हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान किया
एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान किया आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से पीछे हटने का ऐलान किया है।
आम जनता उन्नयन पार्टी यानी एजेयूपी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से पीछे हटने का ऐलान किया है। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव का नतीजा अभी आना बाकी है।
कबीर ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद मीडिया से बात करते हुए यह ऐलान किया। उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान हुए टकराव के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था।
बात करते हुए कबीर भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने कहा कि वह राजनीति से स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले रहे हैं।
यह ऐलान वोटों की गिनती से पहले किया गया। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होनी है।
कबीर ने रेजीनगर चुनाव से जोड़ा राजनीति से बाहर होने का फैसला
कबीर ने संकेत दिया कि राजनीतिक व्यवस्था और उनके साथ किए गए व्यवहार से उनका मोहभंग हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रेजीनगर में चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। उन्होंने चुनाव से जुड़े हालात के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।
कबीर ने दावा किया कि रेजीनगर में बीजेपी जीतेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे नतीजे को जनता का असली जनादेश नहीं माना जा सकता।
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, कबीर ने बीजेपी पर वोट चोरी के लिए प्रशासन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
कबीर ने यह भी कहा कि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ लड़ना संभव न हो, उसमें राजनीति का कोई खास मतलब नहीं रह जाता।
इसलिए उनका रिटायरमेंट का ऐलान सिर्फ उनकी गिरफ्तारी से जुड़ा नहीं था। यह चुनाव की प्रक्रिया और राजनीतिक व्यवस्था को लेकर लगाए गए उनके बड़े आरोपों से भी जुड़ा था।
उन्होंने नाओदा के लोगों से अपने फैसले के लिए माफी मांगी।
कबीर ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह नाओदा में एक बैठक बुलाएंगे। राजनीति से रिटायर होने से पहले वह जनता से माफी मांगेंगे। उस समय उनकी उम्र 64 साल होगी।
उन्होंने नाओदा विधायक के पद से इस्तीफा देने की संभावना भी खुली रखी।
कबीर ने कहा कि बैठक के बाद अगर नाओदा के लोग अपनी राय जाहिर करते हैं, तो वह उनके फैसले पर विचार करेंगे।
उन्होंने ऐसी बैठक में 1,000 या 10,000 लोगों के शामिल होने की संभावित बात कही।
उन्होंने कहा कि अगर बैठक में शामिल 60% लोग उनसे कहेंगे कि उन्हें पद छोड़ देना चाहिए, क्योंकि अब वह आगे जारी नहीं रहना चाहते, तो वह उनकी अनुमति स्वीकार करेंगे और नाओदा के विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे।
कबीर ने इसे लोगों से किया गया वादा बताया।
शुभेंदु अधिकारी को लेकर रखी शर्त
कबीर ने यह भी कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री के पद पर रहेंगे, तब तक वह विधानसभा में नहीं जाएंगे।
उन्होंने कहा कि वह नाओदा के लोगों से माफी मांगेंगे और अगर अधिकारी मुख्यमंत्री बने रहे, तो विधानसभा नहीं जाएंगे।
एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि कबीर ने बताया कि जब तक अधिकारी पद पर रहेंगे, तब तक वह विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे।
कबीर ने कहा कि नाओदा के लोगों ने उन्हें विधानसभा के लिए चुना है। इसलिए वह अपने क्षेत्र में जरूरी सेवाएं और विकास का काम जारी रखने की कोशिश करते रहेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी मुख्यमंत्री के पद पर रहेंगे, तब तक वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे।
इन बयानों से तीन बातें सामने आती हैं। पहली, चुनावी राजनीति से संभावित रिटायरमेंट। दूसरी, नाओदा की सीट से संभावित इस्तीफा। तीसरी, बताई गई शर्त के तहत विधानसभा में नहीं जाने का फैसला।
स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि कबीर ने नाओदा की सीट से पहले ही इस्तीफा दे दिया है।
एक रिपोर्ट में उनके ऐलान को रिटायरमेंट का संकेत बताया गया। दूसरी रिपोर्ट में इसे स्वैच्छिक रिटायरमेंट का ऐलान कहा गया।
पार्टी दफ्तर के बाहर टकराव के बाद गिरफ्तारी
रेजीनगर में मतदान के बाद पार्टी दफ्तर के बाहर पुलिस के साथ हुए टकराव के बाद कबीर को हिरासत में लिया गया था।
उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान पुलिस के साथ तीखी बहस के बाद यह टकराव हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 घंटे हिरासत में रखने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
एक दूसरी रिपोर्ट में उनकी हिरासत की अवधि लगभग 12 घंटे बताई गई।
कबीर की गिरफ्तारी क्षेत्र में मतदान से जुड़ी सबसे नाटकीय घटनाओं में से एक बन गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, कबीर पर गाली-गलौज करने, वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश करने और भड़काऊ बातें कहने का आरोप लगाया गया था।
स्रोत सामग्री इन आरोपों को साबित तथ्य के तौर पर पेश नहीं करती।
इसमें इन बातों को कबीर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों के रूप में दर्ज किया गया है।
रिहा होने के बाद कबीर पत्रकारों के सामने बिल्कुल अलग अंदाज में दिखाई दिए। पार्टी दफ्तर के बाहर टकराव के दौरान जो नेता आक्रामक नजर आए थे, उनके मुकाबले उनका रूप बदला हुआ था।
वह आंखों में आंसू लिए बोल रहे थे। उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर हमला बोला।
कबीर ने आरोप लगाया कि रेजीनगर में चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं कराई गई।
उन्होंने मतदान के दौरान प्रशासन की भूमिका को बीजेपी की संभावित जीत की वजह बताया।
पुलिस की कार्रवाई उपचुनाव को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गई। कबीर ने परेशान किए जाने का आरोप लगाया, जबकि उनके विरोधियों ने गिरफ्तारी को अलग तरीके से पेश किया।
रेजीनगर मुकाबले को लेकर अलग-अलग दावे
कबीर ने दावा किया कि रेजीनगर में बीजेपी जीतेगी। स्रोत सामग्री में इस सीट को अल्पसंख्यक बहुल बताया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण नतीजा जनता का असली जनादेश नहीं माना जाएगा।
बीजेपी के सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की, जो उनके मुताबिक हिंदू और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा करने और दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे थे।
भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी नंदीग्राम और रेजीनगर, दोनों उपचुनाव जीतेगी।
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने भी दोनों सीटों पर बीजेपी की जीत का भरोसा जताया।
घोष ने कहा कि वोटर समझते हैं कि सही और बेहतर शासन कौन दे सकता है।
उन्होंने कहा कि लोग विकास और अच्छे शासन के नाम पर वोट देंगे।
रेजीनगर में बीजेपी के उम्मीदवार शंकरराव सरकार थे।
स्रोत सामग्री में बताए गए दूसरे प्रमुख उम्मीदवार मुस्लिम थे।
इन उम्मीदवारों में कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी, टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी और एजेयूपी के घोलाम नबी आजाद शामिल थे।
रेजीनगर को मुस्लिम बहुल सीट बताया गया है।
इस मुकाबले में बीजेपी, कांग्रेस, टीएमसी, टीएमसी के दोनों गुट, सीपीआई(एम) और एजेयूपी शामिल थे।
चुनावी रिपोर्ट के मुताबिक, कबीर के बेटे घोलाम नबी आजाद ने एजेयूपी उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़ा।
एक दूसरी रिपोर्ट में एजेयूपी उम्मीदवार का नाम गुलाम नबी आजाद बताया गया।
एक अलग चुनावी अपडेट में गुलाम अली अहमद को एजेयूपी उम्मीदवार बताया गया। इसमें कहा गया कि उनका मानना था कि पार्टी का सीधा मुकाबला बीजेपी से है।
इस तरह, स्रोत सामग्री में रेजीनगर मुकाबले से जुड़े एजेयूपी उम्मीदवारों के नाम को लेकर एक से ज्यादा नाम दिए गए हैं।
अभियान के दौरान एजेयूपी के आरोप
कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है और पार्टी के चुनावी अभियान में रुकावट डाल रही है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की है।
कबीर ने यह भी कहा कि पुलिस की कथित परेशानियों के बीच प्रचार करना संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने प्रचार से खुद को अलग कर लिया।
उन्होंने अलग से आरोप लगाया कि पुलिस मतदान के दौरान परेशानी पैदा कर रही थी और आम वोटरों को खुले तौर पर परेशान कर रही थी।
उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीनों से मुस्लिम वोटरों को दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है।
ये दावे कबीर ने किए थे। स्रोत सामग्री में इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
एजेयूपी उम्मीदवार के हवाले से कहा गया कि अगर चुनाव निष्पक्ष होता, तो पार्टी की पूरी जीत तय होती।
उम्मीदवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस पार्टी के खिलाफ योजना बनाकर काम कर रही थी।
उम्मीदवार के मुताबिक, एजेयूपी का सीधा मुकाबला किसी दूसरी पार्टी से नहीं, बल्कि बीजेपी से था।
उम्मीदवार ने कहा कि जनता हालात को समझ रही है और प्रशासन डरा हुआ है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटरों को अपना वोट डालने से रोका जा रहा है।
एजेयूपी नेताओं के इन दावों से पश्चिम बंगाल की दोनों सीटों पर मतदान के दौरान लगाए गए आरोपों का दायरा और बढ़ गया।
मुर्शिदाबाद में मिर्जापुर खागरूपाड़ा प्राइमरी स्कूल के बूथ नंबर 85 और 86 पर वोटरों ने आरोप लगाया कि कुछ उपद्रवी लोग उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे।
वोटरों ने कहा कि मतदान केंद्र पर असामाजिक तत्व रुकावट पैदा कर रहे थे और उन्हें अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने से रोक रहे थे।
स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि इन आरोपों की पुष्टि हुई थी।
मतदान प्रतिशत और लंबित नतीजा
रेजीनगर के मतदान के आंकड़े बताए गए समय और रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग रहे।
एक चुनावी अपडेट में रेजीनगर में 80.07% मतदान दर्ज किया गया।
एक दूसरी अपडेट में कहा गया कि पश्चिम बंगाल की दोनों सीटों पर करीब 79% वोटरों ने अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया।
एक और अपडेट में शाम 5 बजे तक रेजीनगर में 78.42% मतदान दर्ज किया गया।
स्रोत सामग्री में दिए गए अलग-अलग आंकड़े अलग-अलग समय और रिपोर्टों से जुड़े हैं।
अंतिम नतीजा 9 अक्टूबर को आना है।
इसलिए कबीर ने वोटरों का फैसला आधिकारिक रूप से घोषित होने से पहले यह ऐलान किया।
उन्होंने बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की, लेकिन साथ ही कहा कि ऐसा नतीजा सही जनादेश नहीं माना जाएगा।
इस बीच बीजेपी नेतृत्व ने दावा किया कि पार्टी सीट जीतेगी। उसने कबीर की राजनीतिक व्याख्या को खारिज किया।
सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि अल्पसंख्यक बहुल इलाके में नतीजे चौंकाने वाले होंगे। ऐसे इलाके में परंपरागत रूप से माना जाता रहा है कि बीजेपी को अल्पसंख्यक वोट नहीं मिलते।
उन्होंने कहा कि इस चुनाव में पुराना पैटर्न बदल सकता है।
नतीजे से पता चलेगा कि कबीर की भविष्यवाणी, बीजेपी का भरोसा और अपने समर्थन को लेकर एजेयूपी के दावे वोटों की गिनती में दिखाई देते हैं या नहीं।
स्रोत सामग्री में खुद नतीजा नहीं दिया गया है।
टीएमसी नेता से एजेयूपी प्रमुख तक
कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे।
बाद में वह पार्टी से अलग हो गए और उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई।
यह बदलाव अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर मुर्शिदाबाद में एक मस्जिद प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद हुआ।
कबीर ने दिसंबर 2025 में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी।
उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को इसकी नींव रखी थी।
घोषणा और नींव रखे जाने के कार्यक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
निर्माण का काम फरवरी 2026 में आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ।
कबीर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में मस्जिद के साथ एक इस्लामिक अस्पताल, एक मेडिकल कॉलेज और एक पार्क भी शामिल होगा।
स्रोत सामग्री में प्रस्तावित लागत या निर्माण की प्रगति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
मस्जिद की घोषणा के बाद उपचुनाव से पहले कबीर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गए थे।
इसके बाद उनकी गिरफ्तारी, चुनाव प्रशासन के खिलाफ उनके आरोप और रिटायरमेंट के ऐलान ने उन्हें रेजीनगर मुकाबले के केंद्र में बनाए रखा है।
कबीर का चुनावी इतिहास
पिछले विधानसभा चुनाव में कबीर ने नाओदा और रेजीनगर, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी।
लागू नियमों के तहत उन्होंने रेजीनगर की सीट छोड़ दी। इसके बाद वहां उपचुनाव कराना जरूरी हो गया।
सीट खाली होने के कारण रेजीनगर में मुकाबला हुआ।
स्रोत सामग्री में कबीर का यह दावा भी दर्ज है कि 23 अप्रैल 2026 को इस सीट से चुनाव लड़ते समय उन्हें 1,24,000 वोट मिले थे।
उन्होंने कहा कि उन्हें उपचुनाव में 93% मतदान की उम्मीद नहीं थी।
कबीर ने कहा कि मतदान का असली प्रतिशत प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के पास कोई मौका नहीं है और पार्टी डरी हुई है।
ये बयान चुनावी अपडेट में बताए गए आंकड़ों और नतीजे के उपलब्ध होने से पहले दिए गए थे।
अब नतीजे पर नजर रहेगी कि दोनों सीटों पर कबीर की पिछली जीत और रेजीनगर की सीट खाली होने के पीछे लिए गए फैसले की पृष्ठभूमि में मुकाबला किस दिशा में जाता है।
स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि कबीर के रिटायरमेंट के ऐलान से नाओदा के विधायक के तौर पर उनकी कानूनी स्थिति बदलती है या नहीं।
इसमें सिर्फ राजनीति से रिटायर होने का उनका इरादा और विधानसभा सीट से सशर्त इस्तीफा देने की उनकी इच्छा दर्ज है।
पश्चिम बंगाल का बड़ा उपचुनाव
पश्चिम बंगाल में रेजीनगर का चुनाव नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के साथ हुआ।
ये दोनों सीटें चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए उपचुनावों के तहत मतदान वाली सीटों में शामिल थीं।
दूसरे मुकाबले तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों, पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट और असम की नगांव लोकसभा सीट पर हुए।
सभी नतीजे 9 अक्टूबर को आने हैं।
स्रोत सामग्री में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, नंदीग्राम और रेजीनगर में काफी मतदान हुआ।
एक अपडेट में नंदीग्राम में 80.89% और रेजीनगर में 80.07% मतदान दर्ज किया गया।
एक दूसरी अपडेट में कहा गया कि शाम 5 बजे तक नंदीग्राम में 79.39% और रेजीनगर में 78.42% मतदान हुआ।
चुनाव आयोग के हवाले से कहा गया कि दोनों सीटों पर कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा। सिर्फ कुछ अप्रिय घटनाओं की सूचना मिली।
स्रोत सामग्री में पश्चिम बंगाल के बड़े उपचुनावों के दौरान डराने-धमकाने, रुकावट डालने और मतदान एजेंटों को हटाने के आरोप भी दर्ज हैं।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि हर नागरिक को बिना डर के वोट देने की आजादी मिलनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान से पिछली रात उनके मतदान एजेंटों को जबरन ले जाया गया और धमकी दी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके दस्तावेज ले लिए गए।
स्रोत सामग्री में इन बातों को प्रधान की ओर से लगाए गए आरोपों के रूप में पेश किया गया है।
बीजेपी के राज्य नेतृत्व ने कहा कि नंदीग्राम पहले से बीजेपी की सीट है और उसकी जीत का अंतर बढ़ेगा।
दिलीप घोष ने कहा कि रेजीनगर में भी बदलाव दिखाई दे सकता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक वोटरों के बीजेपी का समर्थन नहीं करने का पुराना पैटर्न बदल रहा है।
स्रोत सामग्री में पश्चिम बंगाल की किसी भी सीट का अंतिम नतीजा नहीं दिया गया है।
नंदीग्राम को लेकर बदलाव
मतदान से पहले चुनाव आयोग ने नंदीग्राम पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को बदल दिया।
अजय कुमार मिश्रा को हटा दिया गया और उनकी जगह देवाशीष सरकार को नियुक्त किया गया।
विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि मिश्रा सत्तारूढ़ पार्टी के करीब हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्रवाई इन शिकायतों के बाद हुई।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मिश्रा की तैनाती नंदीग्राम में थी।
नंदीग्राम के मुकाबले में उम्मीदवारों की स्थिति को लेकर भी बदलाव हुए।
पहले ऐसी चर्चा थी कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकती हैं।
उन्होंने संचित़ा प्रधान को टिकट दिया, लेकिन बाद में प्रधान ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।
उनके नाम वापस लेने के बाद बनर्जी के पास कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने का विकल्प था।
कांग्रेस ने इस सीट से मिलन प्रधान को उम्मीदवार बनाया।
स्रोत सामग्री में कहा गया है कि पुलिस ने मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर थे।
बीजेपी ने चंद्रनाथ रथ की मां को उम्मीदवार बनाया। चंद्रनाथ रथ शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रह चुके थे।
स्रोत सामग्री के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को हत्या कर दी गई थी।
इसलिए नंदीग्राम का चुनाव उम्मीदवारों के चयन में हुए बदलाव और विधानसभा चुनाव के बाद आए राजनीतिक बदलावों की नजर से भी देखा गया।
विधानसभा चुनाव के बाद का राजनीतिक माहौल
पश्चिम बंगाल के उपचुनाव विधानसभा चुनाव के बाद बदले हुए राजनीतिक माहौल में हो रहे थे।
मई के विधानसभा चुनाव में टीएमसी सत्ता से बाहर हो गई थी।
चुनावी रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी भी अपनी सीट हार गई थीं।
स्रोत ने इन उपचुनावों को 15 साल में पहला ऐसा चुनाव बताया, जिसमें बनर्जी न तो मुख्यमंत्री थीं, न विधायक और न ही उम्मीदवार।
इन उपचुनावों से किसी सरकार का भविष्य तय होने की उम्मीद नहीं थी।
हालांकि, इनसे जमीन पर बदलते राजनीतिक समीकरण और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टियों की संगठनात्मक ताकत का संकेत मिलने की उम्मीद थी।
इसी बड़े राजनीतिक माहौल ने नंदीग्राम और रेजीनगर में बीजेपी के दावों को संबंधित पार्टियों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है।
इससे अल्पसंख्यक बहुल सीट पर बीजेपी की जीत के कबीर के दावे को भी ज्यादा ध्यान मिला है।
स्रोत सामग्री यह साबित नहीं करती कि उपचुनाव का नतीजा इस दावे की पुष्टि करेगा या इसे खारिज करेगा।
शुभेंदु अधिकारी के बयान
अधिकारी ने चुनाव के दौरान कबीर की गिरफ्तारी पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
अधिकारी ने कहा कि वह बूथ से बाहर आए थे और उन्होंने बीच में हस्तक्षेप किया।
उन्होंने बताया कि वह अपना वोट डाल चुके थे। इसके बाद वह किराये के एक बूथ पर जाएंगे, कुछ देर आराम करेंगे और फिर कोलकाता जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अगर वह किसी दूसरे बूथ पर जाते हैं, तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा, क्योंकि नियम यही है।
ये बातें कबीर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में कही गई थीं।
अधिकारी के मुख्यमंत्री बने रहने तक विधानसभा में नहीं जाने का कबीर का फैसला उनके रिटायरमेंट के ऐलान में एक सीधी राजनीतिक शर्त जोड़ता है।
स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि राजनीति से बाहर होने के कबीर के फैसले पर अधिकारी ने सीधे कोई जवाब दिया था या नहीं।
कबीर की गिरफ्तारी से आगे मतदान को लेकर विवाद
पश्चिम बंगाल के चुनावी अपडेट में गड़बड़ियों और रुकावटों को लेकर कई दावे दर्ज किए गए हैं।
एजेयूपी नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस पार्टी के खिलाफ काम कर रही थी।
कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई से उनके कार्यकर्ता और उनका चुनावी अभियान प्रभावित हो रहा था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम वोटरों को परेशान किया जा रहा था।
मुर्शिदाबाद के दो बूथों पर वोटरों ने आरोप लगाया कि उपद्रवी लोग उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने मतदान एजेंटों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया।
विपक्षी पार्टियों ने पहले आरोप लगाया था कि नंदीग्राम का पुलिस अधिकारी सत्तारूढ़ पार्टी के करीब है।
चुनाव आयोग ने मतदान से पहले उस अधिकारी को बदल दिया।
इसी समय, चुनाव आयोग के हवाले से कहा गया कि कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा और सिर्फ कुछ अप्रिय घटनाओं की सूचना मिली।
अलग-अलग बयानों से पता चलता है कि कई राजनीतिक पक्षों ने आरोप लगाए थे। वहीं, चुनाव को लेकर दी गई रिपोर्ट में कुल मिलाकर मतदान को शांतिपूर्ण बताया गया।
स्रोत सामग्री में इन आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया गया है।
दूसरे उपचुनाव और चुनावी इंतजाम
उपचुनावों के इस बड़े दौर में तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम भी शामिल थे।
तमिलनाडु की सीटें मदुरंतकम और धरापुरम थीं।
पुडुचेरी की सीट थट्टनचावड़ी थी।
असम में मुकाबला नगांव लोकसभा सीट के लिए था।
एक चुनावी रिपोर्ट में कहा गया कि सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत मदुरंतकम में और सबसे कम मतदान नगांव में दर्ज किया गया।
उस रिपोर्ट की हेडलाइन में मदुरंतकम के लिए 83.26% का आंकड़ा दिया गया था, जबकि रिपोर्ट के बॉडी हिस्से में इसी सीट के लिए 86.26% मतदान दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के बॉडी हिस्से में धरापुरम में 80.30% और थट्टनचावड़ी में 80.81% मतदान भी दर्ज किया गया।
उसी अपडेट के मुताबिक, नगांव में 76.20% मतदान हुआ।
तमिलनाडु के ये मुकाबले एआईएडीएमके विधायकों के. मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा के इस्तीफे के बाद हुए।
चुनावी रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों बाद में टीवीके में शामिल हो गए।
पुडुचेरी में मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने अप्रैल में दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
उन्होंने मंगलम सीट अपने पास रखी और थट्टनचावड़ी से इस्तीफा दे दिया।
असम में कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मार्च में लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था।
वह बीजेपी में शामिल हो गए और बाद में असम विधानसभा चुनाव लड़ा। इसके बाद लोकसभा की सीट खाली हो गई।
चुनाव आयोग ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख तक वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता रहेगा। इसके लिए जरूरी था कि आवेदन नामांकन की आखिरी तारीख से 10 दिन पहले मिल जाएं।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
वोटरों के लिए ईपीआईसी कार्ड मुख्य पहचान दस्तावेज बना रहा।
वोटर आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और चुनाव आयोग की ओर से बताए गए दूसरे दस्तावेजों का भी इस्तेमाल कर सकते थे।
ये इंतजाम उस बड़े उपचुनाव की प्रक्रिया पर लागू थे, जिसके तहत पश्चिम बंगाल की सीटों पर मतदान हुआ।
कबीर के ऐलान के बाद भी कौन से सवाल बाकी
कबीर का फैसला अपने आप नाओदा विधानसभा सीट का भविष्य तय नहीं करता।
उन्होंने कहा कि अगर बैठक के बाद नाओदा के लोग उन्हें अनुमति देंगे, तो वह इस्तीफा देने पर विचार करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि वह क्षेत्र में जरूरी सेवाएं और विकास का काम जारी रखने की कोशिश करते रहेंगे।
स्रोत सामग्री में यह नहीं बताया गया है कि ऐसी कोई बैठक हुई है या नहीं।
इसमें यह भी नहीं बताया गया है कि नाओदा के लोगों ने उनके प्रस्तावित इस्तीफे पर वोट किया है या नहीं।
स्रोत सामग्री में विधानसभा से उनके औपचारिक इस्तीफे की बात भी दर्ज नहीं है।
कबीर ने राजनीति से रिटायरमेंट का बयान उस समय दिया, जब चुनाव का नतीजा अभी लंबित था।
बीजेपी की जीत की उनकी भविष्यवाणी तब तक एक दावा ही है, जब तक वोटों की गिनती पूरी नहीं हो जाती।
नतीजा जनता का जनादेश नहीं होगा, यह कबीर का आरोप भी अभी उनकी राजनीतिक स्थिति ही है।
अपनी संभावनाओं को लेकर बीजेपी के दावे और एजेयूपी नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप भी संबंधित पार्टियों के दावे के रूप में ही दर्ज हैं।
9 अक्टूबर को होने वाली गिनती से रेजीनगर मुकाबले में अगली पक्की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
तब तक कबीर का ऐलान उस नेता के लिए एक बड़ा मोड़ है, जिसने नाओदा और रेजीनगर, दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी, टीएमसी छोड़ी थी, एजेयूपी बनाई थी और मस्जिद प्रोजेक्ट को अपने राजनीतिक सफर का एक अहम हिस्सा बनाया था।
इस ऐलान के बाद क्षेत्र दो सवालों के जवाब का इंतजार कर रहा है। पहला, क्या बीजेपी की बताई गई बड़ी कामयाबी नतीजे में दिखाई देगी। दूसरा, क्या कबीर अपने ऐलान के बाद औपचारिक राजनीतिक इस्तीफा भी देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हुमायूं कबीर ने क्या ऐलान किया?
हुमायूं कबीर ने चुनावी राजनीति से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने का ऐलान किया।
हुमायूं कबीर ने रिटायरमेंट का ऐलान कब किया?
उन्होंने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद और वोटों की गिनती से पहले यह ऐलान किया।
रेजीनगर चुनाव को लेकर हुमायूं कबीर ने क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि रेजीनगर में चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और प्रशासन ने बीजेपी को फायदा पहुंचाया।
शुभेंदु अधिकारी को लेकर हुमायूं कबीर ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि जब तक शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे, तब तक वह विधानसभा नहीं जाएंगे और सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे।
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हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …
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