स्लोवाकिया की सरकार आज विश्वास मत का सामना करेगी
स्लोवाकिया की सरकार पर संकट, कर्ज़ ने पार की संवैधानिक सीमा
स्लोवाकिया की सरकार गुरुवार को संसद में विश्वास मत का सामना करेगी। यह फैसला तब लिया गया जब देश का कर्ज़ उसकी संवैधानिक सीमा को पार कर गया। बुधवार को स्लोवाकिया की संवैधानिक अदालत ने सरकार को तुरंत विश्वास मत लेने का आदेश दिया था, जिसे प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको ने स्वीकार करते हुए वोट की घोषणा की।
प्रधानमंत्री फीको की गठबंधन सरकार के पासंसद की 150 सीटों में से 78 सीटें हैं, जिससे उनके विश्वास मत में पास होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, इस मुद्दे पर बहस को 12.5 घंटे तक सीमित रखा गया है। फीको ने कहा कि सरकार ने पहले इस विश्वास मत को अगले साल के बजट पर होने वाले वोट के साथ जोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन अदालत के आदेश के बाद इसे पहले ही करना पड़ा।
यह संकट तब शुरू हुआ जब यूरोस्टेट ने नवंबर में रिपोर्ट दी कि स्लोवाकिया का कर्ज़ उसके सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) का 59.7% तक पहुंच गया है। इसके बाद स्लोवाकिया के सांख्यिकी कार्यालय ने पुष्टि की कि यह आंकड़ा बढ़कर 61.4% हो गया है। हालांकि यह यूरोपीयूनियन के औसत से कम है, लेकिन स्लोवाकिया की संवैधानिक सीमा को पार कर गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बढ़ते कर्ज़ का मुख्य कारण सरकार का बढ़ा हुआ खर्च है। कोविड-19 महामारी के आर्थिक प्रभावों और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ी ऊर्जा कीमतों से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर खर्च किया। अब यह देखना होगा कि विश्वास मत में सरकार को समर्थन मिलता है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्लोवाकिया की सरकार को विश्वास मत का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
स्लोवाकिया का कर्ज़ उसकी संवैधानिक सीमा को पार कर गया है। यूरोस्टेट की रिपोर्ट के बाद पता चला कि कर्ज़ सकल राष्ट्रीय उत्पाद का 61.4% तक पहुंच गया है। संवैधानिक अदालत ने सरकार को तुरंत विश्वास मत लेने का आदेश दिया।
प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको की सरकार विश्वास मत में पास हो पाएगी?
फीको की गठबंधन सरकार के पास संसद की 150 सीटों में से 78 सीटें हैं। इसके कारण विश्वास मत में पास होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
स्लोवाकिया के बढ़ते कर्ज़ का कारण क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ता खर्च मुख्य कारण है। कोविड-19 महामारी के आर्थिक प्रभावों और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ी ऊर्जा कीमतों से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर खर्च किया।
विश्वास मत पर बहस कितने समय तक चलेगी?
इस विश्वास मत पर बहस को 12.5 घंटे तक सीमित रखा गया है।
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