साक्षी महाराज ने दोहराया बूचड़खाने बंद कराने का दस साल पुराना वादा
उन्नाव सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर उन्नाव में चल रहे बूचड़खानों को बंद कराने का अपना वादा दोहराया है।
उन्नाव सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर उन्नाव में चल रहे बूचड़खानों को बंद कराने का अपना वादा दोहराया है। जनता दर्शन कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा कि बूचड़खानों को बंद कराने के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई होगी।
साथ ही सांसद साक्षी महाराज ने अब तक बूचड़खाने बंद न करा पाने पर खेद भी जताया।
गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान साक्षी महाराज ने उन्नाव में बूचड़खानों को बंद कराने का वादा किया था। लगातार तीन बार उन्नाव लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर सांसद बने साक्षी महाराज के सामने यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।
उन्नाव में औद्योगिक चमड़ा उद्योग से जुड़ी कई फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिनमें जिले के हजारों युवा रोजगार करते हैं।
स्थानीय स्तर पर बूचड़खानों और चमड़ा इकाइयों को लेकर पर्यावरण एवं जल प्रदूषण की शिकायतें भी उठती रही हैं। आरोप है कि इन औद्योगिक इकाइयों के चलते जिले के कई इलाकों में लोगों को शुद्ध पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षों बाद भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित शुद्धिकरण के मामले पर साक्षी महाराज ने भाजपा नेताओं के समर्थन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम के बाद वहां साफ-सफाई की जाती है।
अपने घर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब सभी लोग चले जाएंगे तो सफाई भी होगी और साफ-सफाई का मतलब ही शुद्धिकरण होता है।
राहुल गांधी पर लिखे गए दलित उत्पीड़न से संबंधित मुकदमे पर टिप्पणी करते हुए साक्षी महाराज ने उन्हें कार्टून की संज्ञा दी।
सांसद के बयान के बाद एक बार फिर उन्नाव में बूचड़खाने, चमड़ा उद्योग, प्रदूषण और शुद्ध पेयजल का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
साक्षी महाराज ने बूचड़खाने बंद कराने का वादा कब किया था?
साक्षी महाराज ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्नाव में बूचड़खानों को बंद कराने का वादा किया था। अब तक वह तीन बार सांसद बन चुके हैं, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हो पाया है।
उन्नाव में बूचड़खानों और चमड़ा उद्योग से क्या समस्याएं हो रही हैं?
इन औद्योगिक इकाइयों के चलते पर्यावरण और जल प्रदूषण की शिकायतें उठती हैं। इसके कारण जिले के कई इलाकों में लोगों को शुद्ध पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उन्नाव में चमड़ा उद्योग से कितने लोग जुड़े हैं?
उन्नाव में औद्योगिक चमड़ा उद्योग से जुड़ी कई फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिनमें जिले के हजारों युवा रोजगार करते हैं।
साक्षी महाराज ने बूचड़खाने बंद न कर पाने पर क्या कहा?
साक्षी महाराज ने अब तक बूचड़खाने बंद न कर पाने पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि बूचड़खानों को बंद कराने के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई होगी।
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