श्रावस्ती जेल में 306 कैदियों की एचआईवी जांच, जागरुकता शिविर का आयोजन
जिला कारागार श्रावस्ती में एचआईवी/एड्स को लेकर चल रहे सघन जागरुकता अभियान के तहत एक विशेष जांच एवं जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया।
जिला कारागार श्रावस्ती में एचआईवी/एड्स को लेकर चल रहे सघन जागरुकता अभियान के तहत एक विशेष जांच एवं जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कारागार में बंद कुल 306 बंदियों की जांच की गई और उन्हें एचआईवी/एड्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यालय भिनगा स्थित जिला कारागार में आयोजित इस शिविर की अध्यक्षता जेल अधीक्षक राजकुमार जी ने की। शिविर में बंदियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एचआईवी/एड्स एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसका उपचार है किंतु निदान नहीं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति उपचार एवं स्वस्थ खानपान के जरिये अपना पूरा जीवन जी सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी एवं सही जानकारी ही एचआईवी/एड्स से बचाव का मात्र तरीका है।
परामर्शदाता जितेन्द्र मिश्र ने बंदियों को एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को सभी समान अवसर का अधिकार है, स्वास्थ्य का अधिकार है, घर सम्पत्ति एवं विरासत का अधिकार है, शिक्षा का अधिकार है और सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं में सेवा का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एचआईवी संक्रमित होने के कारण किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव किये जाने पर एक्ट 2017 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।
जेल फार्मासिस्ट अशोक पाण्डेय ने बताया कि शिविर में कुल 298 पुरुष एवं 8 महिला बंदियों का एचआईवी, सिफिलिस, हेपेटाइटिस बी एवं सी की जांच एवं टीबी की स्क्रीनिंग की गई।
इस अवसर पर जेलर अवधेश प्रसाद राय, डीपीसी रवि मिश्र, डीपीटीसी संदीप सिंह, जेल समन्वयक श्रीकान्त शुक्ला, गुलाम मुस्तफा, स्नेहा तिवारी, अनुपम श्रीवास्तव, अनूप कुमार व देवी प्रसाद मौजूद रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावस्ती जेल में कितने कैदियों की एचआईवी जांच की गई?
श्रावस्ती जेल में कुल 306 कैदियों की एचआईवी/एड्स जांच की गई। इनमें 298 पुरुष और 8 महिला कैदी शामिल थे।
क्या एचआईवी/एड्स का इलाज संभव है?
हां, एचआईवी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है लेकिन इसका इलाज संभव है। सही उपचार और स्वस्थ खानपान से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति पूरा जीवन जी सकता है।
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को कौन-कौन से अधिकार हैं?
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, नौकरी, घर-संपत्ति और विरासत सहित सभी समान अवसर और अधिकार हैं। उन्हें सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में सेवा का भी अधिकार है।
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति से भेदभाव करना कानूनी है?
नहीं, एचआईवी संक्रमित होने के कारण किसी के साथ भेदभाव करना अपराध है। ऐसा करना एक्ट 2017 के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है।
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