कोयंबटूर की MSMEs ग्रीन हाइड्रोजन में जापान के साथ करेंगी साझेदारी
कोयंबटूर की MSMEs ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में करेंगी नई शुरुआत कोयंबटूर की MSMEs जापान के साथ ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में करेंगी साझेदारी कोयंबटूर की माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs)
कोयंबटूर की MSMEs जापान के साथ ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में करेंगी साझेदारी
कोयंबटूर की माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में नए मौके तलाशने के लिए जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी करने जा रही हैं। कोयंबटूर डिस्ट्रिक्ट स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट पी. पोनराम ने बताया कि जापान की कंपनी एच2 इनोवेशन के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है। यह कंपनी तमिलनाडु में ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स के मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग के लिए पार्टनर ढूंढ रही है। इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एसोसिएशन का एक डेलीगेशन अक्टूबर में जापान जाएगा।
ग्रीन एनर्जी में बढ़ते मौके
ग्रीन हाइड्रोजन को साफ और टिकाऊ एनर्जी का बड़ा स्रोत माना जा रहा है। पोनराम ने बताया कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली बसें पहले से ही चल रही हैं। ऐसे में लोकल इंडस्ट्रीज इस सेक्टर में प्रोड्यूसर और कंज्यूमर, दोनों की भूमिका निभा सकती हैं।
के-केसीसीएस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और चेयरमैन करूणानिधि कासिनाथन ने जापानी टेक्नोलॉजी कंपनियों, भारतीय इंडस्ट्रीज और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन पर रिसर्च को प्रमोट करने के लिए तमिलनाडु के पांच एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स के साथ त्रिपक्षीय समझौतों पर साइन करने की योजना है। इसका मकसद इस टेक्नोलॉजी को भारतीय बाजार के लिए किफायती बनाना है।
जापान की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की योजना
जापान, जहां लेबर और जमीन की लागत ज्यादा है, ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स के प्रोडक्शन को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए बढ़ाना चाहता है। एच2 इनोवेशन के रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर योसूके मोरी ने बताया कि उनकी कंपनी ने जापान में अभी तक 150 इंस्टॉलेशन्स पूरे कर लिए हैं, जिनकी क्षमता 500 वॉट से 50 किलोवॉट तक है। भारत में शुरुआती प्रोडक्शन मॉडल के तहत 30% फ्यूल सेल कॉम्पोनेंट्स का लोकल मैन्युफैक्चरिंग होगा, जबकि स्पेशल सिलिंडर जापान से इम्पोर्ट किए जाएंगे। धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित होने के बाद पूरा फ्यूल सेल भारत में ही बनाया जाएगा।
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्लांट लगाने के लिए करीब ₹20 करोड़ से ₹25 करोड़ के निवेश की जरूरत होगी। शुरुआत में उन कस्टमर्स पर फोकस किया जाएगा, जिन्हें ग्रीन हाइड्रोजन अपनाने के लिए सरकार ने अनिवार्य किया है, जैसे डेटा सेंटर्स। बड़े डेटा सेंटर ऑपरेटर्स, जो क्लीन एनर्जी सॉल्यूशन्स में निवेश करने के लिए तैयार रहते हैं, मुख्य ग्राहक हो सकते हैं।
क्षेत्रीय विस्तार की योजना
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए एच2 इनोवेशन दक्षिणी राज्यों में संभावित इंडस्ट्री पार्टनर्स और इन्वेस्टर्स के साथ बातचीत करेगा। यह क्षेत्रीय अप्रोच भारत में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाने में मदद करेगी और सरकार के रिन्यूएबल एनर्जी और डीकार्बोनाइजेशन के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगी।
यह साझेदारी कोयंबटूर की MSMEs के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे उन्हें हाई-ग्रोथ सेक्टर में कदम रखने और भारत के क्लीन एनर्जी गोल्स में योगदान देने का मौका मिलेगा।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोयंबटूर की MSMEs किस सेक्टर में साझेदारी कर रही हैं?
कोयंबटूर की MSMEs ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में जापानी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं।
जापान की कंपनी एच2 इनोवेशन का क्या काम है?
एच2 इनोवेशन ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स के मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग के लिए पार्टनर ढूंढ रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन का क्या महत्व है?
ग्रीन हाइड्रोजन को साफ और टिकाऊ एनर्जी का बड़ा स्रोत माना जा रहा है।
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्लांट लगाने के लिए कितना निवेश चाहिए?
भारत में ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्लांट लगाने के लिए करीब ₹20 करोड़ से ₹25 करोड़ के निवेश की जरूरत होगी।
इस साझेदारी का क्या लक्ष्य है?
इस साझेदारी का लक्ष्य कोयंबटूर की MSMEs को हाई-ग्रोथ सेक्टर में कदम रखने और भारत के क्लीन एनर्जी गोल्स में योगदान देने का मौका देना है।
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