यूपी ने गन्ने की चार नई किस्में जारी कीं, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
यूपी में गन्ने की चार जल्दी तैयार होने वाली किस्मों को मंजूरी मिली। CoS.23232 की पैदावार 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही।
उत्तर प्रदेश ने उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य से गन्ने की नई किस्में जारी कीं
उत्तर प्रदेश ने उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य से गन्ने की नई किस्में जारी कीं
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि खेती के लिए गन्ने की चार नई किस्में जारी की गई हैं। सरकार के मुताबिक, इस कदम से गन्ने और चीनी, दोनों का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार ने कहा कि मंजूर की गई किस्में जल्दी तैयार होने वाली हैं। इनसे बेहतर पैदावार और चीनी रिकवरी मिलने की उम्मीद है।
नई किस्मों को समीक्षा के बाद मंजूरी
यह फैसला बीज गन्ना और गन्ने की किस्म मंजूरी उप-समिति की हाल की बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में गन्ने की नई किस्में जारी करने पर चर्चा हुई।
बैठक में उप-समिति के अधिकारी, उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद के निदेशक, शाहजहांपुर स्थित यूपी गन्ना अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक और लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक शामिल हुए।
बैठक के दौरान शाहजहांपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद की ओर से प्रस्तावित किस्मों की पैदावार और उनमें चीनी की मात्रा से जुड़े आंकड़े पेश किए गए।
उत्तर प्रदेश की गन्ना आयुक्त और स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक मिनिस्थी एस. ने द हिंदू को बताया कि आंकड़ों में जल्दी तैयार होने वाली किस्म CoS.23232 का प्रदर्शन काफी अच्छा दिखा।
मिनिस्थी एस. की ओर से बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, CoS.23232 की प्लांट क्रॉप की औसत पैदावार 95.56 tons/hectare रही।
यह मानक किस्म Co.0238 की पैदावार से 9.44% ज्यादा थी।
मिनिस्थी एस. ने यह भी कहा कि CoS.23232 रेड रॉट बीमारी के प्रति प्रतिरोधी है और रैटून फसल में भी इसका प्रदर्शन अच्छा है।
विस्तार से चर्चा के बाद इस किस्म को खेती के लिए शामिल किया गया। इसे पैदावार और चीनी रिकवरी, दोनों के मामले में लोकप्रिय किस्म Co.0238 से बेहतर पाया गया।
भारतीय संस्थान की किस्म पर भी विचार
यूपीसीएसआर के अतिरिक्त गन्ना आयुक्त और निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा कि उप-समिति ने लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित जल्दी तैयार होने वाली गन्ने की किस्म को जारी करने पर भी विचार किया।
इसलिए मंजूरी की प्रक्रिया में शाहजहांपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद की ओर से विकसित किस्मों के साथ-साथ लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित जल्दी तैयार होने वाली किस्म को भी शामिल किया गया।
सरकार ने कहा कि नई मंजूर की गई किस्मों से किसानों को खेती के लिए विकल्प मिलेंगे। इससे गन्ने और चीनी का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
छह पुरानी किस्मों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा
उप-समिति ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए गन्ने की छह पुरानी किस्मों को अनुपयुक्त घोषित करने का भी फैसला किया।
बैठक के विवरण के मुताबिक, यह फैसला इन किस्मों की कम लोकप्रियता और इनके बहुत कम खेती क्षेत्र के आधार पर लिया गया।
इन छह किस्मों को अगले दो साल में धीरे-धीरे खेती से हटाया जाएगा।
अभिषेक आनंद ने कहा कि ज्यादा पैदावार और ज्यादा चीनी रिकवरी वाली किस्मों को मंजूरी मिलने के बाद किसानों के पास खेती के लिए किस्मों के ज्यादा विकल्प होंगे।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव से राज्य में गन्ने की पैदावार बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक खुशहाली बढ़ेगी। साथ ही, चीनी रिकवरी में सुधार होने से चीनी उद्योग को भी फायदा मिलेगा।
यूपीसीएसआर के निदेशक ने कहा कि इस कदम से गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने इस फैसले को यूपीसीएसआर शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों की ओर से की गई प्रगति और रिसर्च का सबूत बताया।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर प्रदेश ने गन्ने की कितनी नई किस्में जारी की हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार ने खेती के लिए गन्ने की चार नई किस्में जारी की हैं।
नई गन्ने की किस्मों से क्या फायदा होने की उम्मीद है?
इनसे गन्ने और चीनी का उत्पादन बढ़ने, बेहतर पैदावार और ज्यादा चीनी रिकवरी मिलने की उम्मीद है।
CoS.23232 किस्म की औसत पैदावार कितनी रही?
CoS.23232 की प्लांट क्रॉप की औसत पैदावार 95.56 tons/hectare रही, जो Co.0238 से 9.44% ज्यादा थी।
गन्ने की पुरानी किस्मों को लेकर क्या फैसला हुआ?
गन्ने की छह पुरानी किस्मों को अनुपयुक्त घोषित किया गया है और उन्हें अगले दो साल में धीरे-धीरे खेती से हटाया जाएगा।
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