सीहोर में 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे की पुष्टि, 78,700 पौधे कटे
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि की गई है।
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन भूमि पर कब्जा करने के लिए हजारों सागौन के पौधों को काटकर नष्ट किया गया। मामले से जुड़ी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
इस मामले में करीब 78,700 सागौन के पौधे काटे जाने का उल्लेख है। इसे 78 हजार सागौन के पौधों की कटाई के तौर पर भी बताया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वन भूमि पर कब्जा करने के बाद वहां खेती और अन्य गतिविधियां शुरू किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में वन विकास निगम ने सीहोर में 3.37 लाख पौधे लगाए थे। इसी अवधि में संबंधित क्षेत्र में 3 लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। बाद में इन पौधों को नुकसान पहुंचाकर जमीन पर अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आया।
सैटेलाइट तस्वीरों के परीक्षण से भी अतिक्रमण की स्थिति का पता चला। तस्वीरों में वर्ष 2021 तक संबंधित वन भूमि खाली दिखाई दी थी। वहीं, वर्ष 2022 से उसी क्षेत्र में अतिक्रमण के निशान मिलने लगे। इसी आधार पर वन भूमि पर कब्जे की स्थिति की जांच की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अतिक्रमण लाड़कुई परिक्षेत्र के कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 में किया गया। वर्ष 2021 में इस क्षेत्र में वन विकास निगम ने पौधरोपण किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि पौधरोपण के बाद पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाकर जमीन का इस्तेमाल खेती और अन्य गतिविधियों के लिए किया जाने लगा।
रिपोर्ट में वन भूमि के हस्तांतरण से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। इसके अनुसार, वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि को सामान्य वनमंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2021 में निगम ने 135 हेक्टेयर क्षेत्र में सागौन के पौधे लगाए थे।
जांच के दौरान नौ लोगों की पहचान की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नौ लोगों के नाम पर गांवों में पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आईडी दर्ज होने की जानकारी मिली। ये लोग सीहोर जिले के सिंघपुर और हबीबनगर गांव से संबंधित बताए गए हैं।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सभी नौ झोपड़ियों को हटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई में अवैध रूप से खोदे गए कुओं को मिट्टी से भरने का काम भी किया गया। पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी कराए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर वन विकास निगम के कर्मचारियों की नाराजगी भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, निगम के डिपो के बाहर तीन दिन से धरना-प्रदर्शन चल रहा था। कर्मचारियों के इस प्रदर्शन का संबंध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से बताया गया है।
मामले में वन भूमि की स्थिति और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई है। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद अब इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीहोर में कितनी वन भूमि पर कब्जे की पुष्टि हुई है?
कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई है।
अतिक्रमण के लिए कितने सागौन के पौधे काटे गए?
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 78,700 सागौन के पौधे काटे गए।
अतिक्रमण का पता कैसे चला?
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि वर्ष 2021 तक जमीन खाली थी, जबकि वर्ष 2022 से वहां अतिक्रमण के निशान दिखने लगे।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में क्या किया गया?
नौ झोपड़ियां हटाई गईं, अवैध कुओं को मिट्टी से भरा गया और पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई।
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