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महंगाई के जवाब में आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाईं, नीति रुख बदला

RBI ने महंगाई के जवाब में ब्याज दरें 25 bps बढ़ाईं और नीति रुख ‘calibrated tightening’ किया। Q2 महंगाई अनुमान 4.9% रखा।

महंगाई के जवाब में आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाईं, नीति रुख बदला
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ठीक जवाब: RBI और महंगाई पर

Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee (MPC) ने महंगाई बढ़ने के जवाब में ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही समिति ने अपनी नीति का रुख “neutral” से बदलकर “calibrated tightening” कर दिया है। इस बदलाव का संकेत साफ है कि केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए अपने पास मौजूद सभी साधनों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।

RBI ने अब Q2 में खुदरा महंगाई का अनुमान 4.9% रखा है। यह August में लगाए गए 4.7% के अनुमान से ज्यादा है। उम्मीद है कि Q3 में महंगाई बढ़कर 6% हो जाएगी। इसके बाद Q4 में इसमें थोड़ी कमी आ सकती है और यह 5.7% तक आ सकती है। ये अनुमान ऐसे समय में आए हैं, जब दुनिया में तेल की कीमतें थोड़ी राहत के बाद एक बार फिर $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं।

तेल की कीमतें और उपभोक्ताओं पर दबाव

भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों ने अब तक दुनिया में तेल की कीमतों में हुई ज्यादातर बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने से रोक रखा है। माना जा रहा है कि ऐसा सरकार के निर्देशों के बाद किया गया है। लेकिन कंपनियां ऐसे वित्तीय दबाव को हमेशा तक नहीं झेल सकतीं।

कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का असर पहले ही काफी गंभीर हो चुका है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई को तेजी से ऊपर ले जा सकती है। इसी समय कमजोर मानसून खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि साल के बाकी हिस्से में भी इसका असर जारी रहेगा और खाद्य कीमतें बढ़ती रहेंगी।

इन दोनों हालात के एक साथ बने रहने से RBI को ऐसे महंगाई के दबाव से निपटना पड़ रहा है, जिसकी बड़ी वजह सप्लाई से जुड़ी है। जब महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह सप्लाई से जुड़े कारण होते हैं, तब ब्याज दर बढ़ाने का महंगाई पर असर सिर्फ दूसरे स्तर का और काफी सीमित हो सकता है। ब्याज दर में बढ़ोतरी ऐसे दबावों को सीधे तौर पर खत्म नहीं कर सकती।

ब्याज दर बढ़ाने के पीछे का संकेत

इन हालात में MPC की ओर से दिया गया संकेत ब्याज दर बढ़ाने के तुरंत असर जितना ही अहम हो जाता है। MPC ने अपनी ताजा नीति समीक्षा का इस्तेमाल महंगाई को लेकर लोगों और बाजार की उम्मीदों को कम करने की कोशिश के लिए किया है। स्रोत इसे कार्रवाई के एक अहम क्षेत्र के रूप में बताता है।

आने वाले समय में महंगाई बहुत ज्यादा रहने की उम्मीद अपने आप पूरी होने वाली भविष्यवाणी बन सकती है। ऐसा उन कारणों से अलग भी हो सकता है, जो वास्तव में कीमतों को ऊपर ले जा रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए 25 bps की बढ़ोतरी को एक सावधानी भरे हल्के धक्के के तौर पर बताया गया है, न कि ऐसे जोरदार कदम के रूप में जिसे पहले से ही बेअसर होना तय हो।

हालांकि इससे भी ज्यादा अहम संकेत नीति के रुख में आया बदलाव है। यह रुख “neutral” से “calibrated tightening” हो गया है। अब नीति से जुड़ा सवाल यह नहीं रह गया है कि RBI December में होने वाली अपनी अगली बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा या नहीं। अब सवाल यह है कि वह ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी करेगा।

विकास के सामने भी ऐसी ही परीक्षा

नीति के रुख में यह बदलाव यह भी बताता है कि RBI को भरोसा है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा कड़ी मौद्रिक स्थितियों का सामना कर सकती है। केंद्रीय बैंक ने 2026-27 के लिए GDP growth का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। August में यह अनुमान 6.7% रखा गया था।

यह सकारात्मक बदलाव ऐसे अनुमान के साथ आया है, जिसमें साल के बाद के हिस्से में विकास की रफ्तार कमजोर रहने की बात कही गई है। सभी आर्थिक एजेंसियां ब्याज दरें बढ़ाए जाने से पहले ही साल की दूसरी छमाही में सुस्ती का अनुमान लगा रही थीं।

इसलिए विकास और महंगाई के बीच संतुलन का सवाल RBI के फैसले की समझदारी की परीक्षा लेगा। ज्यादा ब्याज दरों से Foreign Portfolio Investors (FPIs) का लगातार बाहर जाना भी रुक सकता है। इससे RBI को विनिमय दर से जुड़े दबावों से निपटने के लिए कुछ राहत और समय मिल सकता है।

सरकार की भूमिका

RBI ने अब तक महंगाई पर अपनी तरफ से जो किया जा सकता था, वह किया है। लेकिन अब अगली जिम्मेदारी सरकार की है। खाद्य महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार के पास कई साधन हैं। इनमें रणनीतिक भंडार, आयात और निर्यात पर नियंत्रण, जमाखोरी रोकने के कदम और खुले बाजार में खरीद-बिक्री की कार्रवाई शामिल हैं।

इन साधनों का ज्यादा असरदार तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी महंगाई को लेकर लोगों और बाजार की उम्मीदों को आकार देने में मदद कर सकती है। लेकिन स्रोत साफ करता है कि सप्लाई से जुड़े दबावों से निपटने के लिए मौद्रिक नीति से आगे जाकर कार्रवाई करनी होगी।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी की है?

RBI की Monetary Policy Committee ने ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी की है।

RBI ने अपनी नीति का रुख कैसे बदला है?

नीति का रुख “neutral” से बदलकर “calibrated tightening” कर दिया गया है।

RBI ने Q2 में खुदरा महंगाई का कितना अनुमान जताया है?

RBI ने Q2 में खुदरा महंगाई का अनुमान 4.9% रखा है।

2026-27 के लिए GDP growth का अनुमान कितना है?

RBI ने 2026-27 के लिए GDP growth का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।

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