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प्रतापगढ़ में जलभराव से परेशान ग्रामीणों ने दी पलायन की चेतावनी

प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील क्षेत्र के लौली पुख्ता खाम गांव में जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है।

प्रतापगढ़ में जलभराव से परेशान ग्रामीणों ने दी पलायन की चेतावनी
Image credit: News Darpan Team

प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील क्षेत्र के लौली पुख्ता खाम गांव में जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है। गांव के लोगों का कहना है कि पिछले 20-25 वर्षों से यह परेशानी बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बारिश के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि करीब चार महीने तक 40 से 50 परिवार पानी से घिरे रहते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने अब गांव छोड़कर पलायन करने की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों के मुताबिक बारिश शुरू होते ही गांव के कई हिस्सों में पानी भर जाता है। नाले की सफाई नहीं होने और जल निकासी की सही व्यवस्था न बनने के कारण पानी आगे नहीं निकल पाता। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि गांव का संपर्क बाहरी क्षेत्र से कट जाता है। लोगों का कहना है कि वे कई साल से इस समस्या को अधिकारियों के सामने रख रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ शिकायत दर्ज होती है, स्थायी हल नहीं निकलता।

गांव वालों ने जलभराव के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं। पहला कारण यह है कि बारिश के दौरान तालाब ओवरफ्लो हो जाता है और उसका पानी गांव की ओर बहने लगता है। दूसरा कारण साइफन से निकलने वाला अतिरिक्त पानी है, जो बस्ती की ओर आ जाता है। तीसरा कारण नाले की वर्षों से सफाई नहीं होना बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नाला साफ न होने की वजह से पानी आगे नहीं बढ़ पाता और गांव में ही जमा रह जाता है।

गांव निवासी रामलाल पाल ने बताया कि पिछले करीब 25 वर्षों से हर साल चार महीने तक यही स्थिति बनती है। उनके मुताबिक जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल भेजना भी मुश्किल हो जाता है। बच्चों को पानी से पार कराने के लिए उन्हें कंधे पर बैठाकर ले जाना पड़ता है। अगर गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो परेशानी और बढ़ जाती है। रामलाल पाल ने बताया कि ऐसे समय में बीमार व्यक्ति को चारपाई पर लिटाकर कंधे के सहारे अस्पताल तक ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार रोजमर्रा का सामान लाना भी आसान नहीं रह जाता। लोगों को सामान लेने के लिए करीब 150 से 200 मीटर तक पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। कई जगह पानी कमर तक पहुंच जाता है। ऐसे में लोग सामान सिर पर रखकर घर लौटते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।

लगातार पानी भरे रहने से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गंदे पानी के बीच रहने से बीमारी का खतरा बना रहता है। मवेशियों के बीमार होने की आशंका भी बनी रहती है। जलभराव का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है। इन लोगों को बाहर निकलने, स्कूल जाने, अस्पताल जाने या जरूरी सामान लाने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।

रामलाल पाल का दावा है कि वह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर हर महीने शिकायत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम प्रधान, बीडीओ, सिंचाई विभाग, एसडीएम और जिलाधिकारी को भी कई बार शिकायती पत्र दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों के अनुसार अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले की तत्काल गहरी सफाई कराई जाए। इसके साथ ही नहर के साइफन से आने वाले पानी को नियंत्रित किया जाए और गांव में स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतापगढ़ के किस गांव में जलभराव की समस्या है?

पट्टी तहसील क्षेत्र के लौली पुख्ता खाम गांव में जलभराव की समस्या है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परेशानी करीब 20-25 साल से बनी हुई है।

बारिश में गांव वालों को कितने समय तक दिक्कत होती है?

ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में करीब चार महीने तक 40 से 50 परिवार पानी से घिरे रहते हैं। कई जगह पानी कमर तक पहुंच जाता है।

गांव में जलभराव के मुख्य कारण क्या बताए गए हैं?

गांव वालों ने तीन वजहें बताई हैं: तालाब का ओवरफ्लो होना, साइफन से अतिरिक्त पानी का बस्ती की ओर आना और नाले की लंबे समय से सफाई न होना।

जलभराव से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है?

बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है, बीमार लोगों को चारपाई पर अस्पताल ले जाना पड़ता है और सामान लाने के लिए लोगों को 150 से 200 मीटर तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है।

ग्रामीण प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?

ग्रामीण नाले की गहरी सफाई, साइफन से आने वाले पानी पर नियंत्रण और गांव में स्थायी ड्रेनेज सिस्टम की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई नहीं हुई तो वे पलायन को मजबूर होंगे।

#migration#waterlogging#नाला सफाई#पट्टी तहसील#प्रतापगढ़

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