साइबर फ्रॉड और डीपफेक पर पीएम मोदी ने वैश्विक ढांचे की अपील की
पीएम मोदी ने साइबर फ्रॉड, डीपफेक और डिजिटल अपराध रोकने के लिए सरकारों, कंपनियों और टेलीकॉम ऑपरेटरों से वैश्विक सिस्टम बनाने की अपील की।
पीएम मोदी ने साइबर फ्रॉड, डीपफेक और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक ढांचे की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइबर फ्रॉड और डीपफेक से निपटने के लिए एक वैश्विक ढांचा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल खतरे राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुके हैं और इनसे निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
श्री मोदी ने यह अपील इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दसवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए की। यह कार्यक्रम गुरुवार (8 अक्टूबर, 2026) को आयोजित हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकारों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों को साथ मिलकर ऐसे सिस्टम बनाने चाहिए, जो डिजिटल फ्रॉड पर रोक लगा सकें।
मोदी ने कहा, लोगों तक पहुंचने से पहले फ्रॉड रोकने वाला सिस्टम बने
श्री मोदी ने कहा, “मैं GSMA और दुनियाभर के टेलीकॉम ऑपरेटरों से अपील करता हूं: आइए, हम मिलकर एक ऐसा वैश्विक सिस्टम बनाएं, जो इस तरह के फ्रॉड को लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक सके।”
उन्होंने कहा कि भारत ने इस दिशा में अपने अनुभवों से काफी कुछ सीखा है और वह इन अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
श्री मोदी ने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर तभी असरदार हो सकती है, जब उसे लोगों का भरोसा हासिल हो।
डिजिटल अपराधों की सीमापार प्रकृति को समझाते हुए उन्होंने कहा कि एक देश में बैठा व्यक्ति, दूसरे देश में मौजूद किसी व्यक्ति की मदद से, तीसरे देश में अपराध कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि डीपफेक एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री की इन बातों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत को डिजिटल फ्रॉड और टेक्नोलॉजी की मदद से होने वाले अपराधों से जोड़ा गया। ऐसे अपराधों में अलग-अलग देशों के लोग और सिस्टम शामिल हो सकते हैं।
श्री मोदी ने जिस वैश्विक सिस्टम की बात की, उसमें दुनियाभर के टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, कम्युनिकेशन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दूसरे संबंधित पक्ष भी शामिल होंगे।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन 5G यूजर
कम्युनिकेशंस मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2030 तक अपने 5G यूजर बेस को 550 मिलियन से बढ़ाकर एक बिलियन करना है।
उन्होंने कहा कि भारत 4G के मामले में दुनिया से पीछे था, लेकिन अब उसने 6G के मामले में दुनिया की अगुवाई करने का संकल्प लिया है।
श्री सिंधिया ने कहा कि भारत 6G अलायंस के साथ 90 संस्थान जुड़े हुए हैं और इसके तहत 7,700 पेटेंट स्थापित किए गए हैं। इनमें से 4,400 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हैं।
उन्होंने कहा, “हम 4G में दुनिया से पीछे थे। 5G में हम दुनिया के साथ आगे बढ़े। लेकिन हमारा संकल्प है कि 6G में हम दुनिया की अगुवाई करेंगे।”
श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) काउंसिल ने 2030 में प्लेनिपोटेंशियरी कॉन्फ्रेंस की मेजबानी करने के भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
उन्होंने बताया कि ITU की वर्ल्ड टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन असेंबली (WTSA) का आयोजन 2024 में पहली बार भारत में हुआ था।
श्री सिंधिया ने इसे ITU के इतिहास में जिनेवा के बाहर आयोजित सबसे बड़ी WTSA बताया।
ब्रॉडबैंड का विस्तार और डेटा की कम कीमत
सितंबर 2017 में हुए पहले IMC के बाद से भारत की टेलीकॉम यात्रा का जिक्र करते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 60 मिलियन से बढ़कर 1.1 बिलियन से ज्यादा हो गई है।
उन्होंने कहा कि अब देश में 1.35 बिलियन मोबाइल ग्राहक हैं।
श्री सिंधिया ने बताया कि 1 GB डेटा की कीमत 2014 में ₹268 थी, जो अब घटकर ₹8 रह गई है। उन्होंने इसे दुनिया में सबसे सस्ती कीमत बताया।
उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी बात की और कहा कि भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी 84% है।
मंत्री के मुताबिक, दुनिया के 49% डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं।
उन्होंने कहा कि UPI हर साल 260 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है, जिनकी कीमत $3.4 ट्रिलियन है। यह टेक्नोलॉजी 11 दूसरे देशों तक भी पहुंचाई जा चुकी है।
ये आंकड़े भारत के डिजिटल और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को लेकर सरकार की ओर से पेश की गई जानकारी का हिस्सा थे। भारत आने वाली कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
भारतनेट और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
श्री सिंधिया ने कहा कि सरकार की ओर से फंड किए जा रहे $15 बिलियन के भारतनेट प्रोग्राम के जरिए करीब 2.6 लाख ग्राम पंचायतों तक मिडिल-माइल कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम के जरिए बाकी 3.8 लाख गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी भी दी जाएगी। नागरिकों की मांग के मुताबिक हर घर को 100 Mbps कनेक्शन दिया जाएगा।
मैन्युफैक्चरिंग के बारे में मंत्री ने कहा कि 2014 में मोबाइल फोन इंडस्ट्री की कीमत करीब USD 2-3 बिलियन थी। अब यह USD 63 बिलियन की इंडस्ट्री बन चुकी है।
श्री सिंधिया के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक है, जबकि इसका निर्यात करीब $29 बिलियन तक पहुंच गया है।
सरकार की ओर से टेलीकॉम विस्तार और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े ये आंकड़े अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा उपायों की अपील के साथ पेश किए गए। भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना चाहता है और इसके साथ ही फ्रॉड, डीपफेक और दूसरे डिजिटल अपराधों से निपटने की कोशिश भी कर रहा है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीएम मोदी ने किस चीज के लिए वैश्विक ढांचा बनाने की अपील की?
उन्होंने साइबर फ्रॉड, डीपफेक और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक ढांचा बनाने की अपील की।
पीएम मोदी ने डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए क्या सुझाव दिया?
उन्होंने ऐसा वैश्विक सिस्टम बनाने का सुझाव दिया, जो फ्रॉड लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक सके।
इस वैश्विक सिस्टम में किन लोगों और संस्थाओं को शामिल होने को कहा गया?
इसमें सरकारों, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों को मिलकर काम करने को कहा गया।
भारत का 2030 तक 5G यूजर को लेकर क्या लक्ष्य है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक 5G यूजर बेस को 550 मिलियन से बढ़ाकर एक बिलियन करना है।
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