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चीन के STEM छात्र सिंगापुर की ओर बढ़ रहे हैं, नई स्कॉलरशिप से आकर्षित

चीन के STEM स्टूडेंट्स अब सिंगापुर का रुख कर रहे हैं चीन के साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) के स्टूडेंट्स अब पढ़ाई के लिए सिंगापुर को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

चीन के STEM छात्र सिंगापुर की ओर बढ़ रहे हैं, नई स्कॉलरशिप से आकर्षित
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चीन के STEM स्टूडेंट्स अब सिंगापुर का रुख कर रहे हैं

चीन के साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) के स्टूडेंट्स अब पढ़ाई के लिए सिंगापुर को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह है पश्चिमी देशों की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी और चीन के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव। पहले अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश चीनी छात्रों की पहली पसंद हुआ करते थे, लेकिन अब इन देशों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। इससे ग्लोबल स्टूडेंट मूवमेंट के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

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सिंगापुर का स्कॉलरशिप प्रोग्राम चीनी टैलेंट को कर रहा है आकर्षित

सिंगापुर की लोकप्रियता की बड़ी वजह उसका सीनियर मिडिल 2 (SM2) स्कॉलरशिप प्रोग्राम है। यह प्रोग्राम 1997 में सिंगापुर के शिक्षा मंत्रालय और चीन के शिक्षा विभाग के बीच साझेदारी के तहत शुरू हुआ था। इस प्रोग्राम का मकसद चीन के 11वीं क्लास के होनहार छात्रों को चुनकर उन्हें सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU) जैसे प्रीमियर संस्थानों में साइंस और इंजीनियरिंग की फुली फंडेड अंडरग्रेजुएट पढ़ाई का मौका देना है। इसके साथ ही, छात्रों को रहने-खाने के लिए भत्ता भी दिया जाता है, जो इसे और आकर्षक बनाता है।

इसके बदले में, इन स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद 6 साल तक सिंगापुर में काम करने का वादा करना होता है। इससे सिंगापुर को दुनिया के सबसे होनहार दिमागों को अपने यहां बनाए रखने में मदद मिलती है। यह प्रोग्राम सिंगापुर की रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद ग्लोबल टैलेंट की प्रतिस्पर्धा के बीच अपने STEM वर्कफोर्स को मजबूत करना है।

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ये बदलाव क्यों अहम है

चीन के STEM टैलेंट का सिंगापुर की ओर रुख करना ग्लोबल एजुकेशन और प्रोफेशनल डायनामिक्स में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पहले साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे चार बड़े पश्चिमी देश सबसे ज्यादा पसंद किए जाते थे। लेकिन अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती टेक्नोलॉजी राइवलरी और पश्चिमी देशों की सख्त पॉलिसी ने इस ट्रेंड को बदल दिया है। अब सिंगापुर जैसे विकल्पों के लिए दरवाजे खुल गए हैं।

SM2 जैसे प्रोग्राम के जरिए सिंगापुर ने खुद को एशिया में साइंटिफिक इनोवेशन और रिसर्च का उभरता हुआ हब बना लिया है। चीन से टॉप टैलेंट को आकर्षित करके सिंगापुर न सिर्फ STEM एजुकेशन में अपनी ग्लोबल पहचान मजबूत कर रहा है, बल्कि अपने देश में स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत को भी पूरा कर रहा है।

यह ट्रेंड दिखाता है कि कैसे भू-राजनीतिक बदलाव शिक्षा और वर्कफोर्स डेवलपमेंट को प्रभावित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों की पाबंदियों से पैदा हुए मौकों का फायदा उठाकर सिंगापुर जैसे देश खुद को मजबूत कर रहे हैं। वहीं, चीन के छात्रों के लिए सिंगापुर न सिर्फ वर्ल्ड-क्लास एजुकेशन का मौका देता है, बल्कि एक ऐसा करियर पाथ भी देता है जो उनके घर के करीब और सांस्कृतिक रूप से परिचित है।

स्रोत: South China Morning Post

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन के STEM छात्र सिंगापुर क्यों जा रहे हैं?

चीन के STEM छात्र सिंगापुर का रुख कर रहे हैं क्योंकि पश्चिमी देशों की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी और चीन के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण इन देशों में पहुंचना मुश्किल हो गया है।

सिंगापुर का SM2 स्कॉलरशिप प्रोग्राम क्या है?

SM2 स्कॉलरशिप प्रोग्राम सिंगापुर का एक प्रोग्राम है जो 11वीं क्लास के होनहार चीनी छात्रों को फुली फंडेड अंडरग्रेजुएट पढ़ाई का मौका देता है।

इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को क्या लाभ मिलता है?

छात्रों को न केवल पढ़ाई का मौका मिलता है, बल्कि रहने-खाने के लिए भत्ता भी दिया जाता है।

स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को क्या वादा करना होता है?

स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद 6 साल तक सिंगापुर में काम करने का वादा करना होता है।

सिंगापुर का यह प्रोग्राम क्यों महत्वपूर्ण है?

यह प्रोग्राम सिंगापुर को ग्लोबल टैलेंट की प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाता है और STEM वर्कफोर्स की जरूरत को पूरा करता है।

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