117 साल पुरानी गौरीगंज रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता, बालि वध और लंका दहन
अमेठी के जिला मुख्यालय गौरीगंज के चौक बाजार में चल रही 117 साल पुरानी श्रीरामलीला में रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को आठवें दिन रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया।
अमेठी के जिला मुख्यालय गौरीगंज के चौक बाजार में चल रही 117 साल पुरानी श्रीरामलीला में रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को आठवें दिन रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान राम-सुग्रीव मित्रता, बालि वध और हनुमान जी द्वारा लंका दहन के प्रसंगों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। आयोजन में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा।
वर्ष 1909 में स्थापित गौरीगंज की श्रीरामलीला में अयोध्या से आए अनुभवी कलाकारों ने रामायण के इन प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। कलाकारों के अभिनय ने लोगों को रामायण की कथा और उसके प्रमुख प्रसंगों से जोड़ दिया।
मंचन के दौरान भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद बालि वध का मंचन हुआ। हनुमान जी द्वारा लंका दहन के दृश्य ने भी रामलीला में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। इन प्रसंगों के जरिए धर्म, मित्रता और साहस का संदेश दिया गया। साथ ही अधर्म पर धर्म की विजय को भी दिखाया गया।
रामलीला के आठवें दिन आयोजित कार्यक्रम में श्रीरामलीला समिति गौरीगंज के अध्यक्ष शीतला मिश्र मौजूद रहे। उनके अलावा जिला प्रचारक पवन और नगर प्रचारक मनोज भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम में जीएसटी कमिश्नर एवं समाजसेवी भूपेंद्र शुक्ला, आदित्य मिश्र, राकेश अग्रहरि, अजय अग्रवाल, ओपी सिंह और डॉ. मेवालाल की भी मौजूदगी रही। राम जी अग्रहरि, कामद अग्रहरि, संतोष अग्रहरि, महीप अग्रहरि और टोनी सहित कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
गौरीगंज की यह ऐतिहासिक रामलीला 117 वर्षों से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बनी हुई है। वर्ष 1909 से जारी इस आयोजन के जरिए नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण के प्रसंगों से परिचित कराया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गौरीगंज की रामलीला कितनी पुरानी है?
गौरीगंज की श्रीरामलीला 117 साल पुरानी है और इसकी शुरुआत वर्ष 1909 में हुई थी।
रामलीला के आठवें दिन कौन-कौन से प्रसंग दिखाए गए?
आठवें दिन राम-सुग्रीव मित्रता, बालि वध और हनुमान जी द्वारा लंका दहन के प्रसंग दिखाए गए।
रामलीला में कलाकार कहां से आए थे?
रामलीला में अयोध्या से आए अनुभवी कलाकारों ने इन प्रसंगों का मंचन किया।
रामलीला में किन संदेशों को दिखाया गया?
इन प्रसंगों के जरिए धर्म, मित्रता और साहस का संदेश दिया गया और अधर्म पर धर्म की जीत दिखाई गई।
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