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Politics Official source उज्जैन

महाकाल लोक से पीएम ई-बस और उज्जैन दर्शन सेवा शुरू

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में श्री महाकाल लोक से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा की शुरुआत की।

महाकाल लोक से पीएम ई-बस और उज्जैन दर्शन सेवा शुरू
Image credit: News Darpan Team

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में श्री महाकाल लोक से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा की शुरुआत की। प्रदेश में सुगम, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह सेवा शुरू की गई है। उज्जैन में 27 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने श्री महाकाल लोक के अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से बसों को रवाना किया और स्वयं भी बस में सफर किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शक्ति पथ, महाकाल लोक से बसों को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर वेदपाठी बटुकों ने वेद मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ। शुभारंभ कार्यक्रम को धार्मिक माहौल के साथ जोड़ा गया, क्योंकि यह सेवा उज्जैन के प्रमुख मंदिरों और दर्शनीय स्थलों तक श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नगरवासियों को पहुंचाने के लिए शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा, “मैं भगवान श्री महाकालेश्वर को प्रणाम करता हूं । आज उनकी नगरी में एक अद्भुत अलग प्रकार का दिन है। एक के बाद एक शहर को रोज एक नई सौगात मिल रही है । रोज नए प्रकार के विकास के कीर्तिमान बन रहे हैं ।”

उन्होंने आगे कहा, “21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें चला करती थीं , फिर किसी कारण से सार्वजनिक परिवहन बसों को बंद करना पड़ा । हमने वह अभाव आज पूरा किया है। राज्य परिवहन निगम की बसें एक राज्य से दूसरे राज्य जाएंगी । शहर के अंदर नगरीय स्तर पर भी बसें चलाई जाएंगी । उज्जैन में धार्मिक पर्यटन केंद्र के लिए 10 बसों की सौगात मिल रही है। हम सब इसमें यात्रा करेंगे।”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेशवासियों का सफर सुगम बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और ई-बस सेवा का शुभारंभ किया गया है। इसी व्यवस्था के तहत उज्जैन में पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा शुरू की गई है। यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और शहर के लोगों के लिए एक ही व्यवस्था में प्रमुख धार्मिक और दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने का माध्यम बनेगी।

उज्जैन दर्शन सेवा का रूट मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा। इसके बाद बस महाकाल लोक, हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर, सिद्धवट मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन होते हुए फिर मेघदूत वन पार्किंग पर पहुंचेगी। इसी जगह पर यह रूट खत्म होगा।

उज्जैन दर्शन सेवा का शुल्क ₹200 मात्र होगा। यात्री यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कर सकेंगे। इस सेवा में चलने वाली बसें पूर्ण रूप से जीरो एमिशन रहेंगी। इनसे पॉल्यूशन बिल्कुल नहीं होगा और यह इलेक्ट्रिकल चार्ज होंगी। इस तरह यह सेवा सार्वजनिक परिवहन के साथ-साथ पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए भी शुरू की गई है।

यह मार्ग उज्जैन के प्रमुख मंदिरों और पौराणिक स्थलों को एक श्रृंखला में जोड़ेगा। उज्जैन दर्शन रूट की कुल लंबाई 27.01 किलोमीटर है। इस रूट के जरिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अलग-अलग साधनों पर निर्भर हुए बिना एक तय बस सेवा के माध्यम से कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी।

बस संचालन की व्यवस्था भी इसी तरह बनाई गई है कि यात्री निर्धारित स्टॉप पर बस से उतरकर संबंधित मंदिर या दर्शनीय स्थल का दर्शन कर सकेंगे। दर्शन पूरा होने के बाद यात्री उसी स्टॉप से अगली उपलब्ध उज्जैन दर्शन बस में अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे। निर्धारित वैधता अवधि के दौरान एक ही टिकट पर यात्री मार्ग के अलग-अलग स्टॉप से बस में चढ़ और उतर सकेंगे।

सभी प्रमुख मंदिरों और दर्शनीय स्थलों के पास निर्धारित बस स्टॉप बनाए जाएंगे। यात्रियों को लंबी प्रतीक्षा न करनी पड़े, इसके लिए बसों का संचालन नियमित अंतराल पर किया जाएगा। प्रत्येक प्रमुख स्थल पर दर्शन और भ्रमण के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि श्रद्धालु और पर्यटक आराम से दर्शन कर सकें और फिर उसी सेवा से आगे बढ़ सकें।

यह सेवा मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होकर प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए उज्जैन रेलवे स्टेशन तक कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही सेवा से प्रमुख दर्शन स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी। उज्जैन रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड को रूट में शामिल करने से शहर में आने-जाने वाले लोगों को भी इस सेवा का लाभ मिल सकेगा।

बसों में आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। इनमें लाइव सीसीटीवी, जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग, डिजिटल टिकटिंग और यूपीआई/डिजिटल भुगतान की सुविधा रहेगी। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। बस में डिजिटल असिस्टेंट सह उज्जैन दर्शन गाइड भी उपलब्ध रहेंगे। ये गाइड प्रमुख मंदिरों, दर्शनीय स्थलों, मार्ग और दर्शन से जुड़ी जरूरी जानकारी देंगे।

उज्जैन दर्शन मार्ग में शामिल स्थलों का धार्मिक और पौराणिक महत्व भी बताया गया है। महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन का अधिष्ठाता देव स्थल है। यहां की भस्म आरती विशेष रूप से प्रसिद्ध है। महाकाल लोक में शिव पुराण की कथाओं और शिव-स्वरूपों को मूर्तियों, स्तंभों और भित्तिचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

हरसिद्धि माता उज्जैन की प्राचीन शक्तिस्थली हैं। क्षिप्रा नदी के पवित्र घाटों पर स्नान और पूजा-अर्चना की मान्यता है। ऋणमुक्तेश्वर महादेव में पूजा से विभिन्न ऋणों से मुक्ति की मान्यता जुड़ी है। भर्तृहरि गुफाएँ राजा भर्तृहरि की तपस्या और नाथ संप्रदाय की साधना परंपरा से जुड़ी हैं।

गढ़ कालिका मंदिर की मान्यता महाकवि कालिदास से जुड़ी हुई है। काल भैरव उज्जैन के रक्षक देवता माने जाते हैं। सिद्धवट पितृ कर्मों के लिए विशेष तीर्थ है। अंगारेश्वर और मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह संबंधी मान्यताओं से जुड़े हैं। सांदीपनि आश्रम वह स्थल है जहाँ मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने शिक्षा प्राप्त की थी।

भूखी माता, चिंतामण गणेश, अष्ट विनायक, शनि नवग्रह और इस्कॉन मंदिर भी इस मार्ग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उज्जैन दर्शन सेवा के रूट में इन सभी स्थलों को जोड़ने से श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में शहर के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

उज्जैन शहर में सुगम परिवहन के अंतर्गत कुल 12 मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इनमें तपोभूमि से पान विहार, उज्जैन रेलवे स्टेशन से कालियादेह महल, कानीपुरा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से तपोभूमि, देवास गेट से ताजपुर, देवास गेट से नए आरटीओ कार्यालय, महाकाल चौराहा से अभिलाषा कॉलोनी, देवास गेट से नानाखेड़ा, अवंतिका विश्वविद्यालय से नानाखेड़ा, देवास गेट से मुरलीपुरा, तपोभूमि से नजरपुर और उज्जैन दर्शन मार्ग शामिल हैं।

इन मार्गों के जरिए नगर के प्रमुख आवासीय, व्यावसायिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों को बस सेवा से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था से शहर के भीतर नगरीय स्तर पर बस सेवा चलाने की योजना को भी आगे बढ़ाया गया है। उज्जैन दर्शन सेवा को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में शहर की जरूरतों से जोड़ा गया है।

कार्यक्रम में सांसद श्री अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, डॉ लता वानखेड़े, महापौर श्री मुकेश टटवाल, मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओम जैन, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण समिति के अध्यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, श्री संजय अग्रवाल, श्री विवेक जोशी, श्री राजेंद्र भारती, श्री जगदीश पांचाल, श्री प्रभुलाल जाटवा, एडीजी श्री राकेश गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट, नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा, सीईओ स्मार्ट सिटी श्री संदीप सोनी, अधीक्षण यंत्री श्री के ही मालवीय और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

यह सेवा श्रद्धालुओं को महंगे निजी परिवहन पर निर्भरता घटाते हुए सुविधाजनक, किफायती और सुरक्षित दर्शन यात्रा उपलब्ध कराएगी। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के दृष्टिगत उज्जैन में सुगम आवागमन की यह व्यवस्था नगरवासियों और देश-विदेश से आने वाले भक्तों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में पीएम ई-बस और उज्जैन दर्शन सेवा की शुरुआत किसने की?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में श्री महाकाल लोक से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा की शुरुआत की है।

उज्जैन दर्शन सेवा का कुल किराया कितना रखा गया है?

उज्जैन दर्शन सेवा का शुल्क मात्र ₹200 है, जिसका भुगतान यात्री यूपीआई के जरिए कर सकेंगे।

उज्जैन दर्शन सेवा की बसें पर्यावरण के लिए कैसे फायदेमंद हैं?

यह बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक और जीरो एमिशन वाली हैं, यानी इनसे कोई पॉल्यूशन नहीं होता है।

उज्जैन दर्शन सेवा का रूट कहां से शुरू होकर कहां खत्म होगा?

इस सेवा का रूट मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होकर विभिन्न प्रमुख मंदिरों और स्टेशनों से होते हुए वापस मेघदूत वन पार्किंग पर ही खत्म होगा।

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