रामलीला में कुंभकर्ण-मेघनाद वध का मंचन, रावण शोक में डूबा
रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार को रामायण के महत्वपूर्ण युद्ध प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान कुंभकर्ण और मेघनाद के वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया।
रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार को रामायण के महत्वपूर्ण युद्ध प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान कुंभकर्ण और मेघनाद के वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। दोनों प्रसंगों को देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। अपने भाई और पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर रावण शोक में डूब गया और दहाड़ मारकर विलाप करने लगा।
रामलीला के तीसरे दिन रावण के दरबार से युद्ध प्रसंगों की शुरुआत हुई। मेघनाद ने रावण को लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होने और अपनी सेना की पराजय की जानकारी दी। यह सुनने के बाद रावण ने अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाने का आदेश दिया।
नींद से जागने के बाद कुंभकर्ण ने रावण को सही राह पर चलने की सीख दी। उसने रावण से कहा कि उसे अपना अहंकार छोड़कर भगवान श्रीराम की शरण में जाना चाहिए। कुंभकर्ण ने रावण को समझाने की कोशिश की, लेकिन रावण ने उसकी बात नहीं मानी।
इसके बाद कुंभकर्ण युद्धभूमि में पहुंचा। वहां भगवान श्रीराम और कुंभकर्ण के बीच युद्ध का प्रसंग दिखाया गया। अंत में भगवान श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध कर दिया। कुंभकर्ण की मृत्यु की खबर से रावण को गहरा दुख हुआ, लेकिन उसने युद्ध जारी रखा।
कुंभकर्ण के वध के बाद रावण ने अपने पुत्र मेघनाद को युद्ध के लिए भेजा। मंचन के दौरान दिखाया गया कि मेघनाद ने भगवान श्रीराम को नागपाश में बांध दिया। इसके बाद नारद जी के अनुरोध पर गरुड़ ने श्रीराम को नागपाश से मुक्त कराया।
आगे के प्रसंग में मेघनाद के यज्ञ करने का प्रयास दिखाया गया। विभीषण ने श्रीराम को मेघनाद के यज्ञ की जानकारी दी। इसके बाद युद्ध का प्रसंग हुआ और मेघनाद का वध हो गया। पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर रावण शोक में डूब गया और पुत्र-वियोग में विलाप करने लगा।
राजातालाब क्षेत्र के रानी बाजार में विजयादशमी से पहले रामलीला का शुभारंभ हुआ। उप जिलाधिकारी शांतन कुमार ने शनिवार को दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम किया और जमीन पर बैठकर रामलीला का मंचन देखा।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। समाज उनके व्यक्तित्व और आदर्शों से प्रेरणा लेकर शांति और सद्भाव स्थापित कर सकता है। रामलीला के मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के आदर्शों और रावण के अहंकार के प्रसंगों को दर्शाया गया।
शिवपुर स्थित केंद्रीय कारागार में रामलीला के सातवें दिन सीता की खोज और लंका दहन के प्रसंगों का मंचन किया गया। इस दौरान भगवान श्रीराम, सुग्रीव, अंगद और हनुमान जी से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत किए गए।
मंचन में दिखाया गया कि सुग्रीव ने श्रीराम को बताया कि बालि के भय से वह इस स्थान पर छिपकर रहते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम ने बालि का वध किया। फिर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज बनाया गया।
रामलीला के इन सभी प्रसंगों के माध्यम से सत्य, धर्म, मर्यादा और अहंकार के अंत का संदेश दिया गया। कुंभकर्ण और मेघनाद के वध के साथ रावण के शोक और विलाप को भी मंचन का प्रमुख हिस्सा बनाया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामनगर की रामलीला में किन प्रसंगों का मंचन किया गया?
रामलीला में कुंभकर्ण और मेघनाद के वध के साथ रामायण के कई महत्वपूर्ण युद्ध प्रसंगों का मंचन किया गया।
कुंभकर्ण ने रावण को क्या सलाह दी?
कुंभकर्ण ने रावण से अहंकार छोड़कर भगवान श्रीराम की शरण में जाने को कहा।
कुंभकर्ण का वध किसने किया?
भगवान श्रीराम ने युद्ध के दौरान कुंभकर्ण का वध किया।
मेघनाद की मृत्यु की खबर सुनकर रावण की क्या प्रतिक्रिया हुई?
मेघनाद की मृत्यु की खबर सुनकर रावण शोक में डूब गया और पुत्र-वियोग में विलाप करने लगा।
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