नाना पाटेकर का गोवा स्थित घर में निधन, पांच दशक का सफर याद
गोवा स्थित घर में अभिनेता नाना पाटेकर का निधन, पांच दशक के करियर और सामाजिक काम को याद कर श्रद्धांजलि गोवा स्थित घर में नाना पाटेकर का निधन; पांच दशक के करियर और सामाजिक काम को याद कर दी गई
गोवा स्थित घर में नाना पाटेकर का निधन; पांच दशक के करियर और सामाजिक काम को याद कर दी गई श्रद्धांजलि
द हिंदू के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर, 2026 की सुबह के शुरुआती घंटों में गोवा स्थित अपने घर पर निधन हो गया। उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया था और आशंका जताई गई कि उन्हें हार्ट अटैक आया था।
द हिंदू ने बताया कि अभिनेता का निधन गुरुवार, 8 अक्टूबर, 2026 की सुबह के शुरुआती घंटों में हुआ।
वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि पणजी के पास डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में बेहोश मिलने के बाद उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल लाया गया था।
एनडीटीवी ने बताया कि गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद पाटेकर का निधन हुआ। रिपोर्ट में उनकी उम्र 75 साल बताई गई।
द हिंदू की रिपोर्ट में उनकी उम्र 76 साल बताई गई, जिससे दोनों रिपोर्टों में उनकी उम्र को लेकर अंतर रहा।
एनडीटीवी के हवाले से अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल लाए जाने के बाद डॉक्टरों ने पाटेकर को करीब 45 मिनट तक बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि अभिनेता को सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
सूत्रों ने बताया कि पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर पुणे में थे और गोवा के लिए रवाना हो गए थे।
गोवा में अचानक हुआ निधन
द हिंदू ने बताया कि प्राइवेट अस्पताल ले जाए जाने से पहले पाटेकर को हार्ट अटैक आने की आशंका थी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट में मौत की वजह गोवा स्थित उनके घर पर हुआ कार्डियक अरेस्ट बताई गई।
रिपोर्टों में कहा गया कि पाटेकर बेहोश मिले और उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
एनडीटीवी के हवाले से अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उन्हें बचाने की कोशिश करीब 45 मिनट तक जारी रही।
इन सूत्रों के मुताबिक, अभिनेता को सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
दोनों रिपोर्टों में पाटेकर की उम्र अलग-अलग बताई गई। एनडीटीवी ने उनकी उम्र 75 साल बताई, जबकि द हिंदू ने 76 साल।
गोवा से सामने आई इन परिस्थितियों के साथ उस अभिनेता की जिंदगी और करियर का अंत हो गया, जिसका काम मराठी और हिंदी सिनेमा तक फैला हुआ था।
मौत से कुछ समय पहले तक पाटेकर सार्वजनिक रूप से सक्रिय भी रहे थे।
एनडीटीवी ने बताया कि उन्हें चार दिन पहले गोवा के डोना पाउला में सार्वजनिक रूप से देखा गया था। वहां वह सम्राट क्लब इंटरनेशनल की इंस्टॉलेशन सेरेमनी में शामिल हुए थे और उन्होंने वहां भाषण भी दिया था।
समारोह में उनकी मौजूदगी और उनके भाषण का एक वीडियो गोवा का बताया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि पूरा वीडियो पीटीआई वीडियो पर उपलब्ध था।
गहराई और दमदार अंदाज से बना करियर
1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र में जन्मे पाटेकर ने खुद को ऐसे अभिनेता के तौर पर स्थापित किया, जिन्हें उनकी गहराई, डायलॉग बोलने के अंदाज और जटिल तथा अलग तरह के किरदार निभाने की क्षमता के लिए जाना जाता था।
उन्होंने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
उनकी फिल्मों में ‘नटसम्राट’, ‘वजूद’, ‘परिंदा’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘यशवंत’ सहित कई दूसरी फिल्में शामिल रहीं।
पाटेकर को तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले थे।
उनका काम ऐसे अभिनय से जुड़ा रहा, जिसमें दमदार डायलॉग डिलीवरी और जटिल तथा अलग तरह के बताए गए किरदारों को निभाना शामिल था।
2000 के दशक की शुरुआत में ‘शक्ति: द पावर’ (2002), ‘अब तक छप्पन’ (2004), ‘अपहरण’ (2005) और ‘टैक्सी नंबर 9211’ (2006) में उनके अभिनय की तारीफ हुई।
कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ (2007) में गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाने के लिए भी उन्हें काफी तारीफ मिली।
उन्होंने ‘वेलकम बैक’ (2015) में इस किरदार को फिर निभाया।
पाटेकर ने कॉमेडी थ्रिलर ‘हाउसफुल 5’ में सपोर्टिंग रोल भी किया था।
पॉलिटिकल थ्रिलर ‘राजनीति’ (2010) में उनके काम के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए पांचवीं बार नॉमिनेशन मिला।
2016 में मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में अपने अभिनय के लिए उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर जीता।
सिनेमा और कला में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
पाटेकर ‘यशवंत’ (1997), ‘वजूद’ (1998) और ‘आंच’ (2003) में प्लेबैक सिंग के लिए भी जाने जाते थे।
इस तरह उनके करियर में मराठी और हिंदी फिल्मों में अभिनय, ड्रामा, क्राइम, कॉमेडी और पॉलिटिकल थ्रिलर जैसी अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम और प्लेबैक सिंग शामिल रही।
अलग पहचान रखने वाले अभिनेता को श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पाटेकर के निधन पर दुख जताया और कहा कि दोनों के बीच “बहुत करीबी और दोस्ताना रिश्ते” थे।
एक्स पर लिखे एक पोस्ट में गडकरी ने कहा, “भारतीय फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर बेहद चौंकाने वाली और दिल तोड़ने वाली है। उनके प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं।”
गडकरी ने आगे कहा, “नाना और मेरे बीच बहुत करीबी और दोस्ताना रिश्ते थे।”
उन्होंने कहा कि पाटेकर ने मराठी और हिंदी सिनेमा के जरिए पांच दशक से ज्यादा समय तक समझदार दर्शकों के दिलों पर राज किया।
गडकरी ने पाटेकर के डायलॉग बोलने के अलग अंदाज का भी जिक्र किया और कहा कि अभिनेता ने कई किरदारों को अमर बना दिया तथा अपनी एक अलग पहचान बनाई।
गडकरी ने लिखा, “उनका जाना भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।”
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी पाटेकर के निधन पर दुख जताया।
सावंत ने उन्हें भारतीय सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक, करीबी दोस्त और समाज के लिए लगातार काम करने वाला ऐसा व्यक्ति बताया, जिसका गोवा से गहरा जुड़ाव बन गया था।
सावंत ने एनडीटीवी से कहा, “मैं इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ हूं।”
पाटेकर के साथ अपने निजी रिश्ते को याद करते हुए सावंत ने कहा कि जब भी अभिनेता गोवा में होते थे, उन्हें फोन करते थे।
सावंत ने कहा, “वह एक अच्छे दोस्त थे। जब भी वह गोवा आते थे, मुझे खुद फोन करते थे।”
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पाटेकर को “सबसे बेबाक, सबसे सच्ची और जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता, ऐसी आवाजों में से एक” बताया।
अधिकारी ने कहा, “दिग्गज अभिनेता श्री नाना पाटेकर जी के अचानक निधन की सदमा देने वाली खबर सुनकर जागना बेहद दुखद और दिल तोड़ने वाला है।”
उन्होंने कहा, “भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे बेबाक, सबसे सच्ची और जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता, ऐसी आवाजों में से एक को खो दिया है।”
अधिकारी ने आगे कहा, “नाना जी ने सिर्फ किरदार नहीं निभाए; उन्होंने हर किरदार में कच्ची और बिना किसी दिखावे वाली सच्चाई भर दी।”
अधिकारी ने पाटेकर के काम को याद करते हुए ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’ और ‘अब तक छप्पन’ का जिक्र किया।
अधिकारी ने कहा, “उनके हुनर ने ऐसी मिसाल कायम की, जिस तक पहुंचने की उम्मीद बहुत कम लोग कर सकते हैं।”
उन्होंने पाटेकर की सादगी, गहरी विनम्रता और सामाजिक काम तथा ग्रामीण समुदायों के लिए उनके निस्वार्थ समर्पण को भी याद किया।
अधिकारी ने कहा, “आपकी आवाज, आपकी जोशीली भावना और आपकी बहुत बड़ी विरासत हमेशा हमारे दिलों में दर्ज रहेगी।”
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी पाटेकर के निधन पर दुख जताया।
शिवकुमार ने कहा, “दिग्गज अभिनेता श्री नाना पाटेकर के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है।”
उन्होंने पाटेकर की असाधारण प्रतिभा, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और कभी न भूल पाने वाले अभिनय को याद किया।
शिवकुमार ने कहा कि अभिनेता ने भारतीय सिनेमा को यादगार किरदार दिए।
उन्होंने किसानों के प्रति पाटेकर की संवेदना और समाज की सेवा के लिए उनकी प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया।
साथी कलाकारों की यादें
अभिनेता प्रकाश राज ने एक्स पर एक पोस्ट में पाटेकर के साथ अपने निजी रिश्ते को याद किया।
प्रकाश राज ने लिखा, “आपकी याद आती है मेरे प्यारे नाना जी.. साथ बिताए पलों..बातचीत..बहस..आपके बनाए खाने..आपने जो ज्ञान साझा किया, उसे हमेशा संजोकर रखूंगा। मेरी जिंदगी के सफर में आने के लिए आपका शुक्रिया।”
अभिनेता और नेता रवि किशन ने कहा कि पाटेकर के साथ उनका “करीबी रिश्ता” था।
किशन ने कहा, “हम समय-समय पर बातचीत करते थे। उनके अभिनय, सादगी और जिंदगी को देखने के नजरिए से मैंने बहुत कुछ सीखा।”
उन्होंने आगे कहा, “वह हमेशा अपनापन और हौसला देते थे। उनका जाना मेरे लिए भी निजी तौर पर बहुत बड़ा नुकसान है।”
किशन ने पाटेकर को ऐसा कलाकार बताया, जिसकी पहचान सादगी, सहजता और मिट्टी से जुड़ी शख्सियत के साथ बनी रही।
उन्होंने कहा कि मुंबई की चमक-दमक के बीच रहने के बावजूद पाटेकर ने अपनी जड़ों और अपनी सोच को कभी पीछे नहीं छोड़ा।
किशन ने कहा कि पाटेकर के साथ उनका स्नेह भरा रिश्ता था और वह उनसे समय-समय पर बात करते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि पाटेकर के अभिनय, सादगी और जिंदगी को देखने के नजरिए से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला।
अभिनेता रितेश देशमुख ने कहा कि पाटेकर का निधन ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे “ट्रक आकर टकरा गया हो।”
देशमुख ने कहा, “मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं। ऐसा लग रहा है जैसे कोई ट्रक आकर मुझसे टकरा गया हो। नाना पाटेकर जी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ।”
देशमुख ने पाटेकर को “अपने आप में बेहद शानदार अभिनेता, जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती” बताया।
देशमुख ने कहा, “उन्होंने अपने अलग अंदाज और अभिनय की अपनी खास शैली से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई।”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसा कोई रोल या किरदार नहीं था, जिसे वह निभा नहीं सकते थे।”
देशमुख ने कहा कि पाटेकर बड़े पर्दे पर बहुत बड़े नायक, डरावने खलनायक और बिना चेहरे पर भाव लाए कॉमेडी करने वाले कलाकार के रूप में भी बेहतरीन रहे।
उन्होंने लोगों की भलाई के लिए किए गए अपने चैरिटी के काम की वजह से पाटेकर को पर्दे से बाहर भी एक हीरो बताया।
देशमुख ने कहा कि उन्हें ‘ब्लफमास्टर’ और ‘हाउसफुल 5’ में पाटेकर के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला था।
उन्होंने कहा कि मराठी फिल्म में पाटेकर के साथ काम करना उनकी एक अधूरी इच्छा रह जाएगी।
देशमुख ने कहा, “उनके परिवार, करीबियों और उन्हें चाहने वाले लाखों लोगों के प्रति मेरी दिल से और गहरी संवेदनाएं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “सच में, एक दौर का अंत हो गया।”
देशमुख ने पाटेकर को उनकी समझ, बातचीत, हौसला बढ़ाने और साथ हंसने के लिए भी धन्यवाद दिया।
सिनेमा से आगे का काम
भारतीय सिनेमा से बाहर भी पाटेकर सामाजिक कामों से जुड़े रहने के लिए जाने जाते थे। खास तौर पर वह किसानों और खेती से जुड़े संकट से प्रभावित परिवारों की मदद करने की कोशिशों से जुड़े रहे।
गडकरी ने पानी बचाने और वाटरशेड मैनेजमेंट के क्षेत्र में नाम फाउंडेशन के जरिए महाराष्ट्र में पाटेकर के काम का जिक्र किया।
उन्होंने इस काम को “ध्यान देने लायक और बहुत अहम” बताया।
गडकरी ने यह भी कहा कि आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों की तरफ पाटेकर ने मदद का जो हाथ बढ़ाया, वह कई परिवारों के लिए सहारे का जरिया बना।
गडकरी ने लिखा, “नाना सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार-अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील शख्सियत भी थे।”
दूसरे नेताओं की ओर से किसानों, ग्रामीण समुदायों और समाज के साथ पाटेकर के काम का जिक्र किए जाने में भी यही बात दिखाई दी।
अधिकारी ने कहा कि सामाजिक कामों और ग्रामीण समुदायों के लिए पाटेकर का निस्वार्थ समर्पण उनकी आत्मा की सच्ची महानता को दिखाता था।
शिवकुमार ने कहा कि किसानों के प्रति अभिनेता की संवेदना और समाज की सेवा के लिए उनकी प्रतिबद्धता उनके चरित्र की गहराई को दिखाती थी।
इस तरह पाटेकर से जुड़ा सामाजिक काम उनके निधन के बाद दी गई श्रद्धांजलियों का एक अहम हिस्सा रहा।
इन श्रद्धांजलियों में सामने आई उनकी सार्वजनिक पहचान मशहूर फिल्मों में किए गए अभिनय से आगे बढ़कर ग्रामीण समुदायों और खेती से जुड़े संकट से प्रभावित परिवारों से जुड़े काम तक जाती थी।
किरदारों और आवाज के जरिए याद की जाने वाली विरासत
पाटेकर के अभिनय करियर को बार-बार उन किरदारों और फिल्मों के जरिए याद किया गया, जिन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में उनकी जगह मजबूत की।
गडकरी ने कहा कि उनके डायलॉग बोलने के अंदाज ने कई किरदारों को अमर बना दिया।
अधिकारी ने कहा कि पाटेकर ने सिर्फ रोल नहीं किए, बल्कि अपने किरदारों में कच्ची और बिना किसी दिखावे वाली सच्चाई भर दी।
देशमुख ने भी कहा कि पाटेकर हर तरह का रोल निभा सकते थे, चाहे वह बहुत बड़ा नायक हो, डरावना खलनायक हो या बिना चेहरे पर भाव लाए कॉमेडी करने वाला किरदार।
श्रद्धांजलियों में जिन फिल्मों का नाम लिया गया, उनमें ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’ और ‘अब तक छप्पन’ शामिल थीं।
उनकी बाकी चर्चित फिल्मों में ‘नटसम्राट’, ‘वजूद’, ‘यशवंत’, ‘शक्ति: द पावर’, ‘अपहरण’, ‘टैक्सी नंबर 9211’, ‘वेलकम’, ‘वेलकम बैक’, ‘राजनीति’ और ‘हाउसफुल 5’ भी शामिल रहीं।
‘नटसम्राट’ में पाटेकर के काम के लिए उन्हें 2016 में फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर मिला।
उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिले थे। इसके अलावा सिनेमा और कला में योगदान के लिए 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
राजनीतिक नेताओं और कलाकारों की श्रद्धांजलियों में उनके दमदार स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग बोलने के अलग अंदाज, सादगी और पर्दे से बाहर किए गए काम पर खास जोर रहा।
सावंत ने उन्हें ऐसे दोस्त के रूप में याद किया, जो गोवा में होने पर उन्हें खुद फोन करते थे।
गडकरी ने अपने करीबी और दोस्ताना रिश्तों को याद किया और उनके जाने को भारतीय सिनेमा के लिए बड़ा नुकसान बताया।
अधिकारी ने कहा कि पाटेकर की आवाज, उनका जोशीला अंदाज और उनकी विरासत लोगों के दिलों में बनी रहेगी।
देशमुख के लिए यह नुकसान “एक दौर का अंत” था।
गोवा स्थित घर में बेहोश मिलने के बाद पाटेकर के निधन की खबर सामने आई। अस्पताल के सूत्रों ने कहा कि करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
रिपोर्टों में उनकी उम्र 75 या 76 साल बताई गई, लेकिन दोनों ने ऐसे अभिनेता के निधन की जानकारी दी, जिनके करियर, सामाजिक काम और अलग पहचान वाली आवाज को सिनेमा और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाना पाटेकर का निधन कब और कहां हुआ?
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर निधन हुआ।
नाना पाटेकर की मौत की वजह क्या बताई गई?
रिपोर्टों में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई है। पहले उन्हें हार्ट अटैक आने की आशंका भी जताई गई थी।
नाना पाटेकर को अस्पताल में बचाने की कितनी देर कोशिश की गई?
अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें करीब 45 मिनट तक बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
नाना पाटेकर की उम्र कितनी थी?
एनडीटीवी ने उनकी उम्र 75 साल और द हिंदू ने 76 साल बताई, इसलिए रिपोर्टों में उनकी उम्र को लेकर अंतर रहा।
नाना पाटेकर को कितने नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले थे?
नाना पाटेकर को तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले थे।
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