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देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में दूसरा टेस्ट शतक ठोका

देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में शुरुआती कैच छूटने के बावजूद दूसरा टेस्ट शतक जड़ा कोलंबो में शुरुआती राहत के बाद देवदत्त पडिक्कल ने दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में श्रीलंका के

देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में दूसरा टेस्ट शतक ठोका
AI से बनाई गई सांकेतिक संपादकीय तस्वीर; यह असली घटना की फोटो नहीं है। · News Darpan AI image
कोलंबो में शुरुआती राहत के बाद देवदत्त पडिक्कल ने दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ अपना दूसरा टेस्ट शतक बनाया, शुरुआत में दो बार कैच छूटने के बाद उन्होंने शानदार पारी खेली जिसने नंबर तीन पर उनकी काबिलियत को साबित कर दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने प्रभात जयसूर्या की एक फुल बॉल को लॉन्ग ऑन पर सिंगल के लिए फ्लिक किया और तीन अंकों का आंकड़ा पूरा किया, ड्रेसिंग रूम में मौजूद भारतीय टीम की तरफ से मिली तालियों के बीच अपना बैट उठाया। यह कारनामा उस वक्त आया जब उन्हें दो बार छोड़ा जा चुका था—0 पर सोनल दिनुशा ने और 1 पर धनंजय डी सिल्वा ने—इसके बाद उन्होंने जो क्रिकेट खेला उसे देखने वालों ने "बेदाग क्रिकेट" बताया। बैक फुट पर कमाल का खेल पडिक्कल की ऑफ साइड में स्कोर करने की काबिलियत काफी असरदार रही, उनका बैक फुट गेम इस सीरीज की खास बातों में से एक रहा। उन्होंने श्रीलंकाई स्पिनरों की तरफ से दी गई चौड़ाई का बार-बार फायदा उठाया, पीछे हटकर जगह बनाई और गेंदों को प्वाइंट और कवर से बाउंड्री के लिए काटा। एक ऐसे ही शॉट में उन्होंने जयसूर्या की एक शॉर्ट और चौड़ी गेंद को प्वाइंट से हैमर किया और 95 पर पहुंच गए, इसके बाद लगातार दो चौके उन्हें शतक के बिल्कुल करीब ले आए। 23 साल के इस बल्लेबाज ने फुलर डिलीवरी के खिलाफ भी कंट्रोल दिखाया, रिवर्स स्वीप और आम शॉट्स से स्ट्राइक घुमाई और रफ्तार बनाए रखी। जैसे-जैसे वो शतक के करीब आए, उन्होंने कमिल मिशारा की गेंद पर फर्स्ट स्लिप के पास से लेट डैब मारकर दो रन जोड़े और 91 पर पहुंचे, दबाव में भी संयम दिखाया। साझेदारी ने आखिरी सेशन में भारत को संभाला पडिक्कल की पारी पहले दिन के आखिरी सेशन में भारत की मजबूत बढ़त की रीढ़ बनी, जिसमें विजिटर्स ने 17 ओवरों में बिना विकेट गंवाए 62 रन जोड़े। उनका साथ रविंद्र जडेजा ने दिया, जो लाहिरू कुमारा के मुश्किल ओवरों को खेलने के बाद 43 गेंदों पर 29 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों स्टंप्स से पहले भारत को 300 के पार ले जाने के इरादे से दिख रहे थे। हालांकि, पडिक्कल की पारी आखिर में तब खत्म हुई जब उन्होंने केशरा नुवंथा की एक गेंद को अपने स्टंप पर खींच लिया, 76.2 ओवरों में भारत का स्कोर 281 पर 4 विकेट हो गया। उनके आउट होने से श्रीलंका को सफलता मिली, उनकी गेंदबाजी पडिक्कल के क्रीज पर रहते "बिल्कुल बेबस" दिख रही थी। इस पारी ने यह साबित कर दिया है कि भारत को नंबर तीन पर एक भरोसेमंद विकल्प मिल गया है, एक ऐसी जगह जो टीम के लिए लंबे समय से मुश्किल रही है। पडिक्कल की शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की आदत ने अब पूरे दौरे में अच्छे नतीजे दिए हैं।

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भारत ने पहले दिन के खेल के अंत तक पांच विकेट पर 300 रन बना लिए हैं। आखिरी घंटे में श्रीलंका को दो विकेट मिले, जिससे उन्हें कुछ उम्मीद बंधी है, लेकिन भारत इस स्कोर से खुश होगा। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार सदी लगाने के बाद 91 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पिन करते हुए केशारा नुवांथा की गेंद पर विकेट गंवाया। गेंद ने उनके बाहरी किनारे को चूमते हुए ऑफ स्टंप पर हिट किया। पडिक्कल ने अपनी पारी में शुरुआत में दो बार छूटने के बाद कुल नियंत्रण दिखाया और इस शानदार शतक तक पहुंचे।

ऋषभ पंत को लहिरू कुमारा की एक तेज गेंद से बाएं हाथ पर चोट लगी और उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह रवींद्र जडेजा ने क्रीज संभाली। कुमारा की तेज और उछाल भरी गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया। जडेजा को भी हाथ पर चोट लगी, लेकिन उन्होंने खेलना जारी रखा। हालांकि बाद में उन्हें क्रैम्प की दिक्कत हुई और फिजियो ने मैदान पर उनका इलाज किया।

श्रीलंका ने दूसरी नई गेंद मिलते ही असिथा फर्नांडो को गेंदबाजी सौंपी और उन्होंने तुरंत कमाल कर दिखाया। असिथा ने अराउंड द विकेट से एक शानदार इन-स्विंगर फेंकी जो ऑफ स्टंप से टकराई। जडेजा ने गेंद को छोड़ दिया, लेकिन यह सीधे स्टंप पर लगी। इसके साथ ही डेब्यू खिलाड़ी सारांश जैन क्रीज पर आए और उन्होंने पहली ही गेंद पर बैकवर्ड प्वाइंट की ओर लेट कट मारकर चौका लगाया, जिससे भारत का स्कोर 300 के पार पहुंच गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में कौन सा शतक बनाया?

देवदत्त पडिक्कल ने कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ अपना दूसरा टेस्ट शतक बनाया। शुरुआत में दो बार कैच छूटने के बाद भी उन्होंने शानदार पारी खेली।

पडिक्कल को शुरुआत में क्या मुश्किलें आईं?

पडिक्कल को शुरुआत में दो बार छोड़ा गया - 0 पर सोनल दिनुशा ने और 1 पर धनंजय डी सिल्वा ने। इसके बाद वो बेदाग क्रिकेट खेले।

पडिक्कल का बैट गेम कैसा रहा?

उनका बैक फुट गेम शानदार रहा। उन्होंने स्पिनरों की चौड़ाई का फायदा उठाया और पीछे हटकर गेंदों को प्वाइंट और कवर से बाउंड्री के लिए काटा।

पहले दिन के आखिरी में भारत का स्कोर क्या रहा?

पहले दिन के अंत तक भारत ने पाँच विकेट पर 300 रन बनाए। पडिक्कल के आउट होने से श्रीलंका को सफलता मिली।

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