बुरहानपुर के नए कलेक्टर ने दिव्यांग युवक को दिया अपना मोबाइल नंबर
बुरहानपुर के नवागत कलेक्टर IAS विवेक कुमार ने अपनी पहली जनसुनवाई में संवेदनशीलता और सादगी की मिसाल पेश की।
बुरहानपुर के नवागत कलेक्टर IAS विवेक कुमार ने अपनी पहली जनसुनवाई में संवेदनशीलता और सादगी की मिसाल पेश की। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने एक दिव्यांग युवक को समस्या के समाधान के लिए अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दिया। वहीं, एक बुजुर्ग महिला को सम्मानपूर्वक बैठाकर उनकी परेशानी धैर्य के साथ सुनी।
कलेक्टर विवेक कुमार के इस सहज व्यवहार की चर्चा अब बुरहानपुर में हो रही है। लोगों के बीच यह बात सामने आई कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए आम लोगों की तकलीफ को समझना और उनकी बात सम्मान के साथ सुनना भी अधिकारी की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
आम तौर पर जनसुनवाई में लोग अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचते हैं। कई बार लंबी प्रक्रिया और औपचारिकताओं के बीच उन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में बुरहानपुर में हुई नवागत कलेक्टर की पहली जनसुनवाई का अंदाज अलग नजर आया।
कलेक्टर ने केवल फरियादियों की समस्याएं सुनने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने उनसे सम्मान के साथ बात की और उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुना। इसी दौरान एक दिव्यांग युवक अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंचा।
युवक की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक कुमार ने उसे समाधान के लिए अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दे दिया। इस पहल से युवक को मदद की उम्मीद मिली। उसे यह भरोसा भी मिला कि उसकी समस्या सुनी जाएगी और उसके समाधान के लिए संपर्क किया जा सकेगा।
जनसुनवाई में एक बुजुर्ग महिला भी अपनी फरियाद लेकर पहुंचीं। कलेक्टर विवेक कुमार ने उन्हें सम्मान से बैठाया। इसके बाद उन्होंने धैर्य के साथ बुजुर्ग महिला की परेशानी सुनी।
बुजुर्ग महिला के साथ कलेक्टर का यह व्यवहार जनसुनवाई में मौजूद संवेदनशीलता को दिखाता है। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक जिम्मेदारी केवल फाइलों और आदेशों तक सीमित नहीं होती। आम नागरिक के प्रति सम्मान और मानवीय संवेदना भी इस जिम्मेदारी का जरूरी हिस्सा है।
कलेक्टर विवेक कुमार की पहली जनसुनवाई में सामने आए ये दोनों प्रसंग प्रशासन और जनता के रिश्ते की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं। एक ओर दिव्यांग युवक को व्यक्तिगत संपर्क का भरोसा दिया गया, तो दूसरी ओर बुजुर्ग महिला की परेशानी को सम्मान के साथ सुना गया।
इन घटनाओं से यह बात सामने आई कि किसी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं बनती। उसके व्यवहार का भी लोगों पर असर पड़ता है। आम लोगों के लिए प्रशासन तक पहुंचना और अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचा पाना बेहद अहम होता है।
बुरहानपुर में कलेक्टर विवेक कुमार की पहल की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि उन्होंने अपनी पहली ही जनसुनवाई में लोगों के साथ सहज और मानवीय व्यवहार किया। दिव्यांग युवक को अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर देना और बुजुर्ग महिला को बैठाकर उनकी परेशानी सुनना, दोनों ही घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।
अब लोगों की उम्मीद है कि जनसुनवाई में दिखाई गई यह संवेदनशीलता समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी निराकरण में भी नजर आएगी। पहली जनसुनवाई में कलेक्टर विवेक कुमार ने प्रशासन को लोगों के करीब लाने वाला संदेश दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुरहानपुर के नए कलेक्टर कौन हैं?
बुरहानपुर के नए कलेक्टर IAS विवेक कुमार हैं।
कलेक्टर विवेक कुमार ने दिव्यांग युवक के लिए क्या किया?
उन्होंने दिव्यांग युवक को समस्या के समाधान के लिए अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर दिया।
जनसुनवाई में कलेक्टर ने बुजुर्ग महिला के साथ कैसा व्यवहार किया?
उन्होंने बुजुर्ग महिला को सम्मान से बैठाया और धैर्य के साथ उनकी परेशानी सुनी।
कलेक्टर की पहली जनसुनवाई की चर्चा क्यों हो रही है?
उनके सहज और मानवीय व्यवहार की वजह से जनसुनवाई की चर्चा हो रही है।
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