नागरिक आंदोलन ने 'वॉक फॉर पीस' भिक्षुओं से की मुलाकात
नागरिक आंदोलन के प्रतिनिधि 'वॉक फॉर पीस' भिक्षुओं से मिले नई दिल्ली: नागरिक आंदोलन "आवारा नहीं हमारा है" के प्रतिनिधियों ने हाल ही में भारत दौरे पर आए "वॉक फॉर पीस" पहल के भिक्षुओं से मुलाकात की।
नई दिल्ली: नागरिक आंदोलन "आवारा नहीं हमारा है" के प्रतिनिधियों ने हाल ही में भारत दौरे पर आए "वॉक फॉर पीस" पहल के भिक्षुओं से मुलाकात की। समूह ने सड़क के कुत्तों की भलाई के लिए काम कर रहे लोगों की ओर से "करुणा और सह-अस्तित्व का पत्र" भिक्षुओं को सौंपा।
प्रतिनिधियों ने शांति को सिर्फ मानव संघर्ष की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और आवाज़हीन जीवों, जैसे जानवरों, के प्रति व्यवहार में भी देखने की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने भिक्षुओं से इस संदेश को और फैलाने के लिए आशीर्वाद और समर्थन मांगा।
इन भिक्षुओं में मोस्ट विनेरेबल भिक्षु पन्नकारा भी शामिल थे, जो एक वियतनामी-अमेरिकी भिक्षु हैं। वह अमेरिका और अन्य देशों में 3,700 किलोमीटर लंबा शांति मार्च कर चुके हैं और माइंडफुलनेस और शांति को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) द्वारा आयोजित एक सभा में भिक्षु पन्नकारा ने माइंडफुलनेस को शांति पाने का रास्ता बताते हुए विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने जानवरों की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया और कहा कि भले ही वे अपनी ज़रूरतें बोलकर नहीं बता सकते, लेकिन वे भी करुणा और देखभाल के उतने ही हकदार हैं। भिक्षु पन्नकारा ने कोलकाता के एक आवारा कुत्ते अलोका की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की, जो एक वैश्विक शांति दूत बन गया। अलोका इंसानों और जानवरों के बीच सह-अस्तित्व और सामंजस्य की संभावना का प्रतीक है।
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