credit: News Darpan Team

मुरैना के वार्ड क्रमांक 44 के डोमपुरा में नगर निगम में शामिल होने के करीब 10 साल बाद भी लोगों को अंतिम संस्कार के लिए व्यवस्थित मुक्तिधाम नहीं मिल सका है। गांव से नगर निगम का हिस्सा बनने के बाद बेहतर सुविधाओं का दावा किया गया था, लेकिन यहां आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले स्थान पर करना पड़ रहा है।

6 अक्टूबर को 77 वर्षीय गोकुल कर्ण का निधन हुआ। इसके बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों को खुले स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। यह स्थिति नगर निगम की उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, जिसमें गांवों को निगम सीमा में शामिल करने के बाद विकास और बेहतर सुविधाएं देने की बात कही गई थी।

डोमपुरा सहित आसपास की 12 ग्राम पंचायतों को नगर निगम सीमा में शामिल हुए करीब 10 साल बीत चुके हैं। इससे पहले यह इलाका नगर पालिका के दायरे में था। ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे समय के बाद भी इलाके में सुविधाएं गांव जैसी ही हैं। मुक्तिधाम जैसी बुनियादी जरूरत की सुविधा भी अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों के मुताबिक अब मुक्तिधाम के लिए जमीन की समस्या भी नहीं है। कलेक्टर न्यायालय ने 10 दिसंबर 2025 को आदेश क्रमांक 0084/अ-20(3)/2024-2025 के तहत ग्राम डोमपुरा के सर्वे क्रमांक 69 में से 0.910 हेक्टेयर भूमि मुक्तिधाम निर्माण के लिए नगर पालिक निगम मुरैना को आवंटित कर दी थी।

जमीन आवंटित हुए करीब 10 महीने बीत चुके हैं। इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब मुक्तिधाम के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है, तो फिर निर्माण में देरी की वजह समझ से बाहर है। जमीन मिलने के बाद भी अब तक वहां एक ईंट तक नहीं लग सकी है।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कई स्तरों पर शिकायत की है। उनका कहना है कि उन्होंने कलेक्टर, तहसीलदार, पटवारी, सांसद, महापौर और नगर निगम आयुक्त तक कई बार लिखित और मौखिक रूप से अपनी बात पहुंचाई। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने 25 अगस्त 2026 की जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत कंप्यूटर कोड 750915 के तहत दर्ज की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार जनसुनवाई में शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। हर बार कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है, लेकिन जमीन आवंटित होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया।

वार्ड 44 के सैकड़ों परिवारों के लिए यह केवल एक निर्माण कार्य का मामला नहीं है। यह उनके परिजनों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार से जुड़ा सवाल है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में किसी की मृत्यु होने पर दुख के साथ यह चिंता भी सामने आ जाती है कि अंतिम संस्कार के लिए जगह कहां मिलेगी।

ग्रामीणों के अनुसार जब डोमपुरा ग्राम पंचायत का हिस्सा था, तब यहां मुक्तिधाम की व्यवस्था थी। लेकिन नगर निगम में शामिल होने के करीब एक दशक बाद भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। उनका कहना है कि नगर निगम की सीमा में आने के बाद सुविधाएं बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए भी लोगों को खुले स्थान पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने अफसरों और जनप्रतिनिधियों से कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला। उनका कहना है कि शिकायतें करने और जमीन आवंटित होने के बावजूद कार्रवाई फाइल से आगे नहीं बढ़ सकी। 6 अक्टूबर को 77 वर्षीय गोकुल कर्ण के खुले में हुए अंतिम संस्कार के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सामने आया है।

मामले में महापौर शारदा सोलंकी ने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा, “नगर निगम में कई ग्राम पंचायतें शामिल हुई हैं और वहां की व्यवस्थाओं को भी दिखवाया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड 44 की समस्या के लिए टीम भेजकर मौके की स्थिति देखी जाएगी और मुक्तिधाम बनवाने की कार्रवाई की जाएगी।

अब डोमपुरा के लोगों की नजर महापौर के निर्देश के बाद होने वाली कार्रवाई पर है। सवाल यही है कि टीम मौके पर कब पहुंचती है और मुक्तिधाम का निर्माण कब शुरू होता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार आश्वासन के बजाय जमीन पर काम दिखाई देगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि महापौर के निर्देश के बाद डोमपुरा के लोगों को वास्तव में मुक्तिधाम मिलता है या यह आश्वासन भी पिछली शिकायतों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोमपुरा में लोगों को अंतिम संस्कार खुले में क्यों करना पड़ रहा है?

डोमपुरा में अब तक व्यवस्थित मुक्तिधाम नहीं बना है, इसलिए लोगों को खुले स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।

डोमपुरा के लिए मुक्तिधाम की जमीन कब आवंटित की गई थी?

कलेक्टर न्यायालय ने 10 दिसंबर 2025 को सर्वे क्रमांक 69 की 0.910 हेक्टेयर जमीन मुक्तिधाम के लिए नगर निगम मुरैना को आवंटित की थी।

जमीन आवंटित होने के बाद भी मुक्तिधाम का निर्माण क्यों नहीं हुआ?

जमीन मिलने के करीब 10 महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इसकी वजह समझ नहीं आ रही है।

डोमपुरा के ग्रामीणों ने मुक्तिधाम के लिए क्या कदम उठाए?

ग्रामीणों ने कलेक्टर, तहसीलदार, सांसद, महापौर और नगर निगम आयुक्त समेत कई अधिकारियों से शिकायत की। उन्होंने 25 अगस्त 2026 की जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समस्या बनी हुई है।

#dompura#morena#अंतिम संस्कार#नगर निगम#मुक्तिधाम

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

  1. 1

    श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप

  2. 2

    शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान

  3. 3

    शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप

  4. 4

    गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग

  5. 5

    हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।

टिप्पणियाँ समीक्षा के बाद प्रकाशित होती हैं।