शामली में 50 से अधिक दुकानों के नाम पर कथित फर्जी बिल
शामली में दुकानदारों को जानकारी तक नहीं थी और उनके नाम से बिल तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया।
शामली में दुकानदारों को जानकारी तक नहीं थी और उनके नाम से बिल तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया। केंद्रीय भंडार गृह शामली की मोहर का इस्तेमाल कर 50 से अधिक मेडिकल स्टोर और स्टेशनरी दुकानों के नाम से कथित तौर पर फर्जी बिल तैयार किए गए। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी आलोक यादव ने जांच के निर्देश दिए हैं।
बताया गया है कि इन बिलों पर संबंधित दुकानों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। कुछ बिलों पर दुकानदारों के हस्ताक्षर भी दिखाए गए हैं, लेकिन दुकानदारों ने इन बिलों को जारी करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि बिलों पर दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और उन्होंने ऐसे किसी भुगतान के लिए बिल जारी नहीं किए।
शामली केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष देवराज मलिक ने अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक दुकानों के नाम इस मामले में सामने आए हैं। देवराज मलिक के मुताबिक, उनके नाम से भी बिल तैयार किए गए हैं, जबकि उन्होंने ऐसे बिल जारी नहीं किए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच बैठाई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बिल कहां तैयार किए गए और केंद्रीय भंडार गृह की मोहर का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
पड़ताल में भारत मेडिकल स्टोर के नाम से 1080 रुपये का एक बिल सामने आया है। भारत मेडिकल स्टोर के संचालक और शामली केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष देवराज मलिक ने बताया कि उन्होंने यह बिल जारी नहीं किया। उनके अनुसार, इस बिल पर दर्ज जीएसटी नंबर गलत है, जबकि मोबाइल नंबर उनका ही दर्ज है।
देवराज मलिक ने यह भी बताया कि बिल पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। उन्होंने मामले की शिकायत अधिकारियों से करने की बात कही है। उन्हें आशंका है कि उनके नाम से अन्य बिल भी तैयार किए गए होंगे और उनके आधार पर लाखों रुपये का भुगतान कराया गया होगा।
एक अन्य मामले में डॉ. अकबर खान के नाम से भुवयांश यादव का 14 अगस्त का पर्चा तैयार किया गया। डॉ. खान ने इस तरह का कोई पर्चा जारी करने से इनकार किया है। उन्होंने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने की बात कही है।
वर्मा डेंटल क्लीनिक के नाम से भी 29 जुलाई का एक पर्चा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। डॉ. अजय ने इस पर्चे को अपना मानने से इनकार किया है। उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस पर्चे के जरिए भी संस्थान के नाम और पहचान का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
27 जुलाई को उस्मान मेडिकल स्टोर के नाम से 1565 रुपये का बिल बनाया गया। बिल में बुखार और अन्य दवाइयों का विवरण दर्ज था। स्टोर संचालक ने इस बिल को फर्जी बताया और कहा कि उन्होंने इसे जारी नहीं किया।
शहर की सिटी मैगजीन स्टेशनरी दुकान के नाम से 1330 रुपये का बिल तैयार किया गया। इस बिल में कागज, टेप, पैड और रजिस्टर का विवरण दर्ज था। दुकान मालिक रजत ने बिल जारी करने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके नाम से तैयार किया गया यह बिल उनकी दुकान से जारी नहीं हुआ।
श्रीराम इलेक्ट्रिक के नाम से 27 अगस्त को मोटर पंप और अन्य सामान का 650 रुपये का बिल दर्शाया गया। श्रीराम इलेक्ट्रिक के संचालक ने इस बिल पर दर्ज हस्ताक्षरों को अपना नहीं बताया। इस मामले में भी दुकान के नाम का इस्तेमाल कर बिल तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
देवराज मलिक के अनुसार, अभी तक 50 से अधिक दुकानों के नाम सामने आए हैं। इनमें मेडिकल स्टोर और स्टेशनरी दुकानों के साथ अन्य दुकानों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। वह जिलाधिकारी, एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों से मिलकर मामले की शिकायत करेंगे।
देवराज मलिक ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि दुकानदारों को इन बिलों के बारे में जानकारी नहीं थी, फिर भी उनके नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल दस्तावेजों में किया गया।
जांच में यह पता लगाया जाना है कि फर्जी बिल आखिर कहां तैयार किए गए। यह भी जांच का विषय है कि इन बिलों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ। बिलों के आधार पर भुगतान किसने कराया और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी भी जांच की जाएगी।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्रीय भंडार गृह के स्तर पर किसी की संलिप्तता थी या बाहरी लोगों ने संस्थान के नाम का दुरुपयोग किया। यह बात जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। अधिकारियों के सामने अब बिल तैयार करने वालों और उनके इस्तेमाल से जुड़े लोगों की पहचान करना बड़ी जांच का हिस्सा है।
जिलाधिकारी आलोक यादव ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
एसपी एनपी सिंह ने भी मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने जांच कराने की बात कही है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि फर्जी बिलों के जरिए कितने भुगतान कराए गए और इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
केंद्रीय भंडार गृह के प्रबंधक संदीप कुमार ने बताया कि जांच कराई जाएगी कि संस्थान के नाम से फर्जी बिल किसने बनाए और इन्हें कहां तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल दुकानदारों से जुड़े इन बिलों और उन पर दर्ज नाम, मोबाइल नंबर तथा हस्ताक्षरों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आएगी। मामले से जुड़े दुकानदार और केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अब जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। फोटो: महबूब अली
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शामली में कितनी दुकानों के नाम पर कथित फर्जी बिल तैयार किए गए?
50 से अधिक मेडिकल स्टोर और स्टेशनरी दुकानों के नाम पर कथित फर्जी बिल तैयार किए गए।
इस मामले में जांच के निर्देश किसने दिए हैं?
जिलाधिकारी आलोक यादव ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
दुकानदारों ने फर्जी बिलों के बारे में क्या कहा?
दुकानदारों ने कहा कि उन्होंने ऐसे बिल जारी नहीं किए और बिलों पर दिखाए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ क्या होगा?
जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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