प्रेस की तस्वीरें सरकार का ध्यान खींच सकती हैं: फोटो जर्नलिस्ट बी.एम. केदारनाथ
फोटो जर्नलिस्ट बी.एम. केदारनाथ ने कर्नाटक यूनिवर्सिटी में प्रेस फोटोग्राफी, तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारी पर छात्रों को जानकारी दी।
प्रेस की तस्वीरें सरकार को कार्रवाई के लिए आगे बढ़ने पर मजबूर कर सकती हैं, बोले फोटो जर्नलिस्ट
वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट बी.एम. केदारनाथ ने शुक्रवार को धारवाड़ की कर्नाटक यूनिवर्सिटी में प्रेस फोटोग्राफी पर एक खास व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने बताया कि खबरों की तस्वीरें जनता से जुड़े मुद्दों की तरफ ध्यान खींचने में किस तरह मदद कर सकती हैं।
फोटोग्राफी और जनता के प्रति जवाबदेही
श्री केदारनाथ ने कहा कि प्रेस की तस्वीरें जमीनी हालात को सामने लाने और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि खबरों की फोटोग्राफी के लिए हालात के हिसाब से तुरंत फैसला लेने की क्षमता जरूरी होती है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि एक असरदार तस्वीर किसी घटना को सैकड़ों शब्दों से ज्यादा ताकतवर तरीके से सामने रख सकती है। इस बात से यह साफ हुआ कि फोटो जर्नलिज्म सिर्फ खबरों की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव जनता की जागरूकता और प्रशासन का ध्यान खींचने से भी है।
इस व्याख्यान का आयोजन कर्नाटक यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग ने किया था। श्री केदारनाथ ने छात्रों से कहा कि वे फोटोग्राफी की तकनीकी जानकारी और कौशल बढ़ाएं, लेकिन इसके साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर भी सजग रहें।
तकनीक, सही समय और जिम्मेदारी
तस्वीरें लेने की अलग-अलग तकनीकों और तरीकों के बारे में बताते हुए श्री केदारनाथ ने कहा कि विषय का चुनाव सोच-समझकर करना बहुत जरूरी है। उन्होंने असरदार तस्वीरें लेने में रोशनी, कैमरा सेटिंग्स, फोकस, फ्रेमिंग, कंपोजिशन, कैमरा एंगल, बैकग्राउंड और सही समय के इस्तेमाल पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि ये सभी चीजें इस बात को तय करने में अहम होती हैं कि किसी घटना को तस्वीर के जरिए किस तरह दर्ज किया गया और उसे किस तरह समझा गया। तुरंत फैसला लेने और तकनीकी नियंत्रण पर उनका जोर यह दिखाता है कि खबरों की फोटोग्राफी का काम कितनी मांग करता है।
27 साल के करियर की तस्वीरें
अपने 27 साल के पेशेवर अनुभव के आधार पर श्री केदारनाथ ने अपने करियर के दौरान खींची गई कई दुर्लभ तस्वीरें दिखाईं। इन तस्वीरों में सूखे के दृश्य, धारवाड़ में एक गौर और एक हाथी के आने के दृश्य, और बाईपास सड़कों पर हुए हादसों से हुई तबाही की तस्वीरें शामिल थीं।
उन्होंने इन घटनाओं की पृष्ठभूमि साझा की और बताया कि इन तस्वीरों का जनता की जागरूकता और प्रशासन पर क्या असर पड़ा। इन उदाहरणों से यह समझ आया कि फोटो जर्नलिज्म महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्ज करने के साथ-साथ उनके बड़े सार्वजनिक महत्व की तरफ भी ध्यान खींच सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष जे.एम. चंदुनवर ने श्री केदारनाथ की सराहना की। उन्होंने उनकी तस्वीरों को धारवाड़ के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं का दृश्य रिकॉर्ड बताया। प्रोफेसर एस.एम. मालगट्टी ने भी बात रखी। सपना भाटिया ने वक्ता का परिचय दिया, जबकि अनुराधा ने सभा का स्वागत किया और कार्यक्रम का संचालन किया।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बी.एम. केदारनाथ ने प्रेस फोटोग्राफी पर व्याख्यान कहां दिया?
उन्होंने शुक्रवार को धारवाड़ की कर्नाटक यूनिवर्सिटी में प्रेस फोटोग्राफी पर व्याख्यान दिया।
प्रेस की तस्वीरें सरकार और जनता के लिए क्यों अहम हैं?
प्रेस की तस्वीरें जमीनी हालात और जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाकर सरकार का ध्यान खींच सकती हैं।
असरदार खबरों की तस्वीरों के लिए किन चीजों का ध्यान रखना जरूरी है?
रोशनी, कैमरा सेटिंग्स, फोकस, फ्रेमिंग, कंपोजिशन, कैमरा एंगल, बैकग्राउंड और सही समय का ध्यान रखना जरूरी है।
बी.एम. केदारनाथ ने अपने करियर की कितने साल की तस्वीरें दिखाईं?
उन्होंने अपने 27 साल के पेशेवर करियर के दौरान खींची गई कई दुर्लभ तस्वीरें दिखाईं।
व्याख्यान का आयोजन किस विभाग ने किया था?
इसका आयोजन कर्नाटक यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग ने किया था।
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