दिल्ली मेट्रो में डिजिटल पेमेंट का हिस्सा 73.56% पहुंचा
दिल्ली मेट्रो में डिजिटल पेमेंट का दबदबा, लेकिन कैश अभी भी कायम पिछले आठ सालों में दिल्ली मेट्रो में पेमेंट के तरीके में बड़ा बदलाव आया है।
पिछले आठ सालों में दिल्ली मेट्रो में पेमेंट के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब मेट्रो की कमाई का करीब तीन-चौथाई हिस्सा कैशलेस ट्रांजैक्शन से आता है। 2023 में डिजिटल पेमेंट से 73.56% कमाई हुई, जबकि 2018 में कैश का हिस्सा 77.93% था। ये बदलाव दिखाता है कि यात्री स्मार्ट कार्ड, QR कोड टिकट और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) जैसे डिजिटल टूल्स को तेजी से अपना रहे हैं।
स्मार्ट कार्ड क्यों है सबसे पसंदीदा
डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देने के बावजूद, स्मार्ट कार्ड करीब आधे यात्रियों की पहली पसंद बने हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये कार्ड एंट्री और एग्जिट को तेज बनाते हैं और किराए में छूट भी देते हैं। इसके अलावा, आदत भी एक बड़ी वजह है। वहीं, सितंबर 2024 में लॉन्च हुए वर्चुअल स्मार्ट कार्ड, जो एक डायनेमिक QR कोड है, का इस्तेमाल अभी सिर्फ 3% यात्री कर रहे हैं।
QR टिकटिंग का बढ़ता इस्तेमाल
QR कोड आधारित टिकटों का चलन बढ़ रहा है और ये ट्रांजैक्शन का 27% हिस्सा बनाते हैं। इसमें से 18% QR पेपर टिकट हैं, जो काउंटर या वेंडिंग मशीन से खरीदे जाते हैं, जबकि 9% डिजिटल QR टिकट हैं, जो Paytm, PhonePe, WhatsApp और ONDC से जुड़े ऐप्स जैसे Rapido और Uber के जरिए बुक किए जाते हैं। पूरे मेट्रो नेटवर्क में QR टिकटिंग अक्टूबर 2023 में पूरी तरह लागू हुई, जो कई सालों की प्रक्रिया के बाद संभव हो पाया।
NCMC: डिजिटलाइजेशन का अहम हिस्सा
"वन नेशन, वन कार्ड" स्कीम के तहत शुरू किया गया NCMC आज मेट्रो ट्रिप्स का 20% हिस्सा है। इसे पहली बार दिसंबर 2020 में एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर लॉन्च किया गया था और जून 2023 में पूरे नेटवर्क में लागू किया गया। इस साल एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने दिल्ली मेट्रो के साथ साझेदारी कर अपने ऐप के जरिए NCMC टॉप-अप को आसान बनाया। अधिकारियों का मानना है कि NCMC मेट्रो सिस्टम्स को देशभर में इंटरऑपरेबल बनाने की दिशा में अहम कदम है।
बदलाव क्यों जरूरी है
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका मकसद टिकट काउंटर पर लंबी कतारें कम करना, कैश हैंडलिंग को कम करना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। ये बदलाव शहरी परिवहन के डिजिटाइजेशन के बड़े ट्रेंड्स को दिखाता है, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा प्रभावी और सुलभ बनाने की कोशिश कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि मोबिलिटी सिस्टम्स को एकीकृत फ्रेमवर्क में लाया जाए।
धीरे-धीरे हुआ बदलाव
डिजिटाइजेशन की ये यात्रा छोटे-छोटे बदलावों और साझेदारियों से भरी रही है। DMRC ने 2014 में ऑनलाइन स्मार्ट कार्ड रिचार्ज शुरू किया, 2016 में Paytm के जरिए UPI रिचार्ज और 2018 में PhonePe के जरिए रिचार्ज की सुविधा दी। QR टिकटिंग की शुरुआत 2018 में एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर हुई और 2023 में पूरे नेटवर्क में लागू हुई। इसी तरह, NCMC को पूरे मेट्रो सिस्टम में लागू होने में तीन साल लगे। ये सब दिखाता है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बड़े पैमाने पर डिजिटल सॉल्यूशंस लागू करना कितना चुनौतीपूर्ण है।
जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट के ऑप्शन बढ़ रहे हैं, दिल्ली मेट्रो का अनुभव दिखाता है कि शहरी परिवहन सिस्टम कैसे यात्रियों की बदलती पसंद और तकनीकी विकास के साथ खुद को ढाल सकता है।
स्रोत: Indian Express
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली मेट्रो में डिजिटल पेमेंट का हिस्सा कितना है?
दिल्ली मेट्रो में डिजिटल पेमेंट का हिस्सा 73.56% है।
स्मार्ट कार्ड यात्रियों के लिए क्यों पसंदीदा है?
स्मार्ट कार्ड एंट्री और एग्जिट को तेज बनाते हैं और किराए में छूट भी देते हैं।
QR कोड टिकटों का कितना हिस्सा है?
QR कोड आधारित टिकटों का ट्रांजैक्शन का 27% हिस्सा है।
NCMC क्या है और इसका मेट्रो में क्या महत्व है?
NCMC 'वन नेशन, वन कार्ड' स्कीम के तहत है और मेट्रो ट्रिप्स का 20% हिस्सा है।
दिल्ली मेट्रो ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
DMRC ने टिकट काउंटर पर लंबी कतारें कम करने, कैश हैंडलिंग को घटाने और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं.
सबसे ज़्यादा पढ़ी गई
- 1
श्रावस्ती में आधार कार्ड सेंटरों पर अवैध वसूली का मामला सामने आया
- 2
गाजियाबाद में स्वतंत्रता दिवस पर भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन
- 3
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में नवाचार कार्यशाला का आयोजन
- 4
राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘फ्री थिंकर्स क्लब’ की शुरुआत
- 5
शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।