शिक्षिका को चाइल्ड केयर लीव न मिलने पर पति का धरना, बच्चा भी साथ
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका दीक्षा सक्सेना को चाइल्ड केयर लीव नहीं मिलने की वजह से उनके पति ने अपने मासूम बच्चे शिवित सक्सेना
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका दीक्षा सक्सेना को चाइल्ड केयर लीव नहीं मिलने की वजह से उनके पति ने अपने मासूम बच्चे शिवित सक्सेना को गोद में लेकर दफ्तर के बाहर धरना शुरू कर दिया है। यह मामला अब सियासी रंग पकड़ चुका है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
शिक्षिका दीक्षा सक्सेना इकौना विकास खंड क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अपने बच्चे की देखभाल के लिए 15 सितंबर 2026 को ऑनलाइन आवेदन दाखिल किया था। इस आवेदन में उन्होंने 21 सितंबर से 9 अक्टूबर तक कुल 19 दिनों की छुट्टी की मांग की थी। नियमों के तहत बाल देखभाल अवकाश यानी चाइल्ड केयर लीव मिलना उनका हक था, लेकिन तय समय सीमा खत्म हो जाने के बाद भी विभाग की तरफ से यह छुट्टी मंजूर नहीं की गई।
बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने और कहीं से भी सुनवाई नहीं होने से परेशान होकर शिक्षिका के पति ने आखिरकार अपना धैर्य खो दिया। वह अपने मासूम बच्चे को लेकर सीधे ब्लॉक संसाधन केंद्र यानी ABSA दफ्तर के परिसर में पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। पति का साफ कहना है कि जब तक उनकी पत्नी की छुट्टी को लेकर विभाग की ओर से कोई ठोस और सही फैसला नहीं लिया जाता, तब तक वह इस धरने से नहीं हटेंगे।
इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर धरने की तस्वीर शेयर करते हुए सूबे की भाजपा सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि "श्रावस्ती में एक शिक्षिका को छुट्टी न मिलने पर मासूम बच्चे के साथ ABSA दफ़्तर पर धरने पर बैठा पति उत्तर प्रदेश की संवेदनहीन अफ़सरशाही की पोल खोल रहा है। 'उत्तम प्रदेश' का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार में कर्मचारी और उनके परिवार पाई-पाई के न्याय के लिए तरस रहे हैं।"
कांग्रेस के इस तीखे हमले के बाद बेसिक शिक्ा विभाग बैकफुट पर आ गया है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग भी तेज हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि एक महिला कर्मचारी के कानूनी अधिकार को दबाने वाले जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। यह मामला बेसिक शिक्षा विभाग की संवेदनहीन कार्यशैली को सामने ला रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शिक्षिका दीक्षा सक्सेना को चाइल्ड केयर लीव क्यों नहीं मिली?
दीक्षा सक्सेना ने 15 सितंबर 2026 को अपने बच्चे की देखभाल के लिए 21 सितंबर से 9 अक्टूबर तक 19 दिनों की छुट्टी के लिए आवेदन किया था। नियमों के तहत यह छुट्टी उनका हक था, लेकिन तय समय सीमा खत्म हो जाने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग ने इस छुट्टी को मंजूर नहीं किया।
पति ने धरना क्यों दिया और वह कहां बैठे हैं?
शिक्षिका के पति ने अपने मासूम बच्चे शिवित सक्सेना को गोद में लेकर श्रावस्ती जिले के ब्लॉक संसाधन केंद्र यानी ABSA दफ्तर के परिसर में धरना दिया है। वह तब तक धरने से नहीं हटेंगे जब तक विभाग की ओर से छुट्टी को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता।
यह मामला राजनीतिक रंग कैसे पकड़ गया?
जब इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने X पर पोस्ट करके भाजपा सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर जोरदार हमला बोला। कांग्रेस ने सरकार की संवेदनहीन अफसरशाही के बारे में कहा है।
शिक्षिका इकौना विकास खंड के किस स्कूल में काम करती हैं?
दीक्षा सक्सेना बेसिक शिक्षा विभाग के तहत इकौना विकास खंड क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात हैं।
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