सूखा प्रभावित यादगीर-रायचूर के गांवों में केंद्रीय टीम ने नुकसान का जायजा लिया
केंद्रीय टीम ने यादगीर और रायचूर के सूखा प्रभावित गांवों का दौरा कर फसलों के नुकसान और किसानों की मुश्किलों का आकलन किया।
सूखे से प्रभावित यादगीर और रायचूर के गांवों का केंद्रीय टीम ने किया जायजा
तीन सदस्यों वाली अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने रविवार को यादगीर और रायचूर जिलों के कई सूखा प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीम ने खरीफ सीजन के दौरान लंबे समय तक बारिश नहीं होने के बाद फसलों को हुए नुकसान और किसानों की मुश्किलों का आकलन किया।
जायजे के दौरान खेतों में हुए नुकसान की स्थिति और बारिश की कमी से प्रभावित खेती करने वाले समुदायों की हालत पर खास तौर पर ध्यान दिया गया।
तीन सदस्यों वाली टीम ने खेतों में जाकर किया आकलन
टीम में पटना के चावल विकास विभाग के निदेशक मन सिंह, नई दिल्ली के व्यय विभाग के अवर सचिव पार्थ पॉल और नई दिल्ली के ग्रामीण विकास विभाग के अवर सचिव राकेश कुमार शामिल थे।
खेतों के दौरे के दौरान अधिकारियों ने प्रभावित किसानों से सीधे बातचीत की। इस बातचीत का मकसद जमीन पर हालात की गंभीरता को समझना था।
किसानों के साथ यह बातचीत दोनों जिलों में संकट के आकलन का हिस्सा थी। इन दोनों जिलों में बारिश की भारी कमी रही है और मिट्टी में नमी भी काफी कम हो गई है।
खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान
खरीफ सीजन में फसलों की बढ़त के अहम दौर के दौरान लंबे समय तक बारिश नहीं होने की वजह से लाखों एकड़ में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। इनमें मुख्य रूप से कपास, हरा चना और लाल चना शामिल हैं।
स्रोत सामग्री के मुताबिक, फसलों को हुए नुकसान ने खेती पर निर्भर परिवारों को गहरे आर्थिक दबाव में डाल दिया है।
सरकारी सर्वे रिपोर्ट में लंबे समय तक बारिश नहीं होने और मिट्टी में नमी की बेहद गंभीर कमी की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने यादगीर और रायचूर को सूखा प्रभावित घोषित किया।
यह घोषणा सूखे की स्थिति कितने समय तक बनी रही और इसका मिट्टी की नमी पर क्या असर पड़ा, इन दोनों बातों से जुड़े निष्कर्षों के बाद की गई।
राहत की मांग के लिए रिपोर्ट में मदद मिलेगी
यादगीर के डिप्टी कमिश्नर राहुल पांडवे और रायचूर की डिप्टी कमिश्नर पूविता एस. के साथ राजस्व और कृषि विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी जायजे के दौरान केंद्रीय टीम के साथ मौजूद रहे।
अधिकारियों ने सूखे की स्थिति का आकलन करने में टीम की मदद के लिए प्रशासन से जुड़े आंकड़े और खेतों से मिली रिपोर्टें उपलब्ध कराईं।
केंद्रीय टीम का जमीन पर किया गया आकलन और स्थानीय किसानों से बातचीत के दौरान मिली जानकारी, दोनों जिलों की स्थिति पर केंद्र को भेजी जाने वाली औपचारिक रिपोर्ट का आधार बनेंगे।
इस रिपोर्ट का मकसद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत वित्तीय राहत और मदद के पैकेज को मंजूरी दिलाने में सहायता करना है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्रीय टीम ने किन जिलों के गांवों का दौरा किया?
केंद्रीय टीम ने कर्नाटक के यादगीर और रायचूर जिलों के कई सूखा प्रभावित गांवों का दौरा किया।
केंद्रीय टीम ने गांवों में किस चीज का जायजा लिया?
टीम ने बारिश की कमी से फसलों को हुए नुकसान और किसानों की मुश्किलों का आकलन किया।
सूखे से किन फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
सूखे से कपास, हरा चना और लाल चना समेत लाखों एकड़ में खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
केंद्रीय टीम की रिपोर्ट का क्या मकसद है?
रिपोर्ट का मकसद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत वित्तीय राहत और मदद के पैकेज को मंजूरी दिलाने में सहायता करना है।
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