गुजरात की निष्ठा चौहान ने खोला पहला मिलेट कैफे, कमा रहीं ₹12 लाख
मिलिए निष्ठा चौहान से: एयरोस्पेस इंजीनियर जिसने नौकरी छोड़ी, गुजरात का पहला मिलेट कैफे खोला, अब हर महीने कमा रहीं ₹12 लाख गुजरात की निष्ठा चौहान के लिए खाना बर्बाद न करना और उसका सम्मान करना बचपन से
गुजरात की निष्ठा चौहान के लिए खाना बर्बाद न करना और उसका सम्मान करना बचपन से ही सिखाई गई बातें थीं। उनके परिवार में बचे हुए खाने का दोबारा इस्तेमाल, किचन वेस्ट से कंपोस्ट बनाना और खाने का सम्मान करना आम बात थी। लेकिन घर से बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि कैफे और रेस्टोरेंट में हेल्दी खाने और सस्टेनेबिलिटी की बातें तो होती हैं, लेकिन असल में वहां दिखावा और फिजूलखर्ची ज्यादा होती है।
24 साल की उम्र में रेडियो फ्रीक्वेंसी इंजीनियर के तौर पर काम कर रहीं निष्ठा को ये फर्क खटकने लगा। उन्होंने महसूस किया कि हेल्दी और ईको-फ्रेंडली खाने के ऑप्शन युवाओं को खास पसंद नहीं आते। इस कमी को दूर करने के लिए उन्होंने अपनी मां और बहन के साथ मिलकर मिलेट (मोटे अनाज) से बने खाने की रेसिपी पर काम करना शुरू किया। वड़ा पाव और मोमोज जैसे फूड आइटम्स को उन्होंने मिलेट से तैयार किया।
मिलेट निष्ठा के लिए सिर्फ एक पारंपरिक भारतीय अनाज नहीं था, बल्कि उनके दादा जी का भी मानना था कि यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। दिसंबर 2021 में निष्ठा ने बड़ा कदम उठाया और अहमदाबाद के थलतेज इलाके में कैफे आरंभ खोला। यह गुजरात का पहला मिलेट कैफे है। कैफे को पूरी तरह ईको-फ्रेंडली बनाया गया। यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता। ग्राहक हाथ पोंछने के लिए रियूजेबल टॉवल का इस्तेमाल करते हैं, प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह स्टील स्ट्रॉ दी जाती है और कटलरी भी रियूजेबल होती है।
कैफे में बायोडिग्रेडेबल पत्तों की प्लेट और कटोरियों का इस्तेमाल होता है। गीले किचन वेस्ट से खाद बनाई जाती है, जो पौधों में काम आती है। एयर कंडीशनर की बजाय यहां पानी के स्प्रिंकलर और कूलर से ठंडक बनाई जाती है। इसके अलावा, कैफे के लिए सभी सामग्री लोकल किसानों और वेंडर्स से ली जाती है ताकि कार्बन फुटप्रिंट कम हो। मेन्यू भी सीमित रखा गया है ताकि खाने की बर्बादी न हो।
कैफे में खाना डिमांड के हिसाब से तैयार किया जाता है। अगर कोई चीज खत्म हो जाती है तो ग्राहकों को ईमानदारी से बताया जाता है, बजाय इसके कि पहले से तैयार स्टॉक परोसा जाए। शुरुआत में ग्राहकों को इस कॉन्सेप्ट पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन निष्ठा की पारदर्शिता और समझाने के तरीके ने धीरे-धीरे सबका दिल जीत लिया। आज उनके कैफे को न सिर्फ खाने के लिए बल्कि सस्टेनेबिलिटी के प्रति उनके प्रयासों के लिए भी सराहा जाता है।
कैफे आरंभ ने बीते कुछ सालों में बड़ा बदलाव किया है। सिर्फ ₹70,000 से ₹80,000 और कुछ टेबल्स के साथ शुरू हुए इस कैफे ने अब तक 5.76 लाख सिंगल-यूज प्लास्टिक आइटम्स का इस्तेमाल रोक दिया है और 1.7 टन प्लास्टिक वेस्ट को बचाया है। एयर कंडीशनर के बिना काम करके 28.3 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन कम किया है और लोकल सोर्सिंग से 17.3 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन बचाया है। कुल मिलाकर 45.6 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन रोका गया है।
आर्थिक रूप से भी कैफे ने बड़ी तरक्की की है। FY23 में कैफे ने ₹78 लाख की वार्षिक कमाई की, जो FY24 में बढ़कर ₹96 लाख हो गई। FY25 तक कैफे का रेवेन्यू ₹1 करोड़ पहुंच गया और निष्ठा हर महीने करीब ₹12 लाख कमा रही हैं। निष्ठा के लिए यह सफर यह सिखाता है कि अगर इरादे सच्चे हों तो शुरुआत भले ही मुश्किल हो, लेकिन मंजिल जरूर मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निष्ठा चौहान ने कैफे खोलने का आइडिया कहां से आया?
निष्ठा को लगा कि कैफे और रेस्टोरेंट में हेल्दी और ईको-फ्रेंडली खाने की बातें तो होती हैं, लेकिन असल में दिखावा और फिजूलखर्ची ज्यादा होती है। वह एयरोस्पेस इंजीनियर थीं और उन्होंने अपनी मां-बहन के साथ मिलकर मिलेट से बने खाने की रेसिपी पर काम करना शुरू किया।
कैफे आरंभ कहां खुला और यह क्यों खास है?
दिसंबर 2021 में यह कैफे अहमदाबाद के थलतेज इलाके में खुला। यह गुजरात का पहला मिलेट कैफे है और इसे पूरी तरह ईको-फ्रेंडली बनाया गया है। यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता।
कैफे आरंभ ने कितने कार्बन इमिशन को कम किया है?
कैफे ने एयर कंडीशनर के बिना काम करके 28.3 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन कम किया है। लोकल सोर्सिंग से 17.3 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन बचाया गया है। कुल मिलाकर 45.6 मीट्रिक टन कार्बन इमिशन रोका गया है।
कैफे आरंभ की आर्थिक सफलता कैसी रही?
FY23 में कैफे ने ₹78 लाख की कमाई की, जो FY24 में ₹96 लाख हो गई। FY25 तक रेवेन्यू ₹1 करोड़ तक पहुंच गया और निष्ठा अब हर महीने करीब ₹12 लाख कमा रही हैं।
कैफे में खाना कैसे तैयार किया जाता है?
खाना डिमांड के हिसाब से तैयार किया जाता है। अगर कोई चीज खत्म हो जाती है तो ग्राहकों को ईमानदारी से बताया जाता है। यह तरीका शुरुआत में अलग लगा, लेकिन निष्ठा की पारदर्शिता से ग्राहक इस कॉन्सेप्ट को समझ गए।
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