अरविंद स्वामी ने रिजेक्ट होकर बनाया ₹3300 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य
कॉलेज थिएटर ग्रुप ने किया रिजेक्ट, अरविंद स्वामी ने स्टारडम छोड़ बनाया ₹3300 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य अरविंद स्वामी की कहानी संघर्ष और खुद को फिर से खड़ा करने की मिसाल है।
अरविंद स्वामी की कहानी संघर्ष और खुद को फिर से खड़ा करने की मिसाल है। कभी कॉलेज के थिएटर ग्रुप ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन बाद में वो तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक बने। करियर के पीक पर उन्होंने एक्टिंग छोड़कर ₹3300 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया। निजी और सेहत से जुड़ी परेशानियों को पार करते हुए उन्होंने एक्टिंग में वापसी की और भारतीय सिनेमा में अपनी जगह और मजबूत की।
अरविंद स्वामी ने चेन्नई के लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान थिएटर ग्रुप जॉइन किया था। लेकिन ग्रुप ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया और स्टेज परफॉर्म करने का मौका नहीं दिया। इस दौरान पॉकेट मनी के लिए उन्होंने मॉडलिंग शुरू की। यही मॉडलिंग उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
मॉडलिंग के दौरान ही फिल्ममेकर मणिरत्नम की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद स्वामी ने 1991 में फिल्म थलपति से डेब्यू किया। इसमें उन्होंने रजनीकांत और ममूटी के साथ एक ईमानदार डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर का रोल निभाया। मणिरत्नम ने उन्हें 1992 की पॉलिटिकल ड्रामा रोजा में लीड रोल दिया। ये फिल्म सुपरहिट रही और स्वामी रातों-रात स्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे (1995) और मिनसारा कनवु (1997) जैसी हिट फिल्में दीं। मिनसारा कनवु को चार नेशनल अवॉर्ड मिले।
हालांकि, एक्टिंग कभी स्वामी का पहला सपना नहीं था। बचपन में वो डॉक्टर बनना चाहते थे और अपने परिवार के बिजनेस में भी उनकी खास दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में उनका एक्टिंग करियर धीमा पड़ने लगा। मणिरत्नम की अलैपायुथे (2000) में गेस्ट अपीयरेंस के बाद उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया और बिजनेस पर फोकस किया।
स्वामी ने अपने परिवार की इंटरनेशनल ट्रेड और कंस्ट्रक्शन कंपनी V.D. Swamy and Company की जिम्मेदारी संभाली। बाद में वो इंटरप्रो ग्लोबल के प्रेसिडेंट और प्रोलीज इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने। 2005 में उन्होंने टैलेंट मैक्सिमस नाम की कंपनी शुरू की, जो पेरोल प्रोसेसिंग और स्टाफिंग का काम करती है। 2022 में इसकी वैल्यू ₹3300 करोड़ आंकी गई।
इसी साल स्वामी एक बड़े हादसे का शिकार हुए, जिसमें उनकी एक टांग आंशिक रूप से पैरालाइज हो गई। उन्हें कई सालों तक दर्द और इलाज से गुजरना पड़ा। इस दौरान उनकी पर्सनल लाइफ में भी मुश्किलें आईं। 1994 में उन्होंने गायत्री राममूर्ति से शादी की थी। उनके दो बच्चे हैं, अधिरा और रुद्र। लेकिन शादी में दिक्कतों के चलते दोनों 2010 में तलाक ले लिया।
स्पाइनल इंजरी से उबरने के बाद स्वामी ने 2013 में मणिरत्नम की कदल से फिल्मों में वापसी की। इसके लिए उन्होंने 15 किलो वजन कम किया। उनकी वापसी को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने थानी ओरुवन (2015), चेक्का चिवंथा वानम (2018) और थलाइवी (2023) जैसी फिल्मों में दमदार परफॉर्मेंस दी। थलाइवी में उन्होंने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन का रोल निभाया। 2021 में उन्होंने नेटफ्लिक्स की एंथोलॉजी सीरीज नवरसा से डायरेक्शन में डेब्यू किया।
कॉलेज थिएटर ग्रुप से रिजेक्ट होने के तीन दशक बाद स्वामी ने एक्टिंग, बिजनेस, विलेन, बायोपिक और डायरेक्टर के रोल्स में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी कहानी उनके टैलेंट और जज्बे की मिसाल है, जिसे उनके दौर के बहुत कम लोग छू पाए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अरविंद स्वामी ने कॉलेज में थिएटर ग्रुप से रिजेक्ट होने के बाद अपना करियर कैसे शुरू किया?
कॉलेज थिएटर ग्रुप ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन पॉकेट मनी के लिए उन्होंने मॉडलिंग शुरू की। इसी मॉडलिंग के दौरान फिल्ममेकर मणिरत्नम की नजर उन पर पड़ी और 1991 में वो फिल्म 'थलपति' से डेब्यू हुए।
अरविंद स्वामी ने एक्टिंग से ब्रेक लेकर क्या किया?
2000 के दशक की शुरुआत में उनका एक्टिंग करियर धीमा पड़ गया। फिर उन्होंने अपने परिवार की ट्रेड और कंस्ट्रक्शन कंपनी को संभाला। 2005 में उन्होंने टैलेंट मैक्सिमस कंपनी शुरू की, जिसकी 2022 में वैल्यू ₹3300 करोड़ आंकी गई।
अरविंद स्वामी को किस हादसे का सामना करना पड़ा और वो कैसे वापस आए?
2005 में एक बड़े हादसे में उनकी एक टांग आंशिक रूप से पैरालाइज हो गई। कई सालों की रिकवरी के बाद 2013 में वो मणिरत्नम की फिल्म 'कदल' से एक्टिंग में वापस आए। इसके लिए उन्होंने 15 किलो वजन भी कम किया।
अरविंद स्वामी ने अपने एक्टिंग करियर में कौन सी फिल्में दीं?
उन्होंने 1992 की फिल्म 'रोजा' से सुपरस्टार बने। इसके बाद 'बॉम्बे' (1995) और 'मिनसारा कनवु' (1997) जैसी हिट फिल्में दीं। वापसी के बाद 'थानी ओरुवन' (2015), 'चेक्का चिवंथा वानम' (2018) और 'थलाइवी' (2023) में परफॉर्मेंस दी।
अरविंद स्वामी ने डायरेक्टर के रूप में अपना करियर कब शुरू किया?
2021 में उन्होंने Netflix की एंथोलॉजी सीरीज 'नवरसा' से डायरेक्शन में अपना डेब्यू किया।
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