अबू धाबी हेल्थ समिट में लंबी, स्वस्थ जिंदगी के लिए हेल्थकेयर पर जोर
अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट में बीमारी की पहले पहचान, रोकथाम और पर्सनल इलाज के जरिए लंबी व स्वस्थ जिंदगी पर चर्चा हो रही है।
अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट में लंबी उम्र पर केंद्रित हेल्थकेयर पर जोर
नीति बनाने वाले लोग और हेल्थ इंडस्ट्री के बड़े नेता अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट में जुट रहे हैं। यहां यह समझने की कोशिश की जा रही है कि बीमारी का पहले से अनुमान लगाकर और उसकी रोकथाम करके लोगों को ज्यादा लंबी और ज्यादा स्वस्थ जिंदगी कैसे दी जा सकती है।
इस समिट में दुनिया भर में तेजी से बढ़ती उम्र वाली आबादी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। खास ध्यान इस बात पर रहेगा कि हेल्थ सिस्टम किस तरह यह पक्का कर सकते हैं कि लोगों की जिंदगी लंबी होने के साथ-साथ वे अच्छे स्वास्थ्य के साथ भी जीएं।
अनुमान और रोकथाम पर मुख्य जोर
समिट में ऐसे नए इनोवेशन और नीतियों पर चर्चा की जा रही है, जिनमें हेल्थकेयर के केंद्र में बीमारी का पहले से अनुमान लगाने और उसकी रोकथाम को रखा गया है।
इसका घोषित लक्ष्य ऐसा भविष्य तैयार करना है, जिसमें इनोवेशन और आपसी सहयोग साथ आकर “सभी लोगों को ज्यादा लंबी और ज्यादा स्वस्थ जिंदगी देने में मदद करें।”
आज के समाजों में बढ़ती उम्र वाली आबादी एक आम चिंता बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया भर में 2 बिलियन से ज्यादा लोग 60 साल से ज्यादा उम्र के होंगे।
इस अनुमान के बाद इस बात पर ध्यान और बढ़ गया है कि लोगों की उम्र बढ़ने के साथ उनकी देखभाल किस तरह की जानी चाहिए।
अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग में हेल्थ लाइफ साइंस सेक्टर की कार्यकारी निदेशक डॉ अस्मा अल मन्नाई का कहना है कि यह जरूरत भी साफ दिखती है कि पूरे हेल्थ सिस्टम को इस तरह तैयार किया जाए, जिससे लोगों की उम्र बढ़ने के वर्षों के दौरान वे ज्यादा से ज्यादा अच्छे स्वास्थ्य में रह सकें।
अल मन्नाई कहती हैं, “हर हेल्थ सिस्टम के सामने एक ही सवाल है: क्या उम्र के साथ मिलने वाले ये अतिरिक्त साल स्वस्थ साल होंगे? हमारा जवाब है कि हमें अभी से बीमारी का अनुमान लगाने और रोकथाम में निवेश करना होगा।”
संयुक्त अरब अमीरात ने खुद को हेल्थकेयर पॉलिसी में बड़े बदलाव लाने वाले वैश्विक नेता के तौर पर पेश किया है। अल मन्नाई के लिए यह समिट यह बताने का मौका है कि इन नीतियों को वास्तविक समय में किस तरह लागू किया जा रहा है।
पर्सनल जरूरत के हिसाब से इलाज का तरीका
अल मन्नाई बताती हैं, “पर्सनल जरूरत के हिसाब से इलाज ही इसका केंद्र है।”
उनका कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि “हर व्यक्ति के जीनोम, उसके बायोमार्कर और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी के आधार पर उसके जोखिम को समझा जाए और फिर जल्दी कदम उठाया जाए।”
यह तरीका उन जोखिमों की पहचान करने पर आधारित है, जो आगे चलकर बीमारी के लक्षणों में बदल सकते हैं। इसके बाद मिली जानकारी का इस्तेमाल समय रहते कार्रवाई करने के लिए किया जाता है।
अल मन्नाई कहती हैं, “हमारे मॉडल में चार कदम हैं: हम संकेत पहचानते हैं, हम अनुमान लगाते हैं, हम रोकथाम करते हैं और हम इलाज या देखभाल को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से ढालते हैं।”
वह बताती हैं कि यह सिस्टम जीनोमिक्स, स्क्रीनिंग और डेटा के जरिए संकेतों को पहचानता है।
इसके बाद यह लक्षण दिखाई देने से कई साल पहले बीमारी के जोखिम का अनुमान लगाता है। फिर शुरुआती और लक्षित कदमों के जरिए बीमारी को रोकने की कोशिश की जाती है।
अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट, फ्यूचर हेल्थ प्लेटफॉर्म का मुख्य कार्यक्रम है। फ्यूचर हेल्थ प्लेटफॉर्म यूएई की राजधानी की पूरे साल चलने वाली एक पहल है, जिसका ध्यान दुनिया भर में सहयोग और हेल्थ इनोवेशन में बड़े बदलाव लाने पर है।
जीनोम कार्यक्रम से मिली बुनियाद
अबू धाबी की जिन पहलों को खास तौर पर सामने रखा गया है, उनमें अमीराती जीनोम प्रोग्राम भी शामिल है। यह कार्यक्रम 2019 में पूरे यूएई में शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य सभी अमीरातियों के आनुवंशिक ढांचे का नक्शा तैयार करना था।
अब तक 800,000 से ज्यादा रिकॉर्ड इकट्ठा किए जा चुके हैं।
अल मन्नाई का कहना है कि यह कार्यक्रम इस सोच पर आधारित है कि किसी व्यक्ति के आनुवंशिक ढांचे को समझने से “पर्सनल जरूरत के हिसाब से रोकथाम की बुनियाद” तैयार की जा सकती है।
इस डेटा से अमीराती आबादी में विरासत में मिलने वाली नजर की कमजोरी से जुड़े आनुवंशिक कारकों का पहले ही पता चल चुका है।
कार्यक्रम में ऐसे करीब 100 आनुवंशिक कारक पाए गए।
यह खोज दिखाती है कि जीनोमिक जानकारी किस तरह किसी आबादी के भीतर मौजूद जोखिमों की पहचान कर सकती है। यह जानकारी रोकथाम के लिए ज्यादा लक्षित और व्यक्ति या समूह की जरूरत के अनुसार तरीके को अपनाने में भी मदद कर सकती है।
अमीराती जीनोम प्रोग्राम को एक बड़े प्रयास के हिस्से के तौर पर पेश किया गया है। इस व्यापक प्रयास में नीति, डेटा, रिसर्च, मरीजों तक इलाज पहुंचाना, टेक्नोलॉजी और निवेश को एक ही हेल्थकेयर विजन के आसपास जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मलाफी हेल्थ रिकॉर्ड को जोड़ता है
अल मन्नाई ने जिस एक और पहल का जिक्र किया, वह मलाफी है। इसे क्षेत्र का पहला हेल्थ इन्फॉर्मेशन एक्सचेंज बताया गया है। यह अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग की एक रणनीतिक पहल भी है।
मलाफी को 2019 में शुरू किया गया था। इसे अबू धाबी हेल्थ डेटा सर्विसेज चलाती है।
यह सिस्टम 3,000 से ज्यादा हेल्थकेयर सुविधाओं को आपस में जोड़ता है। इसके जरिए 14 मिलियन से ज्यादा मरीजों के 4 बिलियन से ज्यादा रिकॉर्ड एक जगह लाए गए हैं।
अल मन्नाई का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म डॉक्टरों और दूसरे क्लिनिकल स्टाफ को मरीजों के पूरे हेल्थ रिकॉर्ड तक सुरक्षित पहुंच देता है।
उनके मुताबिक, इस पहुंच से इलाज की निरंतरता बनाए रखने, मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने और क्लिनिकल फैसले बेहतर जानकारी के आधार पर लेने में मदद मिलती है।
जीनोम प्रोग्राम और मलाफी, दोनों मिलकर यह दिखाते हैं कि अबू धाबी समिट में बताए गए मॉडल को लागू करने के लिए डेटा और जरूरी ढांचे का इस्तेमाल किस तरह कर रहा है। इस मॉडल में बीमारी का पहले से अनुमान लगाना, उसकी रोकथाम करना और हर व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से देखभाल को ढालना शामिल है।
लंबी उम्र पर केंद्रित हेल्थ सिस्टम तैयार करना
अल मन्नाई कहती हैं, “अबू धाबी में नीति, नियम, इलाज पहुंचाने की व्यवस्था, रिसर्च, टेक्नोलॉजी और निवेश, सभी एक विजन के आसपास साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।”
वह कहती हैं कि अमीराती जीनोम प्रोग्राम को तैयार करते समय इसकी गवर्नेंस, डेटा, बुनियादी ढांचे और साझेदारियों को एक ही समय पर विकसित किया गया।
अल मन्नाई के मुताबिक, इससे रिसर्च और नई खोजों को तेजी से इलाज की व्यवस्था तक और अर्थव्यवस्था तक पहुंचाना संभव हुआ।
यह मॉडल समिट के उस बड़े सवाल से जुड़ा है कि हेल्थ सिस्टम बढ़ती उम्र वाली आबादी की जरूरतों का जवाब किस तरह दे सकते हैं। इसके लिए बीमारी साफ तौर पर सामने आने से पहले ही कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है।
अल मन्नाई कहती हैं, “मैं उम्मीद करती हूं कि अबू धाबी को उस जगह के तौर पर जाना जाएगा, जिसने यह साबित किया कि लंबी उम्र पर केंद्रित हेल्थ सिस्टम काम करता है।”
वह इसे ऐसे हेल्थ सिस्टम के संभावित ब्लूप्रिंट के रूप में बताती हैं, जो संकेतों को पहचान सके, बीमारी के जोखिम का अनुमान लगा सके, उसकी रोकथाम कर सके और लोगों की देखभाल को उनकी जरूरत के हिसाब से ढाल सके।
उनका कहना है कि इसका लक्ष्य दुनिया के हर हिस्से में लोगों को ज्यादा लंबी, ज्यादा स्वस्थ और ज्यादा संतोष देने वाली जिंदगी जीने में मदद करना है।
इसी वजह से समिट में लंबी उम्र को हेल्थकेयर इनोवेशन के साथ रखा गया है। यहां बीमारी की रोकथाम और समय रहते उठाए गए कदमों को उन अतिरिक्त वर्षों को ज्यादा स्वस्थ बनाने का तरीका बताया जा रहा है।
स्रोत: South China Morning Post
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अबू धाबी फ्यूचर हेल्थ समिट में किस मुद्दे पर जोर दिया जा रहा है?
समिट में बीमारी का पहले से अनुमान लगाकर उसकी रोकथाम करने और लोगों को लंबी व स्वस्थ जिंदगी देने पर जोर दिया जा रहा है।
समिट में हेल्थकेयर के लिए कौन-सा तरीका बताया गया है?
पर्सनल जरूरत के हिसाब से इलाज को केंद्र में रखने की बात कही गई है, जिसमें जीनोम, बायोमार्कर और रोजमर्रा की जिंदगी के आधार पर जोखिम समझा जाता है।
इस हेल्थकेयर मॉडल के चार कदम क्या हैं?
इस मॉडल में संकेत पहचानना, बीमारी का अनुमान लगाना, रोकथाम करना और इलाज या देखभाल को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से ढालना शामिल है।
2050 तक 60 साल से ज्यादा उम्र के कितने लोग होने का अनुमान है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक 2050 तक दुनिया भर में 60 साल से ज्यादा उम्र के 2 बिलियन से ज्यादा लोग होंगे।
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