ओंकारेश्वर में 19-20 अक्टूबर को नगर बंद, 19 मांगों पर आंदोलन
सिंहस्थ की तैयारियों के बीच तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।
सिंहस्थ की तैयारियों के बीच तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रस्तावित विकास कार्यों से मकान और दुकानें प्रभावित होने की आशंका के बीच स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और संतों ने आंदोलन का ऐलान किया है। 19 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज लोगों ने 19 और 20 अक्टूबर को ओंकारेश्वर नगर बंद रखने का फैसला लिया है।
शुक्रवार रात स्थानीय नागरिकों और सर्वदलीय प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसी बैठक में दो दिन तक ओंकारेश्वर बंद रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में 16 सदस्यीय समिति की ओर से रखी गई 19 सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई। नागरिकों का कहना है कि इन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बाद 19 और 20 अक्टूबर को नगर बंद रखकर आंदोलन करने का आह्वान किया गया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध इस बात को लेकर है कि विकास के नाम पर वर्षों से बसे परिवारों और लंबे समय से कारोबार कर रहे लोगों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सिंहस्थ को लेकर ओंकारेश्वर में प्रस्तावित विकास योजनाओं के बीच स्थानीय लोगों के सामने अपने आशियाने और कारोबार को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रभावित लोगों ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर उचित मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार की सुरक्षा की मांग उठाई है। उनका कहना है कि मकान और दुकानों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। यह मूल्यांकन वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर होना चाहिए। इसके साथ ही सीमांकन की प्रक्रिया भी निष्पक्ष तरीके से कराए जाने की मांग की गई है।
शासकीय पट्टे वाले मकानों में रहने वाले लोगों को भी पुनर्वास का लाभ देने की मांग की गई है। इसके अलावा लंबे समय से निवास और व्यवसाय कर रहे पात्र लोगों को भी पुनर्वास में शामिल करने की बात कही गई है। प्रभावितों ने साफ किया है कि विस्थापन से पहले उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
16 सदस्यीय समिति ने वेलकम गेट के पास टंट्या मामा की प्रतिमा से गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर प्रभावित परिवारों को 60×90 फीट के भूखंड देने की मांग रखी है। समिति के मुताबिक, जिन परिवारों के मकान या कारोबार इस क्षेत्र में प्रभावित हो सकते हैं, उनके पुनर्वास की व्यवस्था पहले की जानी चाहिए।
दुकानदारों के लिए आसपास वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। किरायेदारों को पुनर्वास में प्राथमिकता देने की बात कही गई है। प्रभावित लोगों ने यह भी कहा है कि मुआवजे में सिर्फ मकान या दुकान का नुकसान नहीं, बल्कि रोजगार के नुकसान को भी शामिल किया जाना चाहिए।
इसके अलावा सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग उठाई गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों और कारोबारियों को अचानक अपना सामान हटाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें जरूरी समय और वैकल्पिक व्यवस्था मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
बैठक और आंदोलन से जुड़े बाइट में षट्दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष महंत मंगलदास त्यागी महाराज का नाम शामिल है। उन्हें काली पगड़ी के साथ चिन्हित किया गया है। नगर भाजपा अध्यक्ष संतोष वर्मा का नाम भी बाइट में है और उन्हें ऑरेंज कुर्ते के साथ बताया गया है।
नगर परिषद ओंकारेश्वर के नेता प्रतिपक्ष राजेश यादव का नाम भी बाइट में शामिल है। उनकी पहचान सफेद शर्ट के साथ बताई गई है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष और पार्षद चंपाबाई का नाम भी बाइट में है। उन्हें महिला के रूप में चिन्हित किया गया है।
फिलहाल ओंकारेश्वर में 19 और 20 अक्टूबर को प्रस्तावित बंद को लेकर आंदोलनकारियों ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। अब नजर प्रशासन के रुख पर रहेगी कि प्रभावितों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं। सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों और स्थानीय नागरिकों के हितों के बीच संतुलन कैसे बनेगा, यह आने वाले दिनों में अहम होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ओंकारेश्वर में नगर बंद कब रखा जाएगा?
ओंकारेश्वर में 19 और 20 अक्टूबर को नगर बंद रखा जाएगा।
ओंकारेश्वर में नगर बंद रखने का फैसला क्यों लिया गया?
19 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होने और विकास कार्यों से मकान-दुकान प्रभावित होने की आशंका के चलते नगर बंद का फैसला लिया गया।
आंदोलनकारी किन मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं?
वे उचित मुआवजे, पुनर्वास, रोजगार की सुरक्षा, स्वतंत्र मूल्यांकन और निष्पक्ष सीमांकन की मांग कर रहे हैं।
प्रभावित दुकानदारों और परिवारों के लिए क्या मांग की गई है?
दुकानदारों के लिए आसपास वैकल्पिक दुकानें, परिवारों के लिए पुनर्वास और सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की गई है।
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