नेल्लोर कृषि अधिकारी ने अल नीनो के बीच कम अवधि की फसलें सुझाईं
नेल्लोर के कृषि अधिकारी ने कम बारिश वाले इलाकों में पानी, मिट्टी की नमी और मौसम के हिसाब से कम अवधि की फसलें चुनने की सलाह दी।
कम बारिश वाले इलाकों में कम अवधि वाली फसलें चुनें, अल नीनो के बीच नेल्लोर के कृषि अधिकारी ने किसानों से कहा
एसपीएसआर नेल्लोर जिला कृषि अधिकारी (डीएओ) पी. सत्यवानी ने किसानों को सलाह दी है कि कम बारिश वाले इलाकों में वे अपने लिए सही कम अवधि वाली फसलों की किस्में चुनें। उन्होंने यह सलाह अल नीनो के असर को देखते हुए दी है।
यह सलाह उन हालात पर लागू होती है, जब बारिश सामान्य से कम हो, बारिश देर से आए या लंबे समय तक सूखा बना रहे। ऐसे समय में किसानों से फसल के हिसाब से सावधानी बरतने को कहा गया है।
पानी की उपलब्धता के हिसाब से फसल की योजना बनाएं
डीएओ के मुताबिक, इस इलाके में मुख्य रूप से धान, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द, चना, मक्का और ज्वार की खेती की जाती है।
उन्होंने किसानों से कहा कि वे पानी की उपलब्धता, मिट्टी में मौजूद नमी, बारिश के तौर-तरीकों और स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर अपनी फसल की योजना बनाएं।
इस सलाह में बुआई और फसल चुनने से जुड़े फैसलों में पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को सबसे अहम माना गया है। किसानों से कहा गया है कि वे इन दोनों बातों को ध्यान में रखकर ही आगे की योजना बनाएं।
उन्होंने कहा, “बीजों की बुआई तभी की जानी चाहिए, जब पर्याप्त बारिश हो और मिट्टी में नमी भी पर्याप्त हो।”
सत्यवानी ने कहा कि धान की खेती में काफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। इसलिए किसानों को यह फसल लगाने की योजना बनाने से पहले पानी की उपलब्धता का आकलन कर लेना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि धान की रोपाई या बुआई तभी की जानी चाहिए, जब पर्याप्त बारिश हो और मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो।
जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां किसानों को अधिकारियों की सलाह के आधार पर कम अवधि वाली धान की किस्मों का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में फसल चुनते समय उपलब्ध पानी को खास तौर पर ध्यान में रखना जरूरी है।
पानी के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
डीएओ ने बीज की क्यारियों में पानी के सही प्रबंधन के तरीकों को अपनाने की भी सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पानी का प्रबंधन करने और पानी की पहले से योजना बनाने की बात कही।
उनकी सलाह के मुताबिक, इन उपायों का मकसद फसल की अहम अवस्थाओं के दौरान पानी की कमी को रोकना है। किसानों से कहा गया है कि वे उपलब्ध पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और उसकी योजना पहले से बनाएं।
उन्होंने किसानों से यह भी कहा कि जब पानी की उपलब्धता कम हो, तब वे दूसरी फसलों के विकल्पों के बारे में स्थानीय कृषि अधिकारियों से सलाह लें।
ये सिफारिशें फसल की योजना बनाने और उपलब्ध पानी के प्रबंधन, दोनों से जुड़ी हैं। इनमें धान की फसल के लिए अलग सलाह दी गई है। साथ ही, उन हालात के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जब किसानों को दूसरी फसलों पर विचार करना पड़ सकता है।
स्रोत: The Hindu
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नेल्लोर के कृषि अधिकारी ने किसानों को क्या सलाह दी?
उन्होंने कम बारिश वाले इलाकों में कम अवधि वाली फसलों की सही किस्में चुनने की सलाह दी।
किसानों को फसल की योजना किन बातों को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए?
किसानों को पानी की उपलब्धता, मिट्टी की नमी, बारिश के तौर-तरीकों और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखना चाहिए।
धान की बुआई या रोपाई कब करनी चाहिए?
धान की बुआई या रोपाई तभी करनी चाहिए, जब पर्याप्त बारिश हो और मिट्टी में नमी मौजूद हो।
पानी कम होने पर किसानों को क्या करना चाहिए?
उन्हें उपलब्ध पानी का सोच-समझकर इस्तेमाल करना चाहिए और दूसरी फसलों के विकल्पों के लिए स्थानीय कृषि अधिकारियों से सलाह लेनी चाहिए।
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