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उज्जैन पुलिस ने 11 साल के संपत्ति विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला

उज्जैन की चिमनगंज मंडी पुलिस ने सूझबूझ और निष्पक्षता दिखाते हुए साल 2015 से चल रहे एक संपत्ति विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करा दिया है।

उज्जैन पुलिस ने 11 साल के संपत्ति विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला
Image credit: News Darpan Team

उज्जैन की चिमनगंज मंडी पुलिस ने सूझबूझ और निष्पक्षता दिखाते हुए साल 2015 से चल रहे एक संपत्ति विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करा दिया है। लंबे वक्त से अपनी ही संपत्ति में घुसने के लिए जद्दोजहद कर रही सारिका जैन को उज्जैन पुलिस की कोशिशों से उनके मकान का कब्जा वापस मिल गया है।

सारिका जैन पुलिस अधीक्षक उज्जैन प्रदीप शर्मा के पास पहुंची थीं। उन्होंने इस मामले में थाना प्रभारी विवेक कनोडिया को निर्देश दिए और दोनों पक्षों के बयान लिए गए। पुलिस ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और दूसरे तथ्यों की बारीकी से जांच की।

दस्तावेजों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दूसरे पक्ष को कानूनी स्थिति और आगे क्या हो सकता है इसके बारे में बताया और उन्हें समझाया। उज्जैन पुलिस की निष्पक्ष कार्रवाई और समझाइश के बाद योगेश शर्मा ने अपनी मर्जी से मकान की चाबी सारिका जैन को सौंप दी।

करीब 11 साल बाद संपत्ति का कब्जा मिलने पर पीड़ित पक्ष ने उज्जैन पुलिस का शुक्रिया अदा किया। इस पूरे मामले में पुलिस ने विवाद को कानून के मुताबिक तरीके से सुलझाते हुए न सिर्फ पीड़ित महिला को उसकी संपत्ति का कब्जा दिलाया बल्कि दोनों पक्षों के बीच शांतिपूर्ण समाधान भी करा दिया। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी विवेक कनोडिया, आरक्षक सुनील चौधरी और आरक्षक भूपेश की अहम भूमिका रही।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में यह संपत्ति विवाद कितने साल पुराना था?

यह संपत्ति विवाद 11 साल पुराना था। साल 2015 से सारिका जैन अपने मकान का कब्जा पाने के लिए संघर्ष कर रही थीं।

इस विवाद को सुलझाने में किसने मदद की?

उज्जैन पुलिस ने इस विवाद को सुलझाया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के निर्देश पर थाना प्रभारी विवेक कनोडिया, आरक्षक सुनील चौधरी और आरक्षक भूपेश ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

पुलिस ने इस मामले में क्या करा?

पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान लिए, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की, और दूसरे पक्ष को कानूनी स्थिति समझाई। इसके बाद योगेश शर्मा ने अपनी मर्जी से मकान की चाबी सारिका जैन को सौंप दी।

सारिका जैन को पुलिस के पास क्यों आना पड़ा?

सारिका जैन को अपने ही मकान में घुसने के लिए लंबे वक्त से जद्दोजहद करनी पड़ रही थी, इसलिए वे पुलिस अधीक्षक उज्जैन के पास पहुंची थीं।

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