News Darpan भारत का डिजिटल दर्पण
ताज़ा
मुरैना में खेत की मेड़ विवाद के बाद युवक की मौत, चार घायलमधुबनी में गड्ढे में जाने के बाद बोलेरो पलटी, पुलिस चालक की मौतसीवान में चाय विवाद में 75 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या की खबरबच्चों के विवाद में युवक की हत्या, आरोपी गिरफ्तार; कुल्हाड़ी बरामदशामली में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो पलटी, चालक समेत दो युवकों की मौतशामली में विवाद सुलझाने पहुंची डायल 112 गाड़ी पर पथराव, चालक घायलग्वालियर GRMC में कथित मारपीट के विरोध में जूनियर डॉक्टरों की हड़तालबेटी के इलाज को तीन दिन भटके पिता, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
Politics General

समितियों की अध्यक्षता न मिलने पर तृणमूल गुट ने सभापति को पत्र लिखा

MAITC ने राज्यसभा की 8 विभाग-संबंधित स्थायी समितियों की अध्यक्षता से बाहर रखे जाने पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को पत्र लिखा।

समितियों की अध्यक्षता न मिलने पर तृणमूल गुट ने सभापति को पत्र लिखा
News Darpan AI image

राज्यसभा की समितियों की अध्यक्षता के बंटवारे को लेकर उठा विवाद अब सभापति सी.पी. राधाकृष्णन तक पहुंच गया है। ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (MAITC) गुट ने ऊपरी सदन के अधिकार क्षेत्र वाली सभी 8 विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियों से उसे बाहर रखे जाने पर सवाल उठाया है।

यह गुट पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करता है। गुट ने 3 अक्टूबर, 2026 को राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा। यह पत्र पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भेजा।

राज्यसभा में अपनी स्थिति का हवाला दे रहा तृणमूल

श्री ओ’ब्रायन के पत्र में समितियों के 2026-27 के लिए फिर से गठन की घोषणा करने वाले ताजा संसदीय बुलेटिन का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा में अब भी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है।

श्री ओ’ब्रायन के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस ने 2024-25 और 2025-26, दोनों वर्षों में एक-एक समिति की अध्यक्षता की थी। लेकिन अब पार्टी को किसी भी समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा फैसला ऐसा पहला मौका नहीं है, जब पार्टी को समिति की अध्यक्षता से बाहर रखा गया हो।

श्री ओ’ब्रायन ने कहा कि 2019 में, जब तृणमूल कांग्रेस सदन में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, तब भी उसे समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि कुछ साल बाद इस स्थिति को ठीक कर दिया गया था।

श्री ओ’ब्रायन ने लिखा, “अब फिर मामला वहीं पहुंच गया है, जहां से शुरू हुआ था।” उन्होंने यह भी कहा, “संसद को एक गहरे, अंधेरे कमरे में बदला जा रहा है।”

पत्र में समिति के मुद्दे को संसद के कामकाज के बड़े रुझानों से जोड़ा गया

अपनी बात के समर्थन में श्री ओ’ब्रायन ने संसद के कामकाज से जुड़े चार रुझानों का जिक्र किया। 2004 से 2009 के बीच हर 10 विधेयकों में से 6 को जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया था। इसके मुकाबले 2019 से 2024 के बीच हर 10 विधेयकों में से केवल 2 को समितियों के पास भेजा गया।

उन्होंने यह भी कहा कि अब पारित होने वाले हर 10 विधेयकों में से 4 की शुरुआत अध्यादेश के रूप में होती है। 20 साल पहले यह संख्या हर 10 विधेयकों में से 2 थी। पत्र में दिए गए ये आंकड़े समिति की अध्यक्षता को लेकर चल रहे विवाद को संसदीय जांच की भूमिका से जुड़ी एक बड़ी दलील के बीच रखते हैं।

श्री ओ’ब्रायन ने अलग-अलग दौर में संसद के बैठने वाले दिनों की संख्या का भी जिक्र किया। पहली लोकसभा में संसद हर सत्र में औसतन 45 दिन बैठी थी। दूसरी और तीसरी लोकसभा में यह औसत 36 दिन था। वहीं 2019 से 2024 के बीच 17वीं लोकसभा में संसद के बैठने का औसत 18 दिन रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में उपसभापति का पद 2019 से खाली है। श्री ओ’ब्रायन ने अंत में कहा, “सर, मैं विनम्रता से अपनी बात यहीं समाप्त करता हूं।”

गुट का कहना है कि वह अब भी एक ही संसदीय पार्टी है

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए थे और यह फैसला “अंतरिम आदेश” के तौर पर था। पार्टी का कहना है कि संसद में तृणमूल कांग्रेस अब भी एक ही संसदीय पार्टी के रूप में काम कर रही है।

पार्टी ने कहा है कि वह इस रुख पर कायम है। यह स्थिति लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस याचिका पर फैसले तक बनी रहेगी, जिसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दाखिल किया है। इस याचिका में विरोधी गुट को दी गई मान्यता को चुनौती दी गई है।

स्रोत: The Hindu

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MAITC ने सभापति को पत्र क्यों लिखा?

MAITC ने राज्यसभा की सभी 8 विभाग-संबंधित स्थायी समितियों की अध्यक्षता से बाहर रखे जाने पर सवाल उठाते हुए पत्र लिखा।

यह पत्र किसने और कब भेजा?

यह पत्र राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने 3 अक्टूबर 2026 को सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को भेजा।

तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में अपनी स्थिति के बारे में क्या कहा?

पार्टी ने कहा कि वह राज्यसभा में अब भी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और संसद में एक ही संसदीय पार्टी के रूप में काम कर रही है।

2026-27 के लिए तृणमूल कांग्रेस को कितनी समितियों की अध्यक्षता मिली?

2026-27 के लिए तृणमूल कांग्रेस को किसी भी समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई, जबकि पिछले दो वर्षों में पार्टी के पास एक-एक समिति की अध्यक्षता थी।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

  1. 1

    श्रावस्ती में सपा बैठक में हंगामा, नेता का माइक छीनने का आरोप

  2. 2

    शामली में 50 से ज्यादा दुकानों के नाम कथित फर्जी बिल, लाखों भुगतान

  3. 3

    शामली महिला का रिश्तेदारों पर 15 लाख के जेवर ले जाने का आरोप

  4. 4

    गन्ने की फसल नुकसान और मारपीट के आरोप, डीएम से जांच की मांग

  5. 5

    हाथरस में आयुष्मान संविदा कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की …

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली टिप्पणी करें।

टिप्पणियाँ समीक्षा के बाद प्रकाशित होती हैं।