शिवाजी प्रतिमा, घोड़े के पैर काटने का आरोप; हाई कोर्ट पहुंचा आंग्रे परिवार
ग्वालियर में सिंधिया और आंग्रे परिवार के बीच दशकों से चले आ रहे संपत्ति विवाद में नया मोड़ आ गया है।
ग्वालियर में सिंधिया और आंग्रे परिवार के बीच दशकों से चले आ रहे संपत्ति विवाद में नया मोड़ आ गया है। नौ एकड़ में फैली ऐतिहासिक हिरण्यवन कोठी से शुरू हुआ यह विवाद अब वहां स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की करीब 106 साल पुरानी प्रतिमा तक पहुंच गया है। आंग्रे परिवार ने प्रतिमा को लेकर हाई कोर्ट में आवेदन देकर अपना पक्ष रखा है।
आंग्रे परिवार का आरोप है कि हिरण्यवन कोठी में स्थापित शिवाजी महाराज की प्रतिमा को वहां से हटाकर जयविलास पैलेस ले जाया गया। परिवार का दावा है कि प्रतिमा को स्थानांतरित करने के दौरान घोड़े के पैर काटे गए थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद यह मामला केवल संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऐतिहासिक प्रतिमा को लेकर भी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
हिरण्यवन कोठी की करीब नौ एकड़ जमीन और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर सिंधिया और आंग्रे परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। इस ऐतिहासिक परिसर को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। अब इसी परिसर में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर आंग्रे परिवार ने हाई कोर्ट का रुख किया है।
विवाद के केंद्र में वह प्रतिमा है, जिसे करीब 106 साल पुराना बताया जा रहा है। आंग्रे परिवार के आरोपों के मुताबिक, प्रतिमा को हिरण्यवन कोठी से जयविलास पैलेस ले जाने के लिए घोड़े के पैर काटे गए। परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर हाई कोर्ट में आवेदन दिया है और प्रतिमा से जुड़े अपने पक्ष को अदालत के सामने रखा है।
आवेदन दिए जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर है। प्रतिमा को हिरण्यवन कोठी से हटाने की परिस्थितियां, उसे जयविलास पैलेस ले जाने का आधार और इस प्रक्रिया से जुड़े दूसरे पहलू मामले में अहम हो सकते हैं। हाई कोर्ट में होने वाली कार्यवाही के दौरान इन मुद्दों पर कानूनी स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
इस मामले में यह भी देखा जाएगा कि प्रतिमा को हटाने और स्थानांतरित किए जाने को लेकर संबंधित पक्षों का क्या पक्ष है। आंग्रे परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया भी अभी सामने आना बाकी है।
ऐसे में हाई कोर्ट में आगे होने वाली कार्यवाही से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हिरण्यवन कोठी और जयविलास पैलेस से जुड़ी इस ऐतिहासिक प्रतिमा का विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। सिंधिया-आंग्रे संपत्ति विवाद में प्रतिमा का मुद्दा जुड़ने के बाद मामले ने एक नया कानूनी और ऐतिहासिक पहलू ले लिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर विवाद क्या है?
आंग्रे परिवार का आरोप है कि हिरण्यवन कोठी में लगी प्रतिमा को हटाकर जयविलास पैलेस ले जाया गया और इस दौरान घोड़े के पैर काटे गए।
आंग्रे परिवार ने क्या कदम उठाया है?
आंग्रे परिवार ने प्रतिमा से जुड़े अपना पक्ष रखने के लिए हाई कोर्ट में आवेदन दिया है।
प्रतिमा कितनी पुरानी बताई जा रही है?
यह प्रतिमा करीब 106 साल पुरानी बताई जा रही है।
यह विवाद किन परिवारों के बीच है?
हिरण्यवन कोठी और उससे जुड़ी संपत्ति को लेकर सिंधिया और आंग्रे परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है।
क्या आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हुई है?
नहीं, आंग्रे परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है और दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया भी बाकी है।
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