कावेरी जल विवाद फिर गरमाया, कर्नाटक-तमिलनाडु बॉर्डर बंद करने का ऐलान; सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार
बेंगलुरु/चेन्नई: कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है।
बेंगलुरु/चेन्नई: कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज ने सोमवार को कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर विरोध प्रदर्शन करते हुए अट्टीबेले बॉर्डर को बंद करने का आह्वान किया है। प्रदर्शन का असर दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले वाहनों और यात्रियों पर पड़ने की आशंका है।
वटल नागराज के नेतृत्व में यह प्रदर्शन सोमवार सुबह करीब 11 बजे अट्टीबेले के पास शुरू होने की बात कही गई थी। उनका विरोध मुख्य रूप से कावेरी जल विवाद और कर्नाटक के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। अट्टीबेले और होसुर के बीच बड़ी संख्या में लोग रोजाना काम, कारोबार और दूसरे कामों के लिए सीमा पार करते हैं, ऐसे में बॉर्डर पर प्रदर्शन से परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
बस सेवाओं पर भी असर
प्रदर्शन के बीच तमिलनाडु की सरकारी बसें होसुर तक सामान्य रूप से चलती रहीं, लेकिन कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें सुबह से होसुर में दाखिल नहीं हुईं। तमिलनाडु परिवहन अधिकारियों के मुताबिक, सीमा की स्थिति को देखते हुए कर्नाटक की ओर जाने वाली बस सेवाओं को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा।
तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार
दूसरी तरफ कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। राज्य सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से मंजूर की गई सिफारिशों के मुताबिक तमिलनाडु को पानी नहीं छोड़ा है। तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।
तमिलनाडु सरकार ने अदालत से 1 जून से 12 अगस्त के बीच बकाया 26.954 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही कर्नाटक के जलाशयों में पानी की स्थिति की नियमित निगरानी और अंतरराज्यीय सीमा बिल्लिगुंडलु पर तय मात्रा में पानी छोड़े जाने को सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
किसानों को सांबा फसल की उम्मीद
कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। किसानों को उम्मीद है कि अगर कर्नाटक से पानी छोड़ा जाता है तो इस साल सांबा धान की फसल शुरू की जा सकती है।
किसान संगठनों के मुताबिक, सिंचाई के लिए समय पर पानी मिलना बेहद जरूरी है। किसानों का कहना है कि अगर अगस्त के अंत तक पानी उपलब्ध हो जाता है तो सांबा की एक फसल लेने की संभावना बनी रह सकती है।
कावेरी जल को लेकर दोनों राज्यों के बीच पुराना विवाद एक बार फिर सड़क से लेकर अदालत तक पहुंच गया है। एक तरफ कर्नाटक में सीमा बंद करने जैसे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु सरकार अपने हिस्से के पानी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम और दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर होने वाले फैसले पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कावेरी जल विवाद क्या है?
कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है।
कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर क्या हो रहा है?
कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है, जिसमें अट्टीबेले बॉर्डर को बंद करने का आह्वान किया गया है।
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की है?
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देने की मांग की है।
किसानों को कावेरी जल विवाद से क्या असर हो रहा है?
कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि अगर पानी मिलता है तो वे सांबा धान की फसल शुरू कर सकेंगे।
प्रदर्शन का परिवहन पर क्या असर पड़ेगा?
प्रदर्शन के कारण दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले वाहनों और यात्रियों पर असर पड़ने की आशंका है।
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