प्रतापगढ़ के हनुमान मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव की बरही धूमधाम से मनाई गई
प्रतापगढ़ के श्री हनुमान मंदिर चिलबिला में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की बरही को पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया।
प्रतापगढ़ के श्री हनुमान मंदिर चिलबिला में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की बरही को पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस खास मौके पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
बरही के मौके पर विधिवत पूजन-अर्चन और आरती के बाद श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की। इस भव्य आयोजन के लिए मंदिर परिसर को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया था। मंदिर समिति के महासचिव और समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने भगवान श्रीकृष्ण, हनुमान जी महाराज, माता जी, राम दरबार और भगवान भोलेनाथ का विधिवत पूजन-आरती की।
पूजा-आरती के बाद ब्राह्मण पूजन और भोज कराया गया और फिर विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने ब्राह्मणों को वस्त्र दान करके उनका आशीर्वाद हासिल किया।
समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने बताया कि हनुमान मंदिर चिलबिला में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की बरही पर भंडारे की परंपरा करीब 135 वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
बरही के दौरान महिलाओं ने मंगलगीत और सोहर गाकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। माखन खिलाकर कान्हा की बरही की रस्म पूरी तरह से निभाई गई। मंदिर परिसर में पूरे दिनभर श्रद्धालुों की लगातार आवाजाही बनी रही। भंडारे में बड़ी तादाद में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
भंडारे के प्रभारी सूरज उमरवैश्य अपने सहयोगियों के साथ पूरी व्यवस्था संभालते रहे। इस आयोजन को सफल बनाने में सुरेश अग्रवाल, रामगोपाल, विवेक उमरवैश्य, संतोष कुमार, छेदीलाल, देवानंद, पुल्लू, राकेश बनिया, शनि महाराज, सोनू महाराज, अशोक लाइट, ननका, शुभम, सचिन, मनीष, अमन गुप्ता, श्याम बाबू, अमित, रवि गुप्ता, दीपू, विपिन, सनी गुप्ता, सुरेश पांडे नेताजी, विवेक यादव, राजकुमार और राजू महुली सहित बड़ी संख्या में हनुमान भक्तों ने अपना सहयोग दिया।
रोशनलाल उमरवैश्य ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि 135 साल पुरानी इस परंपरा को हनुमान भक्त आज भी पूरी श्रद्धा से निभा रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रतापगढ़ के हनुमान मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव की बरही में क्या-क्या किया गया?
भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद विधिवत पूजन-अर्चन और आरती की गई। महिलाओं ने मंगलगीत और सोहर गाए। माखन खिलाकर कान्हा की बरही की रस्म पूरी तरह निभाई गई और फिर भंडारे का आयोजन किया गया।
हनुमान मंदिर चिलबिला में कृष्ण जन्मोत्सव की बरही की परंपरा कितने साल पुरानी है?
यह परंपरा करीब 135 साल पुरानी है। पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाया जा रहा है।
इस आयोजन में मंदिर को कैसे सजाया गया?
मंदिर परिसर को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया था। भव्य आयोजन के लिए पूरे दिनभर श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही बनी रही।
बरही के दौरान भक्तों को क्या दिया गया?
ब्राह्मणों का पूजन किया गया और उन्हें वस्त्र दान दिए गए। इसके बाद भंडारे में बड़ी तादाद में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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