बहराइच मेडिकल कॉलेज ने कंधे की जटिल सर्जरी में हासिल की सफलता
बहराइच के महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज और महर्षि बालार्क अस्पताल ने इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।
बहराइच के महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज और महर्षि बालार्क अस्पताल ने इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। हड्डी रोग विभाग ने पूरे मंडल में पहली बार दूरबीन विधि यानी शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी से कंधे के जोड़ की बैंकर्ट रिपेयर सर्जरी सफलतापूर्वक की है। 38 साल के एक मरीज का यह ऑपरेशन किया गया, जो लंबे समय से कंधे के जोड़ की गंभीर दिक्कत से परेशान था। मरीज की पहचान गोपनीयता के चलते सार्वजनिक नहीं की गई है।
हड्डी रोग विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर प्रो. मिथिलेश कुमार ने बताया कि मरीज को बैंकर्ट चोट थी, जिसमें कंधे का जोड़ बार-बार अपनी जगह से खिसक जाता है या अस्थिर हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से सर्जरी की गई। इस तकनीक में छोटे-छोटे छेद करके कैमरा और खास उपकरणों की मदद से कंधे के जोड़ के अंदर की चोट का इलाज किया जाता है। यह आधुनिक तरीका मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की दिशा में एक अहम कदम है।
इस जटिल ऑपरेशन में प्रो. मिथिलेश कुमार के साथ हड्डी रोग विभाग की टीम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. आशीष ने भी जरूरी सहयोग दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. संजय खत्री ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई दी और कहा कि कॉलेज लगातार नई इलाज सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि आगे भी ऐसी जटिल और आधुनिक सर्जरी यहां कराई जाएंगी, ताकि बहराइच और आसपास के इलाकों के मरीजों को अच्छी चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें। यह सफलता क्षेत्र में आर्थ्रोस्कोपिक और हड्डी रोग सेवाओं के विस्तार में एक अहम मील का पत्थर साबित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बहराइच मेडिकल कॉलेज ने कौन सी सर्जरी में सफलता हासिल की है?
बहराइच के महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज ने शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से कंधे के जोड़ की बैंकर्ट रिपेयर सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह पूरे मंडल में पहली बार ऐसी सर्जरी की गई है।
बैंकर्ट चोट क्या होती है?
बैंकर्ट चोट में कंधे का जोड़ बार-बार अपनी जगह से खिसक जाता है या अस्थिर हो जाता है। इस स्थिति में मरीज को कंधे में गंभीर दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी तकनीक क्या है?
इस तकनीक में छोटे-छोटे छेद करके कैमरा और खास उपकरणों की मदद से कंधे के जोड़ के अंदर की चोट का इलाज किया जाता है। यह एक आधुनिक और कम नुकसानदेह तरीका है।
इस सर्जरी के बाद मरीज की हालत कैसी है?
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। सर्जरी सफल रहने के बाद उसका रिकवरी अच्छा चल रहा है।
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