आंध्र प्रदेश ने डॉक्टरों के लिए रजिस्ट्रेशन बाधा खत्म की
आंध्र प्रदेश ने देशभर के डॉक्टरों के लिए खोले दरवाजे, राज्य रजिस्ट्रेशन की बाधा खत्म आंध्र प्रदेश ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश का पहला ऐसा राज्य बनने का गौरव हासिल किया है, जिसने देशभर के
आंध्र प्रदेश ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश का पहला ऐसा राज्य बनने का गौरव हासिल किया है, जिसने देशभर के डॉक्टरों के लिए रजिस्ट्रेशन की बाधा खत्म कर दी है। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 11 जून को नए नियम जारी किए हैं। अब भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड डॉक्टर आंध्र प्रदेश में बिना किसी अतिरिक्त रजिस्ट्रेशन या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के प्रैक्टिस कर सकते हैं।
सरकार के आदेश में कहा गया है, "भारत में किसी भी राज्य मेडिकल काउंसिल या केंद्र शासित प्रदेश मेडिकल काउंसिल में वैध रजिस्ट्रेशन रखने वाला और मान्यता प्राप्त मेडिकल क्वालिफिकेशन रखने वाला व्यक्ति आंध्र प्रदेश में प्रैक्टिस करने के लिए अधिकृत होगा।" यह बदलाव राज्य की PA-19 (प्रायोरिटी एरिया-19) पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद योग्य मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना और प्रैक्टिस में सहूलियत देना है।
पहले, किसी डॉक्टर को दूसरे राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए अपने मौजूदा राज्य मेडिकल काउंसिल से डीरजिस्टर होना पड़ता था, NOC लेनी पड़ती थी और फिर नए राज्य की काउंसिल में रजिस्टर करना पड़ता था। आंध्र प्रदेश के इस नए सिस्टम ने इन झंझटों को खत्म कर दिया है। हालांकि, राज्य की मेडिकल काउंसिल अब भी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए वेरिफिकेशन और रिकॉर्ड रखने के लिए जरूरी जानकारी इकट्ठा करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रगतिशील कदम न सिर्फ देशभर के डॉक्टरों को आंध्र प्रदेश की ओर आकर्षित करेगा, बल्कि राज्य को मेडिकल टूरिज्म का हब भी बना सकता है। हालांकि, नए नियम डॉक्टरों को नेशनल मेडिकल कमिशन एक्ट, 2019 या अन्य लागू नियमों, जैसे प्रोफेशनल एथिक्स और अनुशासनात्मक कार्रवाई, का पालन करने से छूट नहीं देते।
NOC लेने और अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराने की जटिल प्रक्रिया लंबे समय से डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। केरल के रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के सदस्य डॉ. बाबू केवी ने देशभर में ऐसे सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड डॉक्टर ऑटोमैटिकली इंडियन मेडिकल रजिस्टर में शामिल हो जाते हैं, जो उन्हें इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 की धारा 27 के तहत भारत में कहीं भी प्रैक्टिस करने की कानूनी अनुमति देता है।
डॉ. बाबू ने उम्मीद जताई कि नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) आंध्र प्रदेश के इस उदाहरण से प्रेरणा लेकर ऐसे सुधार लागू करेगा, जिससे डॉक्टर बिना बार-बार रजिस्ट्रेशन कराए देशभर में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकें।
आंध्र प्रदेश की यह पहल मेडिकल प्रोफेशन में ब्यूरोक्रेटिक अड़चनों को कम करने और राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
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