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चीनी बायोटेक कंपनियां लाइसेंसिंग डील्स पर दांव लगा रही हैं

चीनी बायोटेक कंपनियां आउट-लाइसेंसिंग डील्स को IPO से ज्यादा फंडिंग ला रही हैं, लेकिन विदेशी दवा कंपनियां बजट कम कर रही हैं।

चीनी बायोटेक कंपनियां लाइसेंसिंग डील्स पर दांव लगा रही हैं
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जैसे-जैसे बड़ी ग्लोबल दवा कंपनियां सतर्क हो रही हैं, क्या चाइनीज बायोटेक आउट-लाइसेंसिंग से कमाई जारी रख पाएगी?

चाइनीज बायोटेक कंपनियों ने आउट-लाइसेंसिंग डील्स को फंडिंग का अपना मुख्य जरिया बना लिया है, जो IPO और प्री-IPO फंडरेजिंग को पीछे छोड़ चुका है। ये डील्स उन कंपनियों के लिए जीवनरेखा बन गई हैं जो दवाओं की खोज और क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए पैसे जुटाने में जूझ रही हैं।

रिकॉर्ड क्रॉस-बॉर्डर लाइसेंसिंग समझौतों ने साल की पहली छमाही में कुछ घाटे में चल रही चाइनीज बायोटेक कंपनियों को मुनाफे में बदल दिया। लेकिन अब इस सेक्टर के सामने अनिश्चितता है क्योंकि बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां अपने डील बजट को कम करने की योजना बना रही हैं।

डील्स ने IPO से मिली रकम को पीछे छोड़ा

यह बदलाव चाइनीज दवा डेवलपर्स के सामने आ रही कमर्शियल हकीकत को दर्शाता है। मैक्वेरी कैपिटल में एशिया हेल्थकेयर रिसर्च के हेड टोनी रेन ने कहा, "IPO से मिली रकम की तुलना में यह काफी बड़ी है।"

डेलॉयट के मुताबिक हेल्थकेयर और दवा कंपनियों ने हॉन्गकॉन्ग में पहली छमाही में 11 लिस्टिंग के जरिए HK$14.1 बिलियन (US$1.8 बिलियन) जुटाए। मेनलैंड में चाइना के A-शेयर मार्केट में छह बायोटेक और हेल्थकेयर कंपनियां लिस्ट हुईं, जिन्होंने मिलाकर 2.12 बिलियन युआन जुटाए।

कीमत में फायदे पर दबाव

चाइनीज बायोटेक एसेट्स लागत के हिसाब से आकर्षक बने हुए हैं, भले ही ग्लोबल फार्मास्युटिकल कंपनियां ज्यादा चुनिंदा हो रही हैं। जेफरीज में एशिया के लिए हेल्थकेयर रिसर्च की हेड कुई कुई ने कहा, "चाइनीज बायोटेक एसेट्स ग्लोबल साथियों की तुलना में काफी किफायती हैं।" अगर बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अधिग्रहण पर खर्च घटाती हैं, तो कुई ने कहा, "चाइनीज बायोटेक एसेट्स और भी आकर्षक लग सकते हैं।"

फिर भी, विश्लेषक सवाल उठाते हैं कि क्या विदेशी लाइसेंसिंग आय पर निर्भरता इस सेक्टर को लंबे समय तक टिका सकती है। फंडिंग मॉडल बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों की लगातार रुचि पर निर्भर है, ऐसे वक्त में जब ये कंपनियां डील बजट को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने का संकेत दे रही हैं।

टिकाऊपन का सवाल उस सेक्टर पर मंडरा रहा है जिसने नई दवाओं को खोज, क्लिनिकल डेवलपमेंट और रेगुलेटरी मंजूरी के जरिए आगे बढ़ाने के लिए आउट-लाइसेंसिंग डील्स को मुख्य फंडिंग विकल्प बना लिया है।

स्रोत: South China Morning Post

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीनी बायोटेक कंपनियों के लिए लाइसेंसिंग डील्स इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

चीनी बायोटेक कंपनियों के लिए आउट-लाइसेंसिंग डील्स फंडिंग का मुख्य जरिया बन गए हैं। ये डील्स IPO और प्री-IPO फंडरेजिंग से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। दवाओं की खोज और क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए पैसे जुटाने में जो कंपनियां जूझ रही हैं, उनके लिए ये डील्स जीवनरेखा बन गई हैं।

क्या लाइसेंसिंग डील्स से चीनी बायोटेक को लाभ मिल रहा है?

हां, रिकॉर्ड क्रॉस-बॉर्डर लाइसेंसिंग समझौतों ने साल की पहली छमाही में कुछ घाटे में चल रही चीनी बायोटेक कंपनियों को मुनाफे में बदल दिया है। लाइसेंसिंग डील्स से मिली रकम IPO से मिली रकम से भी काफी ज्यादा है।

क्या भविष्य में यह फंडिंग मॉडल टिकाऊ है?

विश्लेषकों को इस बात पर संदेह है। विदेशी लाइसेंसिंग आय पर निर्भरता लंबे समय तक काम नहीं कर सकती क्योंकि बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां अपने डील बजट को कम करने की योजना बना रही हैं। फंडिंग मॉडल इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की निरंतर रुचि पर निर्भर है।

चीनी बायोटेक एसेट्स ग्लोबल कंपनियों की तुलना में कैसे हैं?

चीनी बायोटेक एसेट्स लागत के हिसाब से ग्लोबल साथियों की तुलना में काफी किफायती हैं। अगर बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अधिग्रहण पर खर्च घटाती हैं, तो चीनी बायोटेक एसेट्स और भी ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं।

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