प्रतापगढ़ में विज्ञान बस के जरिए छात्रों को दिया गया प्रयोगशाला प्रशिक्षण
प्रतापगढ़ के रामराज इंटर कॉलेज में जिला विज्ञान क्लब की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देश पर दो दिवसीय विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रतापगढ़ के रामराज इंटर कॉलेज में जिला विज्ञान क्लब की ओर से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देश पर दो दिवसीय विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कई स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को 'विज्ञान बस' के माध्यम से प्रयोगशाला संबंधी प्रशिक्षण दिया गया। इस बस में विद्यार्थियों को प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान की विभिन्न अवधारणाओं को समझाया गया और उन्हें विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से परिचित कराया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में रामराज इंटर कॉलेज के अलावा कालूराम इंटर कॉलेज शीतलागंज तथा राम नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज पट्टी के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशस्त कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को विज्ञान के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को विषय को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रतापगढ़ में विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया?
यह कार्यक्रम प्रतापगढ़ के रामराज इंटर कॉलेज में आयोजित किया गया था। इसमें कई स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
विज्ञान बस में छात्रों को क्या सिखाया गया?
विज्ञान बस के माध्यम से छात्रों को प्रयोगों के जरिए विज्ञान की विभिन्न अवधारणाओं को समझाया गया और विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों से परिचित कराया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कितने दिन का था?
यह दो दिवसीय विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम था जिसका आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद उत्तर प्रदेश के निर्देश पर किया गया।
किन स्कूलों के छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया?
रामराज इंटर कॉलेज, कालूराम इंटर कॉलेज शीतलागंज और राम नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज पट्टी के छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
प्रधानाचार्य ने ऐसे प्रशिक्षण के बारे में क्या कहा?
प्रधानाचार्य डॉ. प्रशस्त कुमार त्रिपाठी ने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ती है और उन्हें विषय को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलता है।
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