कांग्रेस 1 नवंबर से मध्यप्रदेश में घर-घर मतदाता सूची जांचेगी
मध्यप्रदेश में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है।
मध्यप्रदेश में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी स्थापना दिवस 1 नवंबर से कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश के सभी 71 हजार मतदान केंद्रों के तहत घर-घर पहुंचेंगे। कार्यकर्ताओं के पास मतदाता सूची होगी और वे लोगों से संपर्क कर यह पता लगाएंगे कि किन मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं।
कांग्रेस ने इस अभियान को संगठन की बड़ी राजनीतिक और चुनावी मुहिम बनाने की रणनीति तैयार की है। इसके लिए जिला अध्यक्षों से लेकर बूथ स्तर के पदाधिकारियों तक को सक्रिय रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। पार्टी का फोकस केवल मतदाता सूची देखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सूची में दर्ज नामों और जमीन पर मौजूद मतदाताओं के बीच स्थिति का मिलान करने पर रहेगा।
कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। पार्टी अब घर-घर जाकर यह जांच करेगी कि जिन लोगों के नाम सूची से काटे गए हैं, वे वास्तव में संबंधित पते पर मौजूद हैं या नहीं।
इस सत्यापन के दौरान अगर मतदाता मौके पर मिलता है और उसका नाम मतदाता सूची में नहीं होता, तो कांग्रेस कार्यकर्ता उसका नाम दोबारा जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कराएंगे। इस तरह बूथ स्तर पर हर मामले की जानकारी जुटाने और उसे दर्ज करने की कोशिश की जाएगी।
कांग्रेस की योजना है कि घर-घर संपर्क और बूथवार सत्यापन के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके आधार पर चुनाव आयोग के सामने मामला उठाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि वास्तविक स्थिति बूथ स्तर पर जुटाई गई जानकारी के बाद ही साफ होगी। इसी जानकारी के आधार पर मतदाता सूची को लेकर आपत्तियां भी रखी जाएंगी।
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव संगठन संजय कामले के मुताबिक, मध्यप्रदेश में मतदाता सूची से 33 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं। कांग्रेस के अनुसार, इनमें करीब 20 लाख नाम ऐसे हैं, जिन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की श्रेणी में रखकर हटाया गया है।
कांग्रेस ने अपने सभी बूथ लेवल एजेंटों (BLA) को मतदाताओं से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने कहा है कि पात्र लोगों के नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए बूथ लेवल एजेंटों की भूमिका अहम रहेगी, क्योंकि उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में मतदाताओं से सीधे संपर्क करना है।
पार्टी का जोर इस बात पर है कि अभियान केवल कागजी कवायद बनकर न रह जाए। कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची लेकर लोगों के बीच जाएंगे, सूची में दर्ज नामों की स्थिति देखेंगे और जिन नामों के कटने की शिकायत सामने आएगी, उसकी जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद आवेदन और आपत्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
मतदाता सूची का मुद्दा कांग्रेस के आंदोलन को मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रखेगा। इसी कड़ी में सोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पार्टी ने जिला इकाइयों को अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचने के निर्देश दिए हैं। जिला अध्यक्षों को इस प्रदर्शन के लिए अलर्ट किया गया है।
मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, इंदौर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के कार्यकर्ताओं को सोमवार सुबह तक दिल्ली पहुंचने के लिए कहा गया है। कांग्रेस संगठन की कोशिश है कि दिल्ली के प्रदर्शन में मध्यप्रदेश की भागीदारी प्रभावी रहे। पार्टी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना चाहती है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिला इकाइयों को दी गई है। इसके साथ ही बूथ स्तर पर शुरू होने वाले अभियान के लिए भी संगठन को तैयार किया जा रहा है। कांग्रेस की रणनीति में एक तरफ घर-घर संपर्क और दूसरी तरफ दिल्ली का प्रदर्शन शामिल है।
प्रस्तावित अभियान कांग्रेस के बूथ स्तर के संगठन की सक्रियता की भी परीक्षा बनेगा। प्रदेश के सभी 71 हजार मतदान केंद्रों तक पहुंचना, मतदाता सूची का सत्यापन करना, प्रभावित मतदाताओं की जानकारी जुटाना और उनके आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराना संगठन के सामने बड़ी चुनौती होगी।
कांग्रेस को बूथवार स्तर पर यह भी देखना होगा कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने वाले कितने लोग संबंधित पते पर मौजूद हैं। पार्टी इसी तरह जुटाई गई जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद चुनाव आयोग के सामने उन मामलों को रखने की तैयारी होगी, जिनमें मतदाता मौके पर मौजूद मिला लेकिन उसका नाम सूची में नहीं था।
अब इस अभियान के जरिए कांग्रेस कितने मतदान केंद्रों तक पहुंच पाती है, यह देखना होगा। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बूथ स्तर पर जुटाए गए तथ्यों के आधार पर पार्टी चुनाव आयोग के सामने कितनी ठोस आपत्तियां रख पाती है। कांग्रेस का दावा है कि 33 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जबकि बूथवार सत्यापन के बाद इस मुद्दे पर वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कांग्रेस मध्यप्रदेश में घर-घर मतदाता सूची जांच अभियान कब शुरू करेगी?
कांग्रेस 1 नवंबर से प्रदेश के सभी 71 हजार मतदान केंद्रों के तहत घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच करेगी।
इस अभियान में कांग्रेस कार्यकर्ता क्या जांचेंगे?
कार्यकर्ता मतदाता सूची में दर्ज नामों का मौके पर मौजूद मतदाताओं से मिलान करेंगे और पता लगाएंगे कि किन लोगों के नाम सूची से गायब हैं।
अगर किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं होगा तो क्या किया जाएगा?
कांग्रेस कार्यकर्ता निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कराएंगे।
कांग्रेस के मुताबिक मध्यप्रदेश में कितने नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं?
कांग्रेस महासचिव संगठन संजय कामले के मुताबिक, 33 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिनमें करीब 20 लाख नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों के बताए गए हैं।
कांग्रेस घर-घर सत्यापन के बाद क्या करेगी?
पार्टी बूथवार रिपोर्ट तैयार कर चुनाव आयोग के सामने मामला उठाएगी और मतदाता सूची को लेकर आपत्तियां रखेगी।
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