कफ सिरप अब बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदे जा सकेंगे। केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत सिरप को उस लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसमें दवाएं सीधे दुकान से खरीदी जा सकती थीं। सरकार का कहना है कि इससे सिरप आधारित दवाओं पर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत होगा। सिरप निर्माता और विक्रेता को लाइसेंसिंग और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सख्त नियमों का पालन करना होगा।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अक्टूबर 2025 में दूषित कफ सिरप से 26 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सरकार ने दवा सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर कई कदम उठाए। 2022-23 में भारत में बनी कुछ कफ सिरप दवाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। अफ्रीकी देशों और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत के मामलों के बाद भारतीय दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई। इसके बाद सरकार ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में अनिवार्य परीक्षण की व्यवस्था लागू की।
ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-K में बदलाव करते हुए सिरप को उस सूची से बाहर कर दिया गया है, जिसमें कुछ दवाओं को नियमों में छूट दी गई थी। सरकार ने दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को सख्त किया और कई कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए।
मुख्य बातें
- कफ सिरप अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही मिलेगा।
- ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची-K से सिरप को हटाया गया।
- मध्य प्रदेश में अक्टूबर 2025 में दूषित सिरप से 26 बच्चों की मौत हुई थी।
- सरकार ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में टेस्ट अनिवार्य किया।
- दवा निर्माण इकाइयों के लिए GMP मानकों को सख्त किया गया।