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दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक पर सरकार से जवाब मांगा

संसद मार्च: प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं संसद मार्च के दौरान पुलिस की सख्ती, प्रदर्शनकारियों ने मांगी जवाबदेही सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन अचानक तेज हो गया।

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संसद मार्च: प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं

संसद मार्च के दौरान पुलिस की सख्ती, प्रदर्शनकारियों ने मांगी जवाबदेही

सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन अचानक तेज हो गया। दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के लॉन पर जीप और मोटरसाइकिल तैनात कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने की कोशिश की। ये प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हो रहा था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पेपर लीक स्कैंडल के चलते इस्तीफे की मांग की। लेकिन प्रदर्शन का गुस्सा सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि सरकार की जनता की परेशानियों को नजरअंदाज करने की सोच पर भी सवाल उठाया गया।

नाराजगी से गुस्से तक: प्रदर्शनकारियों की आवाज

कई प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की, खासकर वो लोग जो पहले बीजेपी का समर्थन करते थे। साधना सिंह, जिनका परिवार पारंपरिक रूप से बीजेपी को वोट देता है, ने पेपर लीक पर सरकार की चुप्पी पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, "आप अपनी उपलब्धियों का प्रचार करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर बोल भी नहीं सकते।" उनका इशारा सरकार द्वारा पीवी सिंधु की बैडमिंटन जीत का जश्न मनाने की ओर था, जबकि पेपर लीक संकट को नजरअंदाज किया गया।

कविता वर्मा, जो 2014 से बीजेपी को वोट देती आ रही हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अहंकारी होने का आरोप लगाया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की आलोचना की। उन्होंने कहा, "आप देश को सिर्फ लाठी के दम पर नहीं चला सकते।" प्रदर्शनकारियों को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास से हटाया गया और बाद में जनपथ और रफी मार्ग पर खदेड़ा गया। पुलिस ने कई लोगों को रैंडम तरीके से हिरासत में लिया।

पेपर लीक से आगे की नाराजगी

हालांकि पेपर लीक प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा था, लेकिन कई प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर सिस्टम की खामियों पर भी सवाल उठाए। बिहार के 26 साल के निशांत ने महंगाई, कम वेतन और खराब जीवन स्तर पर अपनी परेशानियां साझा कीं। उन्होंने कहा, "सरकार अंधी, गूंगी और बहरी हो चुकी है।" निशांत ने बताया कि उन्होंने दो बार बीजेपी को वोट दिया था, लेकिन अब उनका गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

फरीदाबाद के इंजीनियरिंग छात्रों ने भी पेपर लीक जांच पर सरकार की नाकामी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में छोटे स्तर के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है। प्रणेश रावत ने कहा, "यह सरासर गलत है। सरकार साफ तौर पर किसी बड़े अधिकारी को बचा रही है।"

पुलिस की सख्ती बढ़ी

सुबह शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए प्रदर्शन पर दोपहर बाद पुलिस की सख्ती बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट के लॉन पर फिर से इकट्ठा होने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मोटरसाइकिल और वैन से उन्हें वहां से भी खदेड़ दिया। कई प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक बदलाव की उम्मीद जताई, हालांकि ऐसे प्रदर्शन आयोजित करने में आने वाली चुनौतियों को भी स्वीकार किया।

ये प्रदर्शन सरकार के कामकाज और जनता की समस्याओं को हल करने में विफलता को लेकर बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है। खासकर वो लोग जो पहले बीजेपी के समर्थक थे, अब सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। जैसे-जैसे प्रदर्शन जारी हैं, सरकार पर जनता की शिकायतों का जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने किस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा?

प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक स्कैंडल पर सरकार से जवाब मांगा।

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा किस-किस चीज पर था?

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा पेपर लीक के अलावा सरकार की जनता की परेशानियों को नजरअंदाज करने पर भी था।

किस पार्टी के समर्थक प्रदर्शनकारियों ने सरकार की आलोचना की?

प्रदर्शनकारियों में कई लोग पहले बीजेपी के समर्थक थे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए जीप और मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।

प्रदर्शनकारियों ने किस तरह की समस्याओं का जिक्र किया?

प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, कम वेतन और खराब जीवन स्तर जैसी समस्याओं का जिक्र किया।

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