संभल की समाजसेविका दीपा वार्ष्णेय महिलाओं-बच्चों के सशक्तिकरण में जुटीं
संभल के हयातनगर की रहने वाली समाजसेविका दीपा वार्ष्णेय महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही हैं।
संभल के हयातनगर की रहने वाली समाजसेविका दीपा वार्ष्णेय महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही हैं। उनका मानना है कि महिलाएं किसी से कमजोर नहीं होती हैं और उन्हें हर परिस्थिति का मुकाबला करना चाहिए। इसी सोच के साथ वह महिलाओं और लड़कियों को प्रतियोगिताओं और अन्य कार्यक्रमों के जरिए जागरूक करने का काम कर रही हैं।
दीपा वार्ष्णेय ने ठाना है कि कोई महिला कमजोर न रहे। उनका कहना है कि परोपकार करने से शांति का अनुभव होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने दो वर्ष पूर्व महिला शक्ति संगठन नाम की एक समिति बनाई। इस समिति में उन्होंने नगर की 24 महिलाओं को एकत्र किया और समाज सेवा का काम शुरू किया।
दीपा वार्ष्णेय और समिति से जुड़ी महिलाएं महिलाओं को उनके अधिकारों और समाज के प्रति उनके दायित्वों की जानकारी देने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं और लड़कियों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है। समिति का मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें अपनी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार करना है।
समाज सेवा की शुरुआत में दीपा वार्ष्णेय को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। समाज सेवा के लिए कोई बड़ी संस्था सहयोग करने को तैयार नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपना काम जारी रखा। धीरे-धीरे उनकी समिति महिलाओं के बीच काम करने लगी और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रम लगातार किए जाने लगे।
दीपा वार्ष्णेय की समिति गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। जहां भी किसी गरीब लड़की की शादी में परेशानी आती है, वहां दीपा वार्ष्णेय और समिति की महिलाएं पहुंचती हैं। वह हर संभव सहायता करने की कोशिश करती हैं। समिति अब तक काफी गरीब लड़कियों की शादी में योगदान दे चुकी है।
दीपा वार्ष्णेय विश्व हिंदू परिषद मात्रशक्ति की जिला संयोजिका भी हैं। महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए किए जा रहे उनके इस काम के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
दीपा वार्ष्णेय बाल संस्कार केंद्र भी चलाती हैं। इस केंद्र में बच्चों को रोज 1 घंटा इकट्ठा किया जाता है। यहां बच्चों को अच्छी आदतें, संस्कार और भारतीय संस्कृति सिखाई जाती है।
बाल संस्कार केंद्र में बच्चों को प्रार्थना, मंत्र और भजन सिखाए जाते हैं। उन्हें अच्छी कहानियां सुनाई जाती हैं। इसके साथ ही बच्चों को योग, सफाई और अनुशासन की जानकारी दी जाती है। उन्हें मोबाइल से दूर रखकर अच्छे आचरण की ओर लाने की कोशिश की जाती है।
दीपा वार्ष्णेय का कहना है कि वह जीवनभर इसी तरह समाज सेवा करती रहेंगी। उनके इस काम में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीपा वार्ष्णेय किस काम के लिए जानी जाती हैं?
दीपा वार्ष्णेय महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण और समाज सेवा के लिए काम करती हैं।
महिला शक्ति संगठन समिति का मकसद क्या है?
समिति का मकसद महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देना, उन्हें जागरूक करना और आत्मनिर्भर बनाना है।
गरीब लड़कियों की शादी में समिति कैसे मदद करती है?
समिति गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में जरूरत के मुताबिक हर संभव सहायता करने की कोशिश करती है।
बाल संस्कार केंद्र में बच्चों को क्या सिखाया जाता है?
केंद्र में बच्चों को अच्छी आदतें, संस्कार, भारतीय संस्कृति, प्रार्थना, भजन, योग, सफाई और अनुशासन सिखाया जाता है।
दीपा वार्ष्णेय को उनके काम के लिए क्या मिला है?
महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए किए गए काम के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
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